एएन-32 विमान हादसे के 18 दिन बाद वायुसेना के जांबाज पुताली का पार्थिव शरीर बीकेटी एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। शुक्रवार सुबह यहां से भौली गांव तक जहां से शवयान गुजरा, लोगों की आंखें नम हो गईं। देश प्रेम के नारों के बीच लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
वायुसेना के अधिकारियों सहित जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने भी सलामी दी। गांव में अंत्येष्टि के बाद पुताली पंचतत्व में विलीन हो गए। तीन जून को असम से अरुणाचल प्रदेश के सफर के दौरान विमान हादसे का शिकार हो गया था। इसमें बख्शी का तालाब के गांव भौली निवासी 45 वर्षीय पुताली की भी मौत हो गई थी।
बृहस्पतिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर वायुसेना के विशेष विमान से बीकेटी एयरफोर्स स्टेशन लाया गया। यहां से शुक्रवार सुबह करीब साढे़ नौ बजे फूलों से सजे वायुसेना के वाहन से शव गांव भौली स्थित घर लाया गया।
पुताली का शव देखकर भाई मुन्नीलाल, शिवचरण व अन्य परिवारीजन फूट-फूटकर रो पडे़। इस दौरान शव के अंतिम दर्शन को आसपास के गांवों से भी हजारों लोग जुटे थे। इसके बाद पार्थिव शरीर श्मशानघाट लाया गया।
यहां बीकेटी वायुसेना स्टेशन के ग्रुप कैप्टन जे. सुआरस, कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन, डीएम कौशल राज शर्मा, एसएसपी कलानिधि नैथानी, एसडीएम प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, सीओ डॉ. बीनू सिंह, नगर पंचायत बीकेटी के अधिशासी अधिकारी श्रीश मिश्र, विधायक अविनाश त्रिवेदी, भौली गांव के पूर्व प्रधान राम बहादुर सिंह, पूर्व नगर विकास मंत्री नकुल दुबे थे। इन्होंने पार्थिव शरीर को कंधा भी दिया। बडे़ भाई मुन्नीलाल ने अंतिम संस्कार किया।
स्मृति में गांव में बनेगा मुख्य द्वार
विधायक अविनाश त्रिवेदी ने घोषणा की कि पुताली की याद में भौली गांव के बाहर नलकूप संख्या 6 के पास मुख्य द्वार बनाया जाएगा। गांव की एक सड़क का भी नाम उनके नाम पर रखा जाएगा।
20 लाख रुपये की मिली मदद
शासन की ओर से पुताली के भाई मुन्नीलाल व शिवचरण को 20 लाख रुपये की मदद दी गई। काबीना मंत्री आशुतोष टंडन ने दोनों को दस-दस लाख रुपये के चेक सौंपे।
परिवारीजनों ने मांगी नौकरी
मुन्नीलाल व शिवचरण ने डीएम को बताया कि पुताली 15 सदस्यों के परिवार का सहारा था। ऐसे में दोनों ने डीएम से एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग की। इस पर डीएम व विधायक ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
देश को समर्पित रहे पुताली
जांबाज के साथ बीकेटी इंटर कॉलेज में पढे़ गांव के पूर्व प्रधान राम बहादुर सिंह ने बताया कि पुताली काफी होनहार थे। बेहद मिलनसार पुताली ने शादी नहीं की थी। वह यही कहते थे कि मैं देश सेवा के लिए समर्पित हूं और अपना सबकुछ बलिदान करने को तैयार हूं।
एक बरस जैसा बीता एक-एक पल
18 दिनों से पुताली के शव का इंतजार कर रहे परिवारीजनों के लिए एक-एक पल एक बरस जैसा बीता था। शुक्रवार को जैसे ही पार्थिव शरीर घर पहुंचा, सभी फूट-फूटकर रो पड़े।