केजीएमयू में मरीजों को डेंगू का भी खतरा, वार्ड से लेकर प्रशासनिक भवन तक मिले डेंगू के लार्वा, 17 नोटिस
केजीएमयू में भर्ती मरीजों को डेंगू समेत अन्य मच्छरजनित रोगों का भी खतरा है। यहां वार्ड से लेकर प्रशासनिक भवन तक सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
यह खुलासा हुआ है शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण में। हालत यह है कि वार्ड में लगे कूलरों तक की सफाई नहीं की गई है, इनमें डेंगू के लार्वा मिले हैं।
जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने केजीएमयू के विभिन्न विभागों को 17 नोटिस जारी किए हैं। यह स्थित तब है, जब सफाई के नाम पर यहां 500 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती है।
बारिश शुरू होते ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरजनित बीमारियों को रोकने के लिए अभियान चलाया गया है। इसी के तहत शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग और मलेरिया विभाग की 40 टीमें केजीएमयू पहुंचीं। टीम को यहां हर तरफ गंदगी नजर आई।
ट्रॉमा सेंटर की कैंटीन में सफाई व्यवस्था ध्वस्त थी। कंटेनर में लार्वा पाया गया, जिसे नष्ट करने के साथ ही वहां एंटी लार्वा दवाओं का छिड़काव किया गया।
इसी तरह सीटीवीएस विभाग में नालियों में जल जमाव मिला, जहां एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। लारी कार्डियोलॉजी में भी जलभराव मिला।
निष्प्रयोज्य सामान के आसपास मच्छरों के लार्वा पाए गए। शताब्दी अस्पताल और कन्वेंशन सेंटर में भी जलभराव था। बुद्धा हॉस्टल और क्वीन मैरी की स्थिति तो और भी खराब थी।
यहां नालियों में पॉलिथीन और प्लास्टिक के डिब्बे फेंके गए थे। इन सभी स्थानों पर दवाओं का छिड़काव कराया गया। सबसे खराब स्थित मानसिक रोग विभाग की मिली।
यहां तीन स्थानों पर लार्वा मिले। लार्वा को नष्ट करने के साथ ही पूरे परिसर में एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। क्वीन मैरी अस्पताल के कूलर में भी लार्वा पाए गए।
प्रशासनिक भवन की सफाई भी ध्वस्त
प्रशासनिक भवन में भी डेंगू के लार्वा पाए जाने से यहां की व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासनिक भवन में कुलपति से लेकर कुलसचिव तक बैठते हैं। इसके बाद भी यहां की साफ-सफाई में खामी पाई गई।
सफाई की निगरानी केलिए भारी भरकम टीम
केजीएमयू में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए भारी भरकम टीम बनाई गई है। पर्यावरण संरक्षण सेल में चार प्रोफेसर और दो एसोसिएट प्रोफेसर लगाए गए हैं। ये समय-समय पर विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देते हैं। इतना ही नहीं यहां सेनेटरी इंस्पेक्टर भी तैनात है। सफाई व्यवस्था के लिए करीब 500 से ज्यादा सफाई कर्मी नियुक्ति किए गए हैं। इसके बाद भी यहां सफाई व्यवस्था चौपट है।
17 स्थानों पर मिले लार्वा
एसीएमओ, प्रभारी वेक्टर जनित बीमारी नियंत्रण, डॉ. केपी त्रिपाठी ने बताया कि
केजीएमयू में 17 स्थानों पर लार्वा मिले हैं। इसमें ज्यादातर डेंगू और चिकनगुनिया के हैं। कुछ मलेरिया के भी हैं। इनसे मरीजों की जान को खतरा है। क्योंकि यहां आने वाले मरीज गंभीर होते हैं। ऐसी स्थिति में विभागवार नोटिस जारी किया गया है। साथ ही यह चेतावनी दी गई है कि दोबारा जांच में लार्वा मिले तो दंड लगाया जाएगा। यह अभियान पूरी राजधानी में चलाया जा रहा है। अस्पतालों में सफाई नहीं होने से बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए पहले अस्पताल की जांच की जा रही है।
जिम्मेदारों को अवगत कराया
सीएमएस, केजीएमयू, प्रो. एसएन शंखवार ने बताया कि टीम ने पड़ताल की है। सफाई कराई जाती है। जिन स्थानों के लिए नोटिस मिले हैं, उसके लिए संबंधित विभागों को अवगत करा दिया गया है। अभियान चलाकर कूलरों की सफाई कराई जाएगी और जलनिकासी के लिए भी सिविल इंजीनियरिंग विभाग को निर्देश दिया गया है।