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नीट परीक्षा : हाई कोर्ट ने 20 दिसंबर तक दाखिले की इजाजत दी

Sun, 18 Nov 2018 12:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नीट परीक्षा
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नीट के जरिए प्रदेश में आयुर्वेद, यूनानी आदि (आयुष) मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को 20 दिसंबर तक दाखिला दिए जाने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि नीट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयुष की बाकी बची खाली सीटों को भरने की कार्यवाही शुरू करे।

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हाईकोर्ट ने साफ किया है कि अब आगे नीट की मेरिट और कम नहीं की जाएगी। सिर्फ वे छात्र जिन्होंने नीट परीक्षा पास की है, उन्हें ही दाखिले में वरीयता दी जाएगी। इसके बाद राज्य सरकार उचित प्रक्रिया के जरिए मेरिटोरियस छात्रों को छांटकर बाकी बची सीटों को भरेगी।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि 15 दिसंबर तक उक्त प्रक्रिया पूरी कर कॉलेजों को विद्यार्थी उपलब्ध कराए। अगर 15 दिसंबर तक राज्य सरकार प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाती है तो आयुष कॉलेजों को छूट होगी कि वे 16 दिसंबर से 20 दिसंबर तक कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में दिए गए निर्देशों के तहत विद्यार्थियों को प्रवेश दे सकेंगे। 20 दिसंबर के बाद वे कोई प्रवेश नहीं ले सकेंगे। विद्यार्थियों को इस आदेश के तहत दिए गए प्रवेश इन याचिकाओं के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेंगे। यह आदेश उन सभी आयुष कॉलेजों पर लागू होगा जिनको अब तक केंद्र सरकार से इसकी इजाजत मिली है।
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न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने यह आदेश प्रदीप कुमार चौधरी और अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर कई याचिकाओं पर एक साथ दिया। इन याचिकाओं में नीट के जरिए आयुष में दाखिले की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना था कि आयुष मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की कोई उम्र सीमा निर्धारित नहीं है, जबकि नीट के जरिए प्रवेश के लिए 25 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की गई है। इसी तरह 12वीं कक्षा में अंग्रेजी विषय होने की शर्त भी लगा दी गई है। यूनानी कॉलेजों में दाखिले के लिए उर्दू की शिक्षा जरूरी है लेकिन नीट में ऐसी कोई शर्त नहीं थी। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसके कालिया ने वकील रजत राजन सिंह के साथ कर्नाटक हाईकोर्ट का एक आदेश पेश करते हुए अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में भी ऐसा ही आदेश दिया जा सकता है।

उधर, राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि पिछले कुछ दशकों से प्रदेश में बड़ी संख्या में विद्यार्थी 12वीं की परीक्षा नकल करके पास हुए हैं। ऐसे में राज्य सरकार को उक्त सीटें भरने के लिए एक प्रारंभिक परीक्षा कराने का मौका दिया जाना चाहिए जिससे अक्षम और मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को छांटा जा सके। महाधिवक्ता के इस आग्रह पर अदालत ने उक्त आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को तय की है। साथ ही तब तक पक्षकारों को अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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