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दुष्कर्म के बाद मां बनी किशोरी को भारी पड़ी अफसरों की लापरवाही

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बहराइच। अफसरों की लापरवाही ने रेप के बाद मां बनी एक दलित किशोरी को कहीं का नहीं छोड़ा। उसने हिम्मत कर दरिंदों को सजा दिलाने की ठानी तो पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की अनदेखी आड़े आ गई।
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तमाम कोशिशों और कोर्ट के आदेश पर आरोपी की गिरफ्तारी तो हो गई लेकिन छह माह बाद भी डीएनए रिपोर्ट नहीं आई। आज तक उसे न तो कोई मुआवजा मिला न कोई अन्य मदद।

न्याय की इसी लड़ाई के दौरान उसकी सहारा मां की भी मौत हो गई। अब उसके पास अपने बेटे का इलाज कराने तक के पैसे नहीं हैं। डर यह भी है कि कहीं दरिंदे उसकी और उसके बच्चे की जान के दुश्मन न बन जाएं।
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जिले के एक गांव की निवासी 14 वर्षीय दलित किशोरी को वर्ष 2016 में गांव निवासी युवक ने डरा धमका कर छह माह तक रेप किया। किशोरी गर्भवती हो गई। तब परिवार के लोगों को इसकी जानकारी हुई।

परिवारीजनों ने दरिंदे से संपर्क साधा लेकिन, उसने किनारा कस लिया। परेशान किशोरी न्याय के लिए भटकती रही। इसी बीच उसने एक बच्चे को जन्म दिया। किशोरी ने कई बार थाने पर तहरीर दी, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ।

तब उसने न्यायालय की शरण ली। काफी मशक्कत के बाद केस दर्ज हुआ। 2017 में आरोपी को जेल भेजा गया। उसी समय डीएनए परीक्षण के लिए सैंपल भेजा गया, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई।

किशोरी को अब तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला। इस बीच उसकी मां की भी मौत हो गई। घर पर पिता हैं। जो मेहनत-मजदूरी करते हैं।

किशोरी और उसके बच्चे की तबियत आए दिन खराब रहती है। लेकिन इलाज कराने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। इस बीच संबंधित थानाध्यक्ष का कहना है कि किशोरी का मामला संज्ञान में है। उस पर निरंतर नजर रखी जा रही है।

आरोपी चंद्रबदन वर्मा को वर्ष 2017 में ही जेल भेज दिया गया है। पीड़ित को मुआवजे के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।

यह है मामला
14 वर्षीय किशोरी से वर्ष 2016 में गांव निवासी युवक ने रेप किया। छह माह की गर्भवती होने पर उसे जानकारी हुई। काफी मशक्कत के बाद 24 जून 2016 को पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की।

इसी वर्ष किशोरी मां बन गई। तब से वह अपने साथ बच्चे की परवरिश कर रही है। किशोरी का कहना है कि धन के अभाव में वह इलाज तक नहीं करा पा रही है। निरंतर विपक्षी के परिवारीजनों की ओर से धमकियां दी जा रही हैं। सुरक्षा भी मुहैया नहीं कराई गई है।

जल्द मिलेगा मुआवजा
मामले की विवेचना सीओ सिटी कर रहे हैं। डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। किशोरी को पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलना है। इसकी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। आगामी तीन-चार दिन में किशोरी को चेक के माध्यम से मुआवजा दिया जाएगा।
-रवींद्र सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण

चार्जशीट तैयार जल्द मिलेगा मुआवजा
मामला दो साल पुराना है। उस समय क्या स्थितियां थी पता नहीं। कभी-कभी मामला संदिग्ध होने पर मुआवजे की आधी राशि तत्काल नहीं मिलती। हो सकता है तत्कालीन विवेचन अधिकारी को प्रकरण संदिग्ध लगा हो। जिससे मुआवजा की आधी राशि का भुगतान न किया गया हो। लेकिन अब मामले में आरोप पत्र तैयार हो चुका है। चार्जशीट भेजी जा रही है। समाज कल्याण विभाग को भी पत्र भेजकर पीड़िता को मुआवजे की पूरी राशि भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। उसकी सुरक्षा के निर्देश एसओ को पहले से हैं।
अजय प्रताप सिंह अपर पुलिस अधीक्षक नगर
सभी हक दिलाने के लिए जिलाधिकारी जिम्मेदार
संकल्प फाउंडेशन की चेयरमैन एवं अधिवक्ता चौधरी सरिता पटेल का कहना है कि रेप पीड़िता को हक और अधिकार में अगर कोताही बरती जा रही है तो उसके लिए सीधे तौर पर जिलाधिकारी जिम्मेदार हैं। अगर पीड़िता दलित है तो अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के मुताबिक रेप की वारदात के तत्काल बाद मुआवजे की आधी राशि का भुगतान पीड़िता को किया जाना चाहिए जिससे वह अपनी न्यायिक पैरवी, स्वास्थ्य व अन्य समस्याओं का सामना कर सके।
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नियम क्या है
रेप पीड़िता को तत्काल व समय-समय पर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराई जानी चाहिए। उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था हो।
आधी सहायता राशि का तत्काल भुगतान हो जाना चाहिए।
पीड़िता और उसके परिवार की समुचित सुरक्षा हो।
पीड़िता नाबालिग है तो उसकी शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण का इंतजाम किए जाए।
नाबालिग पीड़िता के मां बनने की स्थिति में सुरक्षा, स्वास्थ्य व शिक्षा के साथ अन्य विशेष व्यवस्था का प्राविधान।
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