राज्य सरकार शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कराई है। एक रिपोर्ट में चिह्नित किए गए 17 जिलों को दूषित पेयजल आपूर्ति से मुक्ति दिलाने के लिए 20 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसकी कुल लागत का 50-50 प्रतिशत धनराशि केंद्र और राज्य सरकार खर्च करेगी।
गौरतलब है कि कई शहरों में दूषित पेयजल आपूर्ति की लगातार शिकायतें मिल रही थी। इसके आधार पर कराए गए सर्वे की रिपोर्ट में बताया गया है कि दूषित पेयजल की वजह से प्रदेश के 17 जिलों में लोग संक्रामक व पेट की बीमारियों की चपेट में हैं और इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर जल निगम ने पेयजलापूर्ति की जांच कराई। इसमें पता चला कि ऐसी अधिकांश शिकायतें उन क्षेत्रों से संबधित हैं, जिन क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति पाइपलाइन काफी पुरानी है। कई स्थानों पर लीकेज की वजह से पेयजल प्रदूषित हो रहा है।
हालांकि इस तरह की शिकायतें प्रदेश के कई और शहरों से भी शासन को मिली हैं। लेकिन इन 17 जिले में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सबसे ज्यादा खराब पाई गई है। इसलिए जल निगम ने इन जिलों के लिए ही डीपीआर तैयार कराया है। चूंकि इस परियोजनाओं का क्रियान्वयन राष्ट्रीय शहरी पेयजल योजना के तहत कराया जाना है। इसलिए केंद्रांश केतौर पर मिलने वाली धनराशि के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। वहां से मंजूरी व धनराशि मिलने के बाद सभी 17 जिलों में पुराने व जर्जर पाइपलाइनों को बदलने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
इन शहरों के लिए बनी है योजना
फैजाबाद, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, इटावा, जौनपुर, झांसी, मुरादाबाद, आजमगढ़, मऊ, उरई, झांसी, बदायूं, फतेहपुर, गाजियाबाद व गोरखपुर।