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आखिर किसान नेता की मौत का कौन जिम्मेदार

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रायबरेली। किसान नेता अमृतलाल सविता की मौत ने अफसरों के झूठे आश्वासनों की पोल खोल दी है। तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक के अफसर हक दिलाने के नाम पर उसे महज ढांढस बंधाते रहे। अपनी गर्दन बचाने के लिए भले ही आनन-फानन में अफसरों ने पीड़ित परिवार को मदद का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की हो, लेकिन सवाल ये उठता है कि इस मौत का जिम्मेदार कौन है। यह हाल तब है, जब प्रदेश की योगी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए काम करने का दावा कर रही है। मृतक की पत्नी व भाइयों की आंखों में आंसू हैं तो घटना को लेकर अंदर ही अंदर उनमें गुस्सा भी है। उनका कहना है कि डीएम, एडीएम व एसडीएम से लेकर अन्य अफसर समय रहते चेत जाते तो शायद अमृतलाल सविता आज अपनों के बीच होते।
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यह वही कलेक्ट्रेट है, जहां प्रशासनिक अमला बैठता है और अक्सर अपनी मांगों को लेकर लोग धरना व अनशन पर बैठते हैं। स्थानीय अफसरों, कर्मचारियों से न्याय न मिलने पर उन्हें जिला मुख्यालय के अफसरों से इंसाफ मिलने की उम्मीद रहती है। जिला मुख्यालय पर भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता। किसान कल्याण एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमृतलाल सविता की मौत इसका जीता जागता उदाहरण है, जो सरकारी मशीनरी की चूक को बयां करती है। पहले पीड़ित धरने पर बैठा था। बात नहीं बनी तो अनशन पर बैठ गया। मांग पूरी नहीं हुई, लेकिन वह इस दुनिया से जरूर रूठ गया। अमृतलाल सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि अन्य पीड़ितों की मदद के लिए अक्सर आगे रहते थे। खासकर किसानों की समस्या को लेकर अधिक फिक्रमंद रहते थे।

जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
कलेक्ट्रेट में डीएम दफ्तर के सामने अमृतलाल सविता के साथ धरने पर बैठने वाली पत्नी नीलम व साथी किसान नेता शिवकुमार साहू का कहना है कि मांग पूरी हो जाती तो अमृतलाल की जान बच जाती। अरविंद जायसवाल, अंसार, छेदीलाल यादव का कहना है कि जिला प्रशासन की लापरवाही अमृतलाल की मौत का सबब बन गई। साथी किसानों का कहना है कि डीएम, एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट समेत अन्य अधिकारियों ने लापरवाही बरती। पखवारे भर से धरने और अनशन पर बैठने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। योगी सरकार किसानों की रहनुमा बनती है, लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही से किसान नेता की मौत हो गई।
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बिलख रहे परिवारीजन
किसान नेता की मौत के बाद पत्नी नीलम और भाई मेवालाल, कमलेश दहाड़े मारकर रो पड़ते हैं। कहते हैं कि अफसरों की लापरवाही से अमृतलाल की मौत हुई। अफसर ही उसके भाई की मौत के जिम्मेदार हैं। मृतक अपने पीछे बेटा अनंत विशाल और बेटी अन्नू को छोड़ गया। पोस्टमार्टम के बाद शव घर वालों को सौंपा गया। वे शव लेकर डलमऊ तहसील के सूरजपुर बनापार गांव ले जाने के बाद डलमऊ गंगाघाट पर ले गए। पुलिस की सुरक्षा के बीच अमृतलाल के शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हर किसी की आंखें नम हो गईं।

बर्खास्त हों डीएम, पीड़ित को मिले 30 लाख रुपये
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी के वरिष्ठ नेता विजय विद्रोही और पार्टी के जिला प्रभारी अफरोज आलम ने किसान नेता अमृतलाल सविता की मौत पर नाराजगी जाहिर की है। नेताओं ने कहा कि इस मामले में डीएम को बर्खास्त कर देना चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये की सरकारी मदद देनी चाहिए। नेताओं का कहना है कि योगी सरकार में भी किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इसको लेकर उनका संगठन आरपार की लड़ाई लडे़गा।

अफसरों ने नहीं दिखाई गंभीरता
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामबहादुर यादव ने कहा है कि कलेक्ट्रेट में डीएम दफ्तर के सामने पखवारे भर से धरना देने के दौरान कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे सदमे में आए किसान की मौत हो गई। किसी ने भी किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। यदि डीएम व उनके मातहत किसान की समस्या सुनकर समाधान का भरोसा देते और धरना खत्म करा देते तो अमृतलाल सविता की जान बच जाती, लेकिन योगी सरकार के अफसर संवेदनहीनता बरतते रहे और किसान नेता ने दम तोड़ दिया।
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