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10 फीसदी तक बढ़ गई स्कूलों की फीस

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बहराइच। महंगाई की मार का सामना कर रहे अभिभावकों को अब बच्चों के स्कूलों की बढ़ी फीस के साथ ही उनके कॉपी-किताब के खर्च का डर सता रहा है। नवीन शिक्षण सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से होगी। स्कूलों में फीस बढ़ा दी गई है।
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बच्चों के एडमिशन के समय अभिभावकों को कॉपी-किताबों की लिस्ट थमाई जा रही है। स्टेशनरी खरीदने के लिए दुकान का नाम बताया जा रहा है। स्कूल की इन मनमानियों से अभिभावक परेशान हैं। इस बार बच्चों की पढ़ाई लगभग 10 फीसदी महंगी हो गई है।

स्कूलों में नवीन शिक्षण सत्र की शुरुआत एक अप्रैल से होगी। इसके लिए प्रवेश की प्रक्रिया पब्लिक, कान्वेंट व अन्य निजी स्कूलों में शुरू हो रही है। स्कूल पहुंचने पर अभिभावकों के सामने भारी भरकम फीस की लिस्ट रखी जा रही है। जिससे बच्चों के साथ स्कूल पहुंच रहे अभिभावकों के चेहरे पर पसीना छलक रहा है।
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बढ़ी फीस के रूप में पड़ रहे डाके के बावजूद अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर मजबूर हैं। बढ़ी फीस देना उनकी मजबूरी बन गई है। बच्चों के भविष्य के कारण वे खुलकर बोल भी नहीं पा रहे हैं। प्रवेश, एक्जाम, ट्यूशन फीस, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर और ट्रांसपोर्ट समेत विभिन्न मदों में फीस के रूप में वसूली की जा रही है।

2110 रुपये में कक्षा पांच की महीने भर की पढ़ाई
रुपईडीहा में स्थित एजी चर्च इंटर कॉलेज में कक्षा पांच की फीस पिछले वर्ष 1860 रुपये थी। इस वर्ष 2110 रुपये हो गई है। कक्षा आठ की फीस अभिभावकों को 2170 रुपये प्रतिमाह अदा करना मजबूरी है।

ट्यूशन फीस में भी 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। एजी चर्च स्कूल की प्रधानाचार्या जे रेंबल ने बताया कि फीस में मामूली बढ़ोतरी हुई है। हर साल छात्राओं को नई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। स्टाफ की सैलरी में भी हर साल बढ़ोतरी होती है।

यूपी बोर्ड से मान्यता, लेकिन स्कूल करता फीस का निर्धारण
प्रामिस लैंड इंटर कॉलेज रुपईडीहा को यूपी बोर्ड से मान्यता मिली हुई है। यहां पर प्राथमिक से इंटर तक की कक्षाओं का संचालन होता है। फीस 600 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक है।

इसके अलावा ट्यूशन फीस, कंप्यूटर फीस आदि अलग निर्धारित होती है। यूपी बोर्ड से मान्यता होने के बावजूद फीस का निर्धारण विद्यालय प्रशासन स्वयं करता है।

इस वर्ष बीते सत्र के सापेक्ष 10 फीसदी फीस में इजाफा हुआ है। प्रामिस लैंड पब्लिक स्कूल के प्रिसिंपल एएस स्टेनली ने बताया कि फीस में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की है। स्टाफ का वेतन तो बढ़ता ही है। अन्य खर्चे भी हैं। 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस में इजाफा नहीं हुआ।

सेंट नार्बट में प्राथमिक कक्षा की पढ़ाई को 23 हजार खर्च
शहर के सेंट नार्बट इंटर कॉलेज में प्राथमिक कक्षा के लिए छात्रों को फीस के रूप में लगभग 23 हजार सालाना अदा करने होंगे। यह फीस सिर्फ आठ महीने के लिए निर्धारित है।

एक्जाम फीस व अन्य फीस अलग से निर्धारित होती है। वहीं कक्षा नौ, 10 की फीस 17850 रुपये पड़ेगी। इसमें पांच हजार रुपये प्रवेश फीस अतिरिक्त है।

अगर प्रतिमाह अभिभावक फीस जमा करेगा और एक भी दिन देरी हुई तो उसे लगभग 100 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। सेंट नार्बट कॉलेज के फादर पाउल कोरिया ने बताया कि 10 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ाई जाती। सभी अत्याधुनिक शिक्षण सुविधाएं छात्रों को प्रदान की जाती हैं। अभिभावकों पर भी ध्यान रखा जाता है।

डिवाइन ग्रेस में नए और पुराने छात्रों के लिए अलग फीस
डिवाइन ग्रेस पब्लिक स्कूल में प्री प्राइमरी के पुराने छात्रों को 6500 रुपये, प्राथमिक कक्षा के लिए सात हजार, जूनियर के लिए 10 हजार और हाईस्कूल के छात्रों के लिए 11 हजार फीस निर्धारित है।

वहीं प्री प्राइमरी कक्षा के नए छात्रों, प्राथमिक व जूनियर के लिए आठ-आठ हजार फीस निर्धारित है। जबकि कक्षा नौ के लिए 11 हजार व 10 के लिए 12 हजार रुपये फीस है। वहीं ट्यूशन फीस भी 1800 से 2700 रुपये अदा करना होगा।

इसके अलावा अन्य शुल्क भी अदा करना पड़ सकता है। स्कूल के डायरेक्टर प्रदीप रायतानी ने बताया कि स्कूल में हर सुविधाएं मुहैया हैं। आरओ के पानी के अलावा अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं हैं। फीस में मामूली इजाफा हुआ है।

इन मदों में भी लिया जाता शुल्क
ट्यूशन फीस, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर के अलावा अन्य मदों में भी अभिभावकों की जेब खाली होती है। डायरी के लिए 250 से 350 रुपये, टीसी के लिए 400 से 500 रुपये, स्कूल मैगजीन के लिए 250 से 300 रुपये, आई कार्ड के लिए 50 से 100 रुपये, ग्रुपिंग फोटो के लिए 100-150 रुपये, लाइब्रेरी के लिए 100 से 200 रुपये, वार्षिक भ्रमण के लिए 500 से एक हजार रुपये के अलावा अन्य आयोजनों में भी शुल्क वसूले जाते हैं।

इधर, 22 प्रतिशत तक बढ़ गए स्टेशनरी व यूनीफॉर्म के दाम
नवीन शिक्षण सत्र में फीस के अलावा बस्ते का बोझ भी अभिभावकों को भारी लग रहा है। जैसे-तैसे बच्चे का एडमिशन कराने के बाद कॉपी-किताब और यूनीफॉर्म की खरीदारी का मामला सामने आता है।

निजी स्कूलों की स्टेशनरी के लिए दुकानें निर्धारित हैं। पिछले वर्ष और इस वर्ष की स्टेशनरी में 22 प्रतिशत महंगाई का इजाफा हुआ है। लगभग यही स्थिति यूनीफॉर्म की भी है। स्कूलों के परीक्षाफल घोषित हो चुके हैं।
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ऐसे में प्रवेश के बाद अब कॉपी-किताब की दुकानों पर खरीदारी के लिए अभिभावकों की आमद बढ़ने लगी है। लेकिन भाव पूछकर सभी के पसीने छूट रहे हैं।

स्टेशनरी की कीमत (रु.)
प्री प्राइमरी- 2300 से 3250
प्राथमिक कक्षा- 2800-4200
जूनियर कक्षा- 3700-4700
कक्षा नौ व 10- 4700 से 7000

यूनीफॉर्म के दाम (रु.)
प्री प्राइमरी- 600-700
प्राथमिक- 600-800
जूनियर - 800-940कक्षा नौ से 12- 1000-1200
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