फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कृषि विभाग की योजना में 1.92 करोड़ का घोटाला

विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि विभाग की योजना में 1.92 करोड़ का घोटाला
विज्ञापन



बाराबंकी। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक हर मंच से किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कर रहे हैं। इसके लिए तमाम योजनाएं बनाई जा रही हैं। मगर, किसानों को मिलने वाली सुविधाओं पर कृृषि विभाग के अफसर व कर्मचारी ही डाका डालने में लगे हैं।


जिले में कृषि यंत्र की फार्म मशीनरी बैंक योजना में 1.92 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। पांच वर्ष से इस योजना में लगे भ्रष्टाचार के घुन पात्र किसानों को लाभ से वंचित कर रहे हैं।
विज्ञापन



शुरू के तीन वर्ष ये योजना सिर्फ एक आदेश के क्रम में संचालित हो रही थी। मगर, गत वर्ष इसको लेकर शासनादेश भी जारी किया गया। मगर, योजना की पारदर्शिता को लेकर की गई ऑनलाइन व्यवस्था को भी विभाग के बाबू मात दे रहे हैं।


आरक्षण व सूची में क्रमांक के अलावा समूह के नाम पंजीकरण होने की बाध्यता बता सीधे-साधे पात्र किसानों को योजना के लाभ से दूर कर अपात्रों को लाभ दिया। इसी तरह आठ लाख रुपये अनुदान की मोटी रकम बंदरबांट कर ली गई।


ऐसे में पांच वर्ष में इस योजना में पंजीकरण कराने वाले पौने पांच सौ किसानों में 24 को फार्म मशीनरी बैंक योजना का लाभ पहुंचाया गया। जिस पर विभाग की ओर से 1.92 करोड़ रुपये अनुदान दिया गया। सरकार बदली, अफसर बदले मगर बरसों से जारी भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग सका।


सबसे अधिक घोटाला मसौली, सिरौलीगौसपुर व सिद्धौर ब्लॉक के लोगों को लाभ पहुंचाने में किया गया। बंकी, बनीकोडर व त्रिवेदीगंज ब्लॉक में भी अपात्रों को लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है।


यही नहीं पूरे जिले के लिए आई इस योजना में तराई क्षेत्र के पूरेडलई व सूरतगंज ब्लॉक की अनदेखी की गई। यहां एक भी समूह को इसका लाभ नहीं दिया गया।


मसौली व सिरौलीगौसपुर में चार-चार, सिद्धौर में तीन, बंकी, हरख व त्रिवेदीगंज में दो-दो तथा देवा, फतेहपुर, रामनगर, दरियाबाद व हैदरगढ़ में एक-एक फार्म मशीनरी बैंक योजना का लाभ दिया गया।


कृषि यंत्र की फार्म मशीनरी का लाभ विभाग में पंजीकृत किसान समूह को मिलता है। मगर, समूह का पंजीकरण नहीं होने पर किसान के व्यक्तिगत पंजीकरण पर इसका लाभ दे दिया गया। उसके बाद फर्जी समूह तैयार कर विभागीय अभिलेखों में इन्हें शामिल कर लिया।


ऐसे में फार्म मशीनरी के तहत खरीदे गए ट्रैक्टर समूह के नाम न होकर व्यक्तिगत उन्हीं के नाम हो गए। जबकि कई किसानों ने पूर्व में खरीदे ट्रैक्टर की दूसरी रसीद बनाकर योजना का लाभ ले लिया। इतना ही नहीं कइयों को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग के बाबुओं ने विभागाध्यक्ष की सरपरस्ती में फर्जी रजिस्ट्रेशन तक का सहारा लिया।

वहीं, समूह में दूसरे ब्लॉक के एक किसान को शामिल कर कार्यक्षेत्र में भी बदलाव कर घोटाला किया गया। पात्र समूह के अध्यक्ष से लाभ न लेने के फर्जी सहमति पत्र लेकर भी लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है।


सिरौलीगौसपुर के मौलाबाद में जिस सुरेंद्र कुमार नामक किसान को इसका लाभ देने की बात की जा रही है। उसके पिता का नाम भी विभागीय अभिलेखों में सुरेंद्र कुमार अंकित है। वहीं, दिया गया मोबाइल नंबर भी किसी अन्य का है। ऐसे ही कई अन्य मामले हैं। पात्र किसानों के समूह इस योजना के लाभ से वंचित रहे।
विज्ञापन



जिलाधिकारी उदयभानु त्रिपाठी का कहना है कि, मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी। उसके बाद अगर मामला सही पाया गया तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें