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बिजली कटौती से सिंचाई का संकट, किसानी हुई मुश्किल

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बहराइच। जिले में हो रही बेतहासा बिजली कटौती से हाहाकार मचा हुआ है। शहरी क्षेत्र में 12 घंटे की ही आपूर्ति हो रही है। तो वहीं ग्रामीण इलाकों में छह से आठ घंटे की ही आपूर्ति मिल पा रही है। फसलों को बचाने के लिए किसानों को पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ रहा है। नलकूप भी दगा दे रहे हैं।
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बहराइच जनपद की 36 लाख आबादी को बिजली आपूर्ति करने के लिए बहराइच जनपद में 30 विद्युत उपकेंद्र स्थापित हैं। जिले में लगभग 7500 ट्रांसफार्मरों के माध्यम से आपूर्ति की जा रही है। लेकिन बीते एक सप्ताह से बिजली का रोस्टर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। शहरी क्षेत्र में बेतहासा हो रही बिजली कटौती के कारण 10 से 12 घंटे की ही आपूर्ति मिल पा रही है। जबकि ग्रामीण इलाकों में छह से आठ घंटे की ही बिजली आपूर्ति हो पा रही है। बिजली आपूर्ति का रोस्टर धवस्त होने से ग्रामीण इलाकों में खेती किसानी करना भी मुश्किल होता जा रहा है। बहराइच जनपद में एक लाख 60 हेक्टेयर में शंकर, सुगंधित बासमती और मोटे धान की बोआई की गई है। तो वहीं 80 हजार हेक्टेयर में मक्के की भी बोआई हुई है। इसी तरह ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन और गन्ने की फसल की भी बोआई की गई है। इन फसलों को बेहतर उत्पादन के लिए सिंचाई किए जाने की आवश्यकता वर्तमान में पड़ रही अधिक गर्मी के कारण जरूरी है। लेकिन बिजली कटौती किए जाने का कारण ग्रामीण इलाकों में निजी पंपिंग सेट के सहारे किसानों को सिंचाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसान परेशान हैं। लेकिन सरकार उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
बढ़ जाएगी लागत, सरकार बढ़ाए समर्थन मूल्य
विकास खंड शिवपुर के ग्राम असवा मोहम्मदपुर निवासी किसान काशी और ओरीलाल ने कहा कि धान की फसल सूखती चली जा रही है। उसे बचाने के लिए हर 15 दिन पर पानी देने की मजबूरी है। लेकिन बिजली कटौती के चलते निजी संसाधनों से खेत में पानी लगाना पड़ रहा है। ऐसे में लागत निकलनी भी मुश्किल हो जाएगी। मिहींपुरवा के ग्राम सेमरी निवासी राजेंद्र व संतोष वर्मा ने कहा कि फसल की लागत बढ़ने के कारण सरकार को धान के समर्थन मूल्य 1550 रुपये को बढ़ाते हुए लगभग 1600 के करीब करना चाहिए।
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इन फसलों को होगा ज्यादा नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि जनपद में 3800 हेक्टेयर में अरहर की बोआई हुई है। वहीं 1500 हेक्टेयर में मूंगफली और 90 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोआई की गई है। यह कैश क्राप होती हैं। ऐसे में इन फसलों को सिंचाई की अधिक जरूरत होती है। सिंचाई न होने के कारण इन फसलों को अधिक नुकसान हो सकता है।
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