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15 नवंबर तक पर्यटक नहीं सुन पाएंगे बाघों की दहाड़

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बहराइच/बिछिया। कतर्निया घाट वन्य जीव बिहार में पांच माह पर्यटक मनमाफिक भ्रमण नहीं कर सकेंगे। ऐसा मानसून सीजन के तहत किया गया है। 15 नवंबर से संरक्षित वन क्षेत्र में पर्यटकों को फिर भ्रमण की अनुमति मिलेगी। इस बीच पर्यटक सिर्फ जंगल में सड़क तक सीमित रहेंगे।
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गेस्ट हाउस या थारू हट में रात भी नहीं बिता सकेंगे। पर्यटक घड़ियाल सेंटर और गेरुआ नदी के तट पर टहल सकेंगे। लेकिन रात होते ही घर की ओर लौटना पड़ेगा। वन क्षेत्राधिकारी इरफान खान ने बताया कि 15 नवंबर से पुन: ऑनलाइन बुकिंग कराई जा सकेगी।

कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस वन क्षेत्र में सात रेंज हैं। इनमें कतर्निया घाट, निशानगाड़ा व मुर्तिहा रेंजों में दुर्लभ बाघ, तेंदुआ, काकड़, पाढ़ा, बारहसिंघा, गैंडे, हाथी समेत कई वन्य जीव बिहार करते हैं। जंगल के बीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में डाल्फिन की उछलकूद पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है।
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घड़ियाल भी काफी संख्या में नदी के टापुओं पर रोमांचित करते हैं। लेकिन बरसात की आहट के चलते वन्यजीव बिहार में भ्रमण पर हर साल की तरह इस बार भी 15 जून से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जंगल के बीच मुख्य सड़क पर भ्रमण कर प्राकृतिक छटा देख सकेंगे। लेकिन जंगल के अंदर और बाघ जोन में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

कतर्नियाघाट के प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि बरसात के महीने में जंगल में बने शेड खराब हो जाते हैं। रास्ते भी झाड़-झंखाड़ व जंगली घास से मार्ग अवरुद्ध रहता है। हर स्थान पर पानी भर जाता है। वन्य जीवों के हमले का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आवागमन में परेशानी होती है।

गेरुआ नदी में पानी अधिक होने से बोटिंग करने में खतरा अधिक रहता है। प्रति वर्ष पांच महीने तक पर्यटकों के भ्रमण पर अंकुश लगा दिया जाता है। पर्यटकों की डिमांड के कारण इस बार थोड़ी छूट दी गई है, जिसके तहत पर्यटक घड़ियाल सेंटर और गेरुआ सफारी में पैदल सैर कर सकेंगे।

डीएफओ ने कहा कि बरसात का मौसम खत्म होने के बाद 15 नवंबर से वन्य जीव विहार नई तैयारी के साथ पर्यटकों के भ्रमण के लिए पुन: खोला जाएगा।

बाघों के प्रजनन का भी होता है समय
वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि अक्तूबर से नवंबर के मध्य तक का समय बाघों के प्रजनन का होता है। ऐसे में जंगल में पर्यटकों का विहार करना काफी खतरनाक होता है। बाघ, बाघिन एक साथ आक्रामक हो जाते हैं। इसलिए भी पर्यटकों के भ्रमण पर पाबंदी लगाई जाती है।
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