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डायरिया व बुखार से 7 मासूमों की मौत, 200 बीमार

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बिछिया (बहराइच)। जंगल से सटे बाढ़ प्रभावित गांवों मेें डायरिया और बुखार महामारी बन गया है। तीन गांवों में उल्टी, दस्त और बुखार ने महामारी का रूप ले लिया है। प्रत्येक घर का कोई न कोई सदस्य डायरिया और बुखार की चपेट में है। इन गांवों में डायरिया और बुखार से पीड़ित छह बच्चों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। बीमार रोगी जिंदगी-मौत से संघर्ष कर रहे हैं। हालात बदहाल है। उधर जिला अस्पताल में भी एक बुखार पीड़ित की मौत हो गई है। स्वास्थ्य मकहमे के अधिकारी किनारा कसते नजर आ रहे हैं।
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तराई में बाढ़ की विभीषिका लगभग खत्म हो रही है। लेकिन अब संक्रामक रोग तराईवासियों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। सबसे खराब स्थिति मिहींपुरवा विकास खंड के कतर्नियाघाट सेंक्चुरी से सटे घाघरा के बाढ़ प्रभावित इलाकों की है। क्षेत्र का धर्मपुर रेतिया, रामपुर रेतिया, धनियाबेली और चफरिया गांव घाघरा नदी के मुहाने पर बसा हुआ है। यहां पर बीते 10 दिन से बाढ़ का कहर था। किसी तरह बाढ़ का पानी खत्म हुआ तो अब संक्रामक रोग जिंदगी छीनने लगा है। बिछिया में तीन मौतों के बाद अब धर्मपुर रेतिया, रामपुर रेतिया, चफरिया और धनियाबेली में सक्रामक रोग मासूमों की जिंदगी छीन रहा है। तीन दिन से बुखार, उल्टी, दस्त का प्रकोप है। धर्मपुर रेतिया गांव निवासी राधिका (6) पुत्री पुत्तन, रानी (5) पुत्री संदीप, द्वारिका (11) पुत्र राजेश कुमार ने रविवार रात आठ बजे से एक बजे के मध्य दम तोड़ दिया। उधर रामपुर रेतिया गांव निवासी सुनीता (12) पुत्री अर्जुन और मंगरू (6) पुत्र सिद्धार्थ तथा धनियाबेली निवासी नन्हूं (एक) पुत्र जानकी ने सोमवार भोर से दोपहर के मध्य अंतिम सांस ली। गांव निवासी सुदर्शन, संदीप, पुत्तन का कहना है कि शुक्रवार शाम से बच्चे बुखार, बुखार, उल्टी, दस्त की चपेट में थे। सूचना सुजौली स्वास्थ्य केंद्र पर दी। मिहींपुरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी अवगत कराया। लेकिन सुनवाई न होने पर जिला मुख्यालय पर संक्रामक रोग फैलने की बात बताई गई। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते छह बच्चों की मौत हुई। इन तीनों गांवों में अभी प्रत्येक परिवार का कोई न कोई बच्चा बीमार है। लगभग 200 लोग संक्रामक रोग की चपेट में हैं। लेकिन इलाज नहीं मिल सका है।
वहीं धनिया बेली गांव में राजितराम के दो बच्चे तेज बुखार के साथ उल्टी-दस्त की चपेट में हैं। वहीं रामपुर रेतिया निवासी सुदर्शन के पुत्र सिद्धू (7), सूरज (11), शिवा (6) की हालत काफी नाजुक है। इसके अलावा अन्य परिवारों में भी लोग बुखार और उल्टी दस्त की चपेट में हैं। लेकिन इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। सभी जिंदगी मौत से संघर्ष कर रहे हैं।
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उधर गिलौला के रायपुर पैंड़ा निवासी जीवन की पत्नी पूनम (30) ने सोमवार भोर में बेेटे को जन्म दिया। लेकिन दोपहर में उसे बुखार व उल्टी की शिकायत हुई। आईसीयू में भर्ती कराया गया। यहां पर डॉक्टरों ने बर्थ एक्सपीसिया की पुष्टि की। उसे लखनऊ रेफर करने की तैयारी हो रही थी। तभी मासूम ने दम तोड़ दिया।
भेज रहे हैं स्वास्थ्य टीम, करवाएंगे कैंप
जंगल से सटे धर्मपुर रेतिया, रामपुर रेतिया, चफरिया और धनियाबेली गांव में बच्चों की मौत और संक्रामक बीमारी फैलने की सूचना मिली है। संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम गांव भेजी जा रही है। टीम के चिकित्सक कैंप कर इलाज करेंगे। अगर किसी रोगी को जिला अस्पताल लाने की आवश्यकता होगी तो उसे एंबुलेंस से पहुंचाया जाएगा। बच्चों की मौत बीमारी फैलने में लापरवाही कहां पर हुई है, इसकी जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -डॉ. अरुण पांडेय मुख्य चिकित्साधिकारी
बिछिया बाजार में बीमार मिले 66 नए रोगी
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के बिछिया बाजार में संक्रामक रोग से तीन बच्चों की मौत और कई के बीमार होने की खबर सोमवार के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसका असर यह रहा कि संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष की टीम सुबह आठ बजे ही बिछिया बाजार पहुंच गई। टीम ने घर-घर दस्तक देकर रोगियों का इलाज शुरू किया। सीएमओ डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि और 66 बच्चे बुखार, उल्टी-दस्त की चपेट में मिले हैं। उन्हें दवाइयां दी गई हैं।
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