लखनऊ। शहर के अनेक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और पीएचसी डॉक्टरों के अभाव में महीनों से जूझ रहे हैं। केंद्रों से एक-एक कर डॉक्टर नौकरी छोड़कर चले गए, लेकिन उनकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। हालात यह हैं कि पैरामेडिकल स्टाफ ही दवा वितरण कर रहा है, जबकि गंभीर मरीजों को जांच और उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों के धक्के खाने पड़ रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब सीएमओ ऑफिस में डॉक्टरों और अधिकारियों की पूरी फौज बैठी है, पर खाली पड़े केंद्रों पर सेवाएं देने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
सीएमओ के अधीन 108 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और 54 पीएचसी संचालित हैं। इनमें से 16 केंद्र कई महीनों से बिना डॉक्टर संचालित हो रहे हैं। मरीजों को प्राथमिक इलाज तक नहीं मिल पा रहा। फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स के भरोसे केंद्र संचालन तो हो रहा है, लेकिन वे केवल सामान्य बीमारी की दवा देकर मरीजों को लौटाने को मजबूर हैं। थोड़ा भी गंभीर मामला होने पर मरीजों को तुरंत दूसरे अस्पताल रेफर किया जा रहा है। विभाग की ओर से खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने दावा किया है कि अगले माह से खाली पदों पर भर्ती पूरी करा दी जाएगी, ताकि मरीजों को नजदीक ही इलाज मिल सके।
सीएमओ ऑफिस में 15 डॉक्टर तैनात
सीएमओ ऑफिस में सात डिप्टी सीएमओ और सात एडिशनल सीएमओ समेत कुल 15 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें से एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ सीएचसी में सेवाएं देने के साथ एनएचएम से प्रति केस भुगतान भी ले रहे हैं। उधर, ऑफिस में बैठकर फाइलें देखने वाले 14 अधिकारी वर्षों से कोई चिकित्सकीय सेवा नहीं दे रहे, जबकि मरीज इलाज को तरस रहे हैं।
नियम का पालन नहीं, अफसर एसी कमरों तक सीमित
नियम के अनुसार, प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सकों को हफ्ते में दो दिन किसी अस्पताल में सेवाएं देना अनिवार्य है। लेकिन सीएमओ ऑफिस के अधिकांश अफसर यह नियम निभाने बाहर नहीं निकलते। परिणाम यह कि केंद्र खाली, मरीज बेहाल और अफसरों पर कोई असर नहीं।
यहां नहीं हैं डॉक्टर
एचडब्ल्यूसी-अंबरगंज, अतरौली, चौपटिया, पारा हंसखेड़ा, कल्लन खेड़ा, कटरा विजन बेग, सरोसा और ट्रांसपोर्ट नगर, सीएचसी चंदरनगर, अलीगंज, सिल्वर जुबली और टूड़ियागंज समेत अन्य केंद्र।