बहराइच। छात्र-छात्राओं को पढ़ने में अब ढिबरी की रोशनी से निजात मिल सकेगी। न तो उनकी आंखें कमजोर होंगी और न ही नजर की शिकायत होगी। इस मामले में भारत सरकार ने आईआईटी मुंबई के सहयोग से स्टडी सोलर योजना शुरू की है, जिसमें कक्षा एक से 12 तक के छात्र-छात्राओं को महज 100 रुपये अनुदान पर सोलर लैंप मुहैया कराई जाएगी। सूरज की रोशनी से लैंप को चार्ज कर छात्र रात में पढ़ाई कर सकेंगे। जिले में एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत योजना को परवान चढ़ाने की तैयारी है। जिसके तहत प्रथम चरण में जिले के दो विकास खंडों को चयनित किया गया है। इन दो ब्लॉकों में योजना सफल होने के बाद अन्य विकास खंडों में लागू की जाएगी।
तराई का बहराइच जिला प्रदेश के पिछड़े जनपदों के पायदान में सबसे नीचे है। जिसके चलते हालात यह हैं कि यहां की प्रतिभाएं भी अभाव में निखर नहीं पा रही हैं। शाम ढलते ही जिले के नौनिहालों के सामने सबसे बड़ी समस्या उनकी पढ़ाई की होती है। कहीं बिजली नहीं है तो कहीं कोटे से केरोसिन नहीं मिलता। इस कारण छात्र पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने स्टडी सोलर योजना शुरू की है। यह योजना शुरुआती दौर में जिले के मिहींपुरवा और फखरपुर विकास खंडों में लागू की जाएगी। इस क्षेत्र के स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा एक से 12 तक के सभी छात्र-छात्राओं को सोलर लैंप मुहैया कराया जाएगा। इस सोलर लैंप की कीमत बाजार में भले ही 800 है, लेकिन छात्र-छात्राओं को महज 100 रुपये अनुदान पर मिलेगी। सरकार यह योजना आईआईटी मुंबई व राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से शुरू करने की तैयारी में है। ऐसे में रात के समय पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं के पास सोलर लैंप की सुविधा होगी, जिससे उन्हें ढिबरी और गैस का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। नजर तो सुरक्षित रहेगी ही, छात्र जब चाहेंगे, तब पढ़ाई कर सकेंगे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त राजेश कुमार ने बताया कि योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। दिसंबर से सोलर लैंप का वितरण शुरू होगा।
स्वयं सहायता समूह को भी मिलेगा रोजगार
भारत सरकार ने स्टडी सोलर लैंप योजना के तहत सिर्फ छात्र-छात्राओं को ही लाभान्वित करने का वीणा नहीं उठाया है। बल्कि गांव की महिलाओं को भी रोजगारी बनाने की तैयारी की है। उपायुक्त स्वत: रोजगार राजेश कुमार ने बताया कि योजना के तहत आईआईटी मुंबई की गुड़गांव स्थित फैक्ट्री से सोलर लैंप के उपकरण खरीदे जाएंगे। गांव की महिलाओं को इसे असेंबेल्ड करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। असेंबेल्ड करने के लिए महिलाओं को 12 रुपये व स्कूलों में वितरण के लिए 17 रुपये प्रदान किए जाएंगे। ऐसे में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी प्रति लैंप 29 रुपये का अर्जन करेंगी, जिससे उन्हें रोजगार मिलेगा।
आधार कार्ड है जरूरी
स्टडी सोलर लैंप योजना के मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अमरकांत सिंह ने बताया कि यह योजना गांव के छात्रों के लिए वरदान साबित होगी। लेकिन इसके लिए सभी छात्रों के पास आधारकार्ड आवश्यक है। बिना आधारकार्ड के 100 रुपये में सोलर लैंप नहीं मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी व ब्लॉक समन्वयकों को पत्र भेजे गए हैं, जिससे सभी छात्रों के आधार कार्ड बन सकें।
इंसैट
चित्तौरा में शुरू हुआ पांच दिवसीय प्रशिक्षण
स्वत: रोजगार उपायुक्त राजेश कुमार ने बताया कि स्टडी सोलर योजना प्रशिक्षण फिलहाल मिहींपुरवा और फखरपुर में लागू होगी। इसके बाद अन्य ब्लॉकों में लागू की जाएगी। प्रथम चरण के दो ब्लॉकों में योजना को परवान चढ़ाने के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत विकास खंड चित्तौरा के जिला प्रशिक्षण केंद्र पर की गई है। यहां पर बीएसए के साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र कुमार पांडेय व समूह से जुड़े विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।