फैजाबाद । डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर के नाम पर एक लघु फिल्म बनाने जा रहा है। मकसद युवा पीढ़ी को खत्म हो रहे उप शास्त्रीय संगीत से जोड़ना है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने देश की प्रसिद्ध फिल्म निर्माता कंपनी श्यामा प्रोडक्शन से टाईअप किया है। विश्वविद्यालय व श्यामा प्रोडेक्शन के संयुक्त तत्वावधान में एक घंटे की लघु फिल्म बनाई जाएगी। यूपी पुलिस रूद्रा बनाने वाले सत्येंद्र सिंह इसके निर्माता होंगे। फिल्म के निर्माता नियंत्रक व विश्वविद्यालय के कोर्ट सदस्य ओम प्रकाश सिंह बताते हैं कि 31 मई को विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में ऑडिशन लिया जाएगा। खासतौर पर फैजाबाद के कलाकारों को तरजीह दी जाएगी। फिल्म का नाम मल्लिका-ए-गजल अख्तरी बाई होगा।
अवध विश्वविद्यालय पद्म सम्मानों से सम्मानित फैजाबाद की रहने वाली बेगम अख्तर पर विशेष कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने पहले ही अपने न्यू कैंपस में बेगम अख्तर के नाम पर संगीत अकादमी खोले जाने की घोषणा की है। इसका प्रपोजल बनकर तैयार है। भूमि पूजन के साथ जल्द ही बिल्डिंग बनाने की तैयारी चल रही है। इसी क्रम में युवा पीढ़ी को बेगम अख्तर व उपशास्त्रीय संगीत से रू-ब-रू कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके जीवन काल पर एक लघु फिल्म बनाने की निर्णय लिया है। कुलपति की संस्तुति के बाद कार्ययोजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है। फिल्म की कहानीकार शोभा गुप्ता बताती हैं कि शास्त्रीय संगीत के प्रति युवाओं में उत्साह का अभाव है। फिल्म का मकसद युवा पीढ़ी को शास्त्रीय व उपशास्त्रीय संगीत से जोड़ना है। वह बताती है कि फिल्म बेगम अख्तर के बाल्यकाल से शुरू होकर अंतकाल तक दिखाई जाएगी। फिल्म में खासतौर से उनके सामाजिक पहलुओं व उनकी ख्यातिलब्ध आवाज का जादू किस प्रकार लोगों पर था, यह दिखाया जाएगा। इसके अलावा फिल्म में उनके चैरिटी शो को विशेष रूप से उभारा जाएगा। इसके अलावा फिल्म के फिल्म के कार्यकारी निर्माता जनार्दन पांडेय व फिल्म के डिजाइन व विक्स का कार्य प्रवीण सिंह राणा करेंगे।
आठ वर्ष की उम्र में चैरिटी शो में बिखरी थी बेगम अख्तर की आभा
फिल्म की कहानीकार शोभा गुप्ता बताती हैं कि बेगम अख्तर आठ वर्ष की उम्र में अपने गुरू अता मोहम्मद खां के साथ कलकत्ता में एक चैरिटी शो में भाग लेने गई थी। यह चैरिटी शो का आयोजन उस समय नेपाल में आए भूकंप पीड़ितों के लिए किया गया था। इस चैरिटी शो में उस समय की तत्कालीन विश्व प्रसिद्ध कवयित्री सरोजनी नायड़ूू को आना था, लेकिन उनके न आने के कारण अपने गुरू के आदेश पर बेगम अख्तर ने ठुमरी, गजल व दादरा उपशास्त्रीय संगीत के गीतों को प्रस्तुत कर पूरे कलकत्ता की चहेती बन गई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने देश के पद्म सम्मानों के अलावा कई बड़ी पदवी से नवाजी गईं। बाद की सरकारों ने इनके नाम पर डाक टिकट व सिक्के भी जारी किए। शोभा गुप्ता बताती हैं कि हैदराबाद में बेगम अख्तर ने गरीबों की मदद के लिए अपना आखिरी चैरिटी शो किया।
- लखनऊ व फैजाबाद में होगी शूटिंग
मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर का जन्म स्थान मूल रूप से फैजाबाद है। यह जिले के भदरसा कस्बे में पैदा हुई थीं। इसके बाद बेगम अख्तर फैजाबाद व लखनऊ में रहीं। विश्वविद्यालय की ओर से बनने वाली फिल्म में भदरसा, शहर की हमदानी कोठी व लखनऊ बेगम अख्तर की हेवलॉक रोड पर स्थित कोठी पर शूटिंग की जाएगी।