बहराइच। तराई में मौसम का मिजाज बुधवार रात अचानक बदल गया। धूल भरी अंधी के साथ बौछारे पड़ीं। ग्रामीण अंचलों में कई स्थानों पर टीन शेड और छप्पर उड़ गए।
पेड़ भी गिरे। पूरी रात बिजली गुल रही। इससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह चटक धूप खिली। मौसम सुहावना रहा। दोपहर बाद लोगों को उमस का सामना करना पड़ा।
तराई में मौसम का मिजाज पल-पल बदल रहा है। बुधवार देर रात 10 बजे के आसपास मौसम बिगड़ गया। धूल भरी आंधी आ गई। जिससे अफरातफरी की स्थिति बन गई।
शहर, गांव और कस्बो में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। लगभग आधे घंटे तक आंधी का असर रहा। जिसके कारण नवाबगंज, नानपारा, मिहींपुरवा, महसी , हुजूरपुर क्षेत्रों में आम, यूकेलिप्टिस आदि के पेड़ उखड़ गए।
नानपारा-चरदा मार्ग पर राधेश्याम का टीनशेड उड़ गया। वहीं दिनेश कुमार का टीनशेड और छप्पर उड़कर 100 मीटर दूर जा गिरा। संयोग से छप्पर और टीनशेड में कोई मौजूद नहीं था।
मिहींपुरवा के जरही गांव निवासी मोहन का मकान तेज आंधी में ढह गया। परिवार के लोग बाल-बाल बचे। गांव के चकरोडों पर पेड़ों के गिरने से सुबह आवागमन प्रभावित रहा।
कई स्थानों पर पेड़ विद्युत लाइन पर गिरे। जिससे तार टूटने के कारण बिजली व्यवस्था ठप हो गई। शहर के साथ ग्रामीण अंचलों में भी रात भर बिजली गुल रही। सुबह आठ बजे के आसपास शहर में सप्लाई शुरू हुई।
मड़ाई का कार्य रुका
जिले के किसानों के खेतों से लगभग 90 फीसदी गेहूं कट चुका है। कुछ गेहूं खलिहानों में लगा हुआ है। किसान मड़ाई की तैयारी में थे।
लेकिन रात में आंधी के साथ ही बौछारों से खलिहान में रखी गेहूं की फसल नम हो गई है। ऐसे में मड़ाई का कार्य भी प्रभावित हुआ है।
पश्चिमी विक्षोभ के असर से बदला मौसम
तराई में पश्चिमी विक्षोभ का असर सप्ताह भर से बना हुआ है। जिससे मौसम रह-रह कर बदल रहा है। अभी यह स्थिति आगामी चार दिन तक रहने के संकेत मिल रहे हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के चलते कम हवा का दबाव होने से आंधी और बौछारों का सामना तराई के लोगों को करना पड़ रहा है।
-डॉ. एमवी सिंह, प्रभारी वैज्ञानिक फसल अनुसंधान केंद्र