हमला होने की जानकारी मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचेगा दल
बहराइच/उर्रा। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी से सटे गांवों में बाघ और तेंदुओं के बढ़े हमले को देखते हुए दुधवा नेशनल पार्क से बाघ प्रोटेक्शन टीम भेजी गई है। यह टीम पूरे जंगल परिक्षेत्र में मोबाइल रहेगी। हमले की जानकारी होते ही तत्काल मौके पर पहुंचेगी। बाघ और तेंदुओं पर हमलों पर निगरानी के साथ ही पीड़ित को मौके पर स्वास्थ्य सेवा मुहैया करायी जा सकेगी।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके आसपास 43 ऐसे गांव हैं जो जंगल से पूरी तरह सटे हुए हैं। आए दिन बाघ और तेंदुए जंगल से निकलकर गांवों में पहुंच जाते हैं। जिसका नतीजा हमलों के रूप में सामने आता है। जनवरी से अब तक 33 हमले हो चुके हैं।
बीते 25 दिनों से हमलों में इजाफा हुआ है। चार मासूमों को बाघ और तेंदुओं ने निवाला बना लिया। जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। 30 से अधिक मवेशी भी बाघ और तेंदुओं का शिकार हुए हैं। हमलों के बढ़ने के कारण मानव वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
इसको देखते हुए वन विभाग ने दुधवा नेशनल पार्क से बाघ प्रोटेक्शन टीम के मोबाइल वेटनरी इकाई की ड्यूटी लगाई है। पांच सदस्यीय इस टीम में वन्यजीव विशेषज्ञ के साथ ही चिकित्सक और समाजशास्त्री भी मौजूद रहेंगे। जो पीड़ित को मौके पर ही इलाज मुहैया कराने के साथ ही आक्रोशित ग्रामीणों को वन्यजीवों की विशेषताओं से अवगत कराएंगे।
बचाव के उपाय सुझाने के साथ ही मानव वन्यजीव संघर्ष पर अंकुश लगा सकेंगे। दुधवा नेशनल पार्क से आए टीम के प्रोजेक्ट हेड प्रेमचंद्र पांडेय ने बताया कि सुजौली रेंज के बगुलहिया फार्म में टीम कैंप कर रही है। इसके साथ ही जंगल क्षेत्र में जीपीएस सिस्टम से नजर रखी जा रही है।
हमले की घटनाएं होने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर पीड़ित को इलाज मुहैया कराने के साथ ही व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि पहली बार विशेष टीम को कतर्नियाघाट सेंक्चुरी क्षेत्र में लगाया गया है।
टीम में ये लोग हैं शामिल
टीम के प्रोजेक्ट हेड प्रेमचंद्र पांडेय ने बताया कि इस विशेष टीम में वन्यजीव विशेषज्ञ व चिकित्सक डॉ. रीतिका माहेश्वरी, समाजशास्त्री ओमप्रकाश मिश्रा, वैज्ञानिक मिस्टर फ्रांसिस, वेटनरी हेड कर्म सिंह शामिल हैं।
गांव में शिविर लगा करेंगे जागरूक
टीम के प्रोजेक्ट हेड प्रेमचंद्र पांडेय ने बताया कि टीम का मुख्य उद्देश्य मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकना है। इसके लिए जंगल से सटे गांवों में शिविर लगाने के साथ ही स्कूलों में गोष्ठियां कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
इस नंबर पर कॉल करें, तत्काल मिलेगी सहायता
प्रोजेक्ट हेड प्रेमचंद्र ने बताया कि 9452448855 पर कॉल करके टीम की सहायता ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही तत्काल मोबाइल वेटनरी टीम मौके पर पहुंचकर हरसंभव मदद करेगी।