गोंडा। एक बार फिर शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाएगा, लेकिन यह दिवस केवल हमेशा की तरह इस बार भी महज खानापूर्ति ही साबित होगा। कारण मंचों से उत्पीड़न की बात रोकने वाले जब घर पहुंचते हैं तो उनकी सोच बदल जाती है। पहले और अब में फर्क सिर्फ इतना है कि घरेलू हिंसा का दर्द घर की दहलीज लांघ कर मंच व कोर्ट कचहरी तक पहुंच गया है, लेकिन इसकी पीड़ा अभी कम नहीं हुई है। इसे रोकने के जो प्रयास हुए हैं, वह नाकाम ही साबित हो रहे हैं। घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं थानों पर जाती हैं तो उन्हें कार्रवाई का जुमला सुनाकर उनके दर्द पर मरहम लगाने का प्रयास तो होता है, मगर उससे घरेलू हिंसा की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।
फैक्ट फाइल
दहेज हत्या-33
हत्या-10
अपहरण-152
बलात्कार -48
छेडख़ानी-113
घरेलू हिंसा-42
घर की दहलीज लांघ बड़े मंचों पर उठाया घरेलू हिंसा का दर्द
नगर में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता मिश्रा जिले की ऐसी शख्सयित हैं, जिन्होंने घर के कोने में रिसती घिसती व पिसती महिलाओं के दर्द को बड़े मंचों पर साझा किया। शहर में नर्सिंग होम चला रहीं डॉ. अनीता मिश्रा अपने पति डॉ. पुन्योदय मिश्र से शादी करने के बाद जब 2003 में गोंडा में आईं तो उस दौर में बड़े मंचों पर महिला उत्पीड़न की बात उठाने की कोई हिमाकत नहीं करता था। अनीता मिश्रा ने कम हिंदी जानते हुए भी बड़े-बड़े मंचों पर महिलाओं के दर्द को उठाया और उसके लिए लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया। पहले तो लोगों को यह अजीब लगा, लेकिन बाद में उनकी टीम में सुमन पांडेय व सरिता मिश्रा जैसी तमाम महिलाएं शामिल हो गईं जो घरेलू हिंसा को रोकने के लिए तत्पर रहती हैं। व्यस्ततता के बावजूद डॉ. अनीता मिश्रा खुद बालिका शिक्षा व महिला उत्पीड़न जैसे कई मुद्दों पर जिले भर में कई कार्यक्रमों का संचालन कर रही हैं। साथ ही महिलाओं के हित पर कोई भी कार्यक्रम आयोजित होता है, उसमें उनकी भागीदारी सराहनीय मानी जाती है।
निशुल्क लड़ती हैं मुकदमा
राधाकुंड निवासी निधि त्रिपाठी ऐसी अधिवक्ता हैं जो घरेलू हिंसा उत्पीड़न की शिकार महिलाओं का मुकदमा निशुल्क लड़ती हैं। महिला कल्याण एवं उत्थान समिति चलाते हुए निधि घरेलू हिंसा को बहुत गंभीर मानती हैं। वह कहती है कि घरेलू हिंसा में काफी बढ़ोत्तरी है। उत्पीड़न के तरीके बदल गए हैं, लेकिन उत्पीड़न जस का तस है। उन्होंने बताया कि एक सरकारी कर्मचारी जिसने दहेज के लिए दूसरी शादी की और पत्नी को अब नहीं ले जा रहा है। उसके मामले की पैरवी वह निशुल्क कर रही है।
संकोच छोड़ने से रुकेगी घरेलू हिंसा
सरस्वती देवी नारी ज्ञान स्थली महाविद्यालय की संस्थापिका डॉ. कृष्णा सिन्हा कहती हैं कि लड़कियां शिक्षित होने के बाद जब तक संकोच नहीं छोड़ेंगी, तब तक घरेलू हिंसा नहीं रुक सकती है। उन्होंने आह्वान किया कि घरेलू हिंसा को रोकने के लिए लड़कियों को यह संकोच छोड़ना होगा कि कोई क्या कहता है। क्या सोचेगा। घरेलू हिंसा की शिकार अधिकांश पीड़िता को इसलिए न्याय नहीं मिल पाता है। जब तक वह संकोच का त्याग कर इंसाफ के लिए आगे नहीं बढ़ती है।