हरदी (बहराइच)। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों के टीकाकरण के लिए वैक्सीन आई थी। कागजों पर टीकाकरण हो गया और वैक्सीन रखी रह गईं। जनवरी में एक्सपायर होने पर शनिवार सुबह अस्पताल कर्मियों ने इन्हें फेंक दिया।
मौके पर वैक्सीन की 90 सील बंद बोतलें मिली हैं। सूचना के बाद पशु चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जांच कर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
जिले के मवेशियों को गला घोंटू, खुरपका-मुंहपका आदि संक्रामक रोगों से बचाने के लिए उनका टीकाकरण किया जाता है। इसके लिए प्रति वर्ष जिले के सभी विकासखंडों में वैक्सीन पशु चिकित्सालय को भेजी जाती है।
उसी के तहत महसी पशु चिकित्सालय पर भी टीकाकरण वैक्सीन भेजी गई थी। शनिवार सुबह अस्पताल के कर्मचारी वैक्सीन की सीलबंद बोतलों को अस्पताल के बाहर फेंकते दिखे। मौके पर 250 एमएल की 90 सील बंद बोतलें मिलीं।
वैक्सीन बोतल की एक्सपायरी डेट जनवरी 2018 थी। वैक्सीन का प्रयोग क्यों नहीं हुआ, इस सवाल पर कर्मचारी चुप्पी साध गए।
अस्पताल के चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने व्यस्त होने की बात कहकर मामले से किनारा कस लिया।
45 सौ मवेशियों का हो सकता था टीकाकरण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने बताया कि 250 एमएल की 90 बोतल में 22500 मिली लीटर एचएस वैक्सीन होती है।
इससे साढ़े चार हजार पशुओं का टीकाकरण कर उनकी जिंदगी बचायी जा सकती थी। वैक्सीन फेंकना गंभीर मामला है। जानकारी नहीं थी, अब पता चला है। जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।