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प्रशासन की नाकामी बन रही मासूमों का काल

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प्रशासन की नाकामी बन रही मासूमों का काल
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सीतापुर। सहमे मासूम, सिसकती माताएं और कंधों पर मासूमों की लाशों का बोझ उठाते पिता। इंसानियत को झकझोर देने वाली ये तस्वीर आए दिन खैराबाद क्षेत्र में देखने को मिल रही है। क्षेत्र में कुछ इस तरह की बदनसीबी मासूमों का नसीब बनकर रह गई है।


नवंबर 2017 से मासूमों पर आदमखोर कुत्तों के जो हमले शुरू हुए, वे अब भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिले का सिस्टम ऐसा है कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश का भी अनुपालन होता नहीं दिख रहा है। जबकि आम आदमी की आवाज को लाठी व बल प्रयोग पर दबाया जा रहा है।
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ऐसा लग रहा है कि पूरा सिस्टम खामियां छिपाने के लिए आम लोगों के दमन में ही जुटा है। यही वजह है कि अब लोगों का भय आक्रोश में बदल रहा है। हालात ऐसे हैं कि मानवता तार-तार और इंसानियत शर्मसार हो रही है।


खैराबाद क्षेत्र के महेशपुर चिलवारा गांव में आदमखोर कुत्तों के हमले में रीना की मौत की खबर सुनते ही उसकी मां नीरजा देवी बिलख पड़ी। आंखों से आंसू छलक रहे थे, इसके बावजूद वह बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगाने को नंगे पैर ही महेशपुर गांव से हाई-वे की तरफ दौड़ी जा रही थी।


नीरजा के साथ उसकी सास बिट्टो देवी भी दौड़ी चली जा रही थी। गांव के युवाओं ने खून से लथपथ रीना देवी का शव हाथों में उठा रखा था और नारेबाजी कर रहे थे। दृश्य ऐसा कि जिसने भी देखा, उसकी आंखों से आंसू छलक आए।


आक्रोशित ग्रामीण चिल्ला रहे थे कि कब तक मासूमों की ऐसे ही जान जाती रहेगी। नीरजा बिलखते हुए कह रही थी कि, आखिर कब तक प्रशासन ऐसे ही कार्रवाई का भरोसा देकर लोगों को चुप कराएगा।


अब तक 13 बच्चों की जान जाने के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका। ग्रामीणों के सवालों पर अधिकारी भी जवाब नहीं दे पा रहे थे। वे बस उस मां को सब्र रखने और प्रदर्शन नहीं करने की सलाह दे रहे थे।


लोग मासूम रीना का शव गांव से लेकर क्या निकले, रास्ते में जिसने भी देखा, वह साथ हो लिया। हाई-वे तक पहुंचते-पहुंचते दर्जनों की भीड़ सैकड़ों की हो गई। आक्रोश ऐसा कि भीड़ ने हाई-वे पर जाम लगा दिया। अफसरों ने ग्रामीणों को समझाने-बुझाने के बजाय लाठीचार्ज कराकर उनके आक्रोश को और बढ़ा दिया।


नतीजतन ग्र्रामीण पथराव करने लगे। महिला सिपाहियों ने मृतक रीना की बुजुर्ग दादी को खींचकर जीप में डाला, बाकी जो भी दिखा, उस पर लाठी भांज दी। लोग मांगने तो इंसाफ पहुंचे थे मगर उन्हें मिलीं सिर्फ लाठियां।


प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने जो लाठीचार्ज किया, उसका खौफ पास के गांव धनीपुर में भी दिखा। हालात ये थे कि जो भी सामने आया, पुलिसकर्मियों ने उस पर लाठी भांज दी। ऐसे में क्या प्रदर्शनकारी और क्या राहगीर सभी पुलिसकर्मियों के गुस्से का शिकार हुए।
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दृश्य ऐसा कि लोगों ने खुद को घरों में कैद कर लिया। धनीपुर गांव के लोगों ने बताया कि समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर गांव में क्या हुआ। जब तक लोग समझ पाते, तब तक तमाम लोग पिट चुके थे। पुलिस का ऐसा रूप देखकर लोग सहम गए और खुद को घरों में कैद कर लिया।
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