लखनऊ। खुद को आईपीएस अफसर बताकर जालसाजों ने राजाजीपुरम के सी ब्लॉक निवासी नरेंद्र मोहन तिवारी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया। ठगों ने नरेंद्र से कहा कि आपके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में किया गया है। झांसे में लेकर जालसाजों ने नरेंद्र को नौ दिन तक (28 सितंबर से छह अक्तूबर) डिजिटल अरेस्ट कर 13.80 लाख रुपये वसूल लिए। पीड़ित ने तालकटोरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
इंस्पेक्टर कुलदीप दुबे के मुताबिक नरेंद्र ने बताया कि वर्तमान में वह जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में तैनात हैं। 28 सितंबर को सुबह उनके पास अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को ट्राई का अफसर बताया और कहा कि दो अप्रैल को आपके नाम से मुंबई में एक सिम खरीदा गया है जिसका इस्तेमाल गलत काम में हुआ है। इसके बाद नरेंद्र के पास दूसरे नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को आईपीएस अफसर वरुण कुमार बताया और कहा कि आपके खिलाफ कई रिपोर्ट दर्ज हैं। ठग ने कोर्ट का फर्जी वारंट भेजा और जेल भेजने की धमकी थी।
ठग ने नरेंद्र को धमकाते हुए कहा कि छुट्टी लेकर घर जाओ नहीं तो बाद में पछताओगे। डरे-सहमे नरेंद्र छुट्टी लेकर एक अक्तूबर को राजाजीपुरम स्थित घर आ गए। ठगों ने कहा कि वह उनकी निगरानी में है इसलिए किसी से भी इस संबंध में कोई बात नहीं करेंगे। ठगों के कहने पर नरेंद्र घर से निकलकर राजाजीपुरम स्थित एक होटल में रुके। तीन अक्तूबर को जालसाजों ने एक और फर्जी आईपीएस रश्मि शुक्ला से पीड़ित की बात कराई। जालसाजों ने कहा कि आपका खातों की जांच होगी। इसके बाद उनसे अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करा ली गई। पीड़ित का कहना है कि वह इतना डर गए थे कि चार से छह अक्तूबर तक आलमनगर स्थित पहलवान होटल में ठहरे थे। रकम ट्रांसफर करने के बाद जब उन्होंने आरोपियों से संपर्क करने का प्रयास किया तो किसी ने उनका फोन नहीं उठाया। इस पर ठगी का एहसास हुआ और प्राथमिकी दर्ज कराई।