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आबादी में पहुंचे हिरन को कुतों ने नोचा

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हरख (बाराबंकी)। वन रक्षकों की ओर से संरक्षण को लेकर बरती जा रही लापरवाही के चलते जंगल से भटका चीतल प्रजाति का एक हिरन शुक्रवार को रेंगउवा गांव के पास आबादी के बीच पहुंच गया। जहां कुत्तों ने हिरन को दौड़ाते हुए नोचना शुरू कर दिया। कुत्तों से बचने के लिए हिरन भागते हुए सीएचसी परिसर में घुस गया। हिरन को देख कर्मचारियों ने कुत्तों को भगाते हुए वन विभाग को सूचना दी। वन कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से घायल हिरन को पकड़ कर पशु चिकित्सालय भेजा।
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सतरिख थाना क्षेत्र के रेंगउवा गांव के पास शुक्रवार को तालाब के किनारे पहुंचे एक हिरन को कुत्तों ने दौड़ा लिया। हिरन को नोचते देख ग्रामीण परवेश यादव, जसवंत, विनोद, राजेश वर्मा आदि उसे बचाने के लिए दौड़े, तब तक हिरन भागकर सीएचसी जाटा बरौली परिसर में घुस गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने कुत्तों को भगाते हुए हिरन को परिसर में बंद कर लिया। परिसर के अंदर ही ग्रामीणों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। सीएचसी अधीक्षक डॉ. कुलदीप मौर्य ने इसकी सूचना क्षेत्रीय रेंजर को दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे वन रक्षक हरिनाम यादव, रामसेवक, एसएन सैनी व वन दरोगा विद्या प्रसाद वर्मा ने ग्रामीणों की मदद से जाल लगाकर हिरन को पकड़ लिया। डॉ. कुलदीप मौर्य ने बताया कि हिरन का एक सींग टूटा था। मुंह व पैर में घाव और शरीर के पिछले हिस्से को कुत्तों ने नोंच डाला। हिरन का प्राथमिक उपचार सीएचसी में करने के बाद उसे वन विभाग के हवाले कर दिया गया।


डल्लू खेड़ा जंगल से आया था हिरन
रेंजर विक्रम सिंह सचान ने बताया कि जाटा बरौली से डेढ़ किमी. दूर गोमती नदी के किनारे डल्लू खेड़ा जंगल है। गोमती में पानी कम होने के कारण हिरन आबादी की ओर आ गया था। चीतल प्रजाति का नर हिरन है, जिसकी उम्र करीब डेढ़ साल है।
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हिरन घायल अवस्था में मिला है। पशु चिकित्सालय बाराबंकी में इलाज कराकर उसे सफदरगंज स्थित विभाग की नर्सरी पर रखकर उसकी देखभाल की जाएगी। घाव ठीक होने के बाद उसे डल्लू खेड़ा जंगल में ही छोड़ दिया जाएगा।
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- जावेद अख्तर, डीएफओ
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