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हड़ताल पर रहे जिले के प्राइवेट चिकित्सक

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हड़ताल पर रहे प्राइवेट चिकित्सक
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- नर्सिंग होम में लटके ताले, रोगियों को इलाज कराने को रहे लाले
- जिला अस्पताल में उमड़ी भीड़ तो वहां भी नहीं मिले डॉक्टर
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। जिले के प्राइवेट चिकित्सक मंगलवार को हड़ताल पर चले गए। इससे नर्सिंग होम में ताले लटक गए। अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर डॉक्टरों ने सरकार को कोसा भी। प्राइवेट चिकित्सकों की हड़ताल के चलते रोगियों की भीड़ जिला अस्पताल में उमड़ी, लेकिन वहां भी कई डॉक्टर नहीं मिलने से ज्यादातर को बैरंग लौटना पड़ा।
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आईएमए के आह्वान पर मंगलवार सुबह से ही जिले में हड़ताल का असर दिखा। 29 नर्सिंग होम में ताले लटके नजर आए। जहां पर इलाज कराने के लिए रोगियों की लाइन लगती थी, वहां पर मंगलवार को सन्नाटा पसरा नजर आया। यही नहीं पैथालॉबाजी लैब भी बंद होने से किसी प्रकार की जांच नहीं हो पाई। अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे तक नहीं हो पाए। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. केएस सिंह और सचिव डॉ. बृजेश सिंह ने कहा कि हड़ताल पूरी तरह सफल रही। मांगों को लेकर चुप नहीं बैठा जाएगा। जल्द मांगों पर विचार नहीं किया गया तो बेमियादी हड़ताल शुरू की जाएगी। नर्सिंग होम में तालाबंदी होने से इलाज कराने के लिए रोगी जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां पर भी कई डॉक्टरों के न रहने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। जिला अस्पताल में तैनात डॉ. एसपी दीक्षित, डॉ. शिव कुमार, डॉ. एसपी खन्ना, डॉ. जय सिंह की ड्यूटी तहसील दिवस के दौरान लगने वाले स्वास्थ्य शिविर में लगा दी गई थी। इससे ये डॉक्टर स्वास्थ्य शिविर में गए थे। इससे इनके कक्षों में तालाबंदी थी। इससे रोगियों को परेशानी हुई। सतांव की मालती, राही ब्लॉक क्षेत्र के मुंशीगंज की रहने वाली आरती देवी को कान में दिक्कत थी। उनका कहना था कि नर्सिंग में इलाज नहीं हुआ। यहां आई तो यहां पर भी डॉक्टर नहीं मिले। इसी तरह अन्य रोगियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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इनसेट
ये है प्राइवेट चिकित्सकों की मांगें
- केंद्रीय स्तर से चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों पर हिंसा एवं उपद्रव के खिलाफ बड़ा कानून बने
- मेडिकल छात्रों पर नेशनल एक्जिट टेस्ट के प्रस्ताव को खारिज किया जाए
- चिकित्सकों एवं प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन एकल विंडो से किया जाए
- चिकित्सकों को पर्चा लिखने का अधिकार रहे
- एलोपैथिक दवाओं का पर्चा लिखने का अधिकार सिर्फ एलोपैथिक डॉक्टर को रहे
- हेल्थ सेक्टर का बजट एक फीसदी से बढ़ाकर 2.5 फीसदी किया जाए
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