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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की भूमि पर अतिक्रमण

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फैजाबाद। शहर में ही स्वच्छता के लिए सर्वाधिक जरूरी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पांच वर्षों में भी तैयार नहीं हो पाया है। इसका कारण प्लांट के लिए जमीन का न उपलब्ध हो पाना है। इससे सीवरेज योजना सिर्फ फाइलों में ही सिमटी है। पिछली सरकार में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए चिन्हित 10 एकड़ भूमि पर मौजूदा समय में अतिक्रमण कर लिया गया है। साथ ही आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिग स्टेशन) के लिए दो स्थानों का चयन नहीं हो पाया है। शेष दो स्थानों के लिए जल निगम के पत्राचार के बाद भी नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा है। भूमि का चयन न हो पाने से मामला अधर में लटका है।
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शहर में सीवरेज योजना पिछले पांच वर्षों में परवान नहीं चढ़ सकी है। वजह यह है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 10 एकड़ व चार अलग-अलग आईपीएस के लिए आठ एकड़ भूमि की जरूरत है। पिछली सरकार के कार्यकाल में योजना को परवान चढ़ाने के लिए प्रपोजल तैयार हुआ था। दौड़भाग के बाद सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए मांझा में 10 एकड़ भूमि प्रशासन की ओर से चिन्हित की गई थी। जब इस भूमि पर जल निगम ने बाउंड्रीवाल कराने की योजना बनाई तो कुछ लोगों ने इस पर अतिक्रमण कर लिया। वहीं, आईपीएस की भूमि चिन्हित न होने से जल निगम ठंडा पड़ गया। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद जल निगम ने एक बार फिर से आईपीएस की जमीन के लिए नगर निगम को लिखा। मौजूदा समय के नगर आयुक्त एस राज लिंगम ने बीती जुलाई में स्वत: जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर व अभियंता की टीम के साथ भूमि का अवलोकन किया। इसमें दो स्थान देवकाली मंदिर के आगे व आकाशवाणी के निकट चिन्हित हुए। जल निगम की ओर से यह भी प्रस्ताव था कि कोई पुराना सुलभ शौचालय ही मिल जाए तो उसको भूमिगत आईपीएस के रूप में डेवलप करने के साथ ऊपर शौचालय का निर्माण करा दिया जाए लेकिन आकाशवाणी के सुलभ शौचालय को छोड़कर नगर निगम अन्य स्थानों का चयन अब तक नहीं कर सका है। अभी भी दो आईपीएस लगने के लिए भूमि चिन्हित होना शेष है। भूमि के न मिलने से सीवरेज योजना अधर में लटकी हुई है। जबकि जल निगम की ओर से सर्वे करके पीआफआर (प्री फिजिबेलटी रिपोर्ट) तैयार कर लिया गया है। भूमि के चिन्हित न होने के कारण डीपीआर नहीं बन पा रहा है। डीपीआर बनने के बाद ही योजना शासन को भेजी जाएगी, तब ही स्वीकृति व बजट का एलाटमेंट हो पाएगा। अभी तक हालत यह है कि शहर के चार प्रमुख नाले सीवरेज के गंदे पानी के साथ सरयू की जल धारा में प्रवाहित हो रहे हैं।

500 करोड़ के आसपास की होगी सीवरेज योजना
सर्वे के दौरान जल निगम की ओर से जो पीएफआर बनाया गया था, इसमें योजना में खर्च होने वाली राशि का आकलन 499.16 करोड़ रुपये था। योजना में 40 एमएलडी की एसटीपी लगाने की बात कही गई थी, साथ ही 300 किमी की सीवर की ट्रंक लाइन व चार स्थानों पर आईपीएस स्थापित किए जाने थे। हालांकि यह पूरी रिपोर्ट प्राथमिक सर्वे के आधार पर थी। फाइनल इस्टीमेट बनने के बाद इसमें बदलाव भी हो सकता है।
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जल निगम की ओर से सीवरेज योजना के लिए सर्वे कर पीएफआर तैयार कर लिया गया है। लैंड की दिक्कत के चलते डीपीआर नहीं बन पा रहा है। नगर निगम को आईपीएस की भूमि के लिए कई बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक भूमि का चिन्हांकन नगर निगम की ओर से नहीं किया जा सका है। -आरबी श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट मैनेजर, जल निगम फैजाबाद


जल निगम की ओर भूमि को लेकर पत्र मिला है। दोनों विभागों के मध्य सामंजस्य स्थापित करके भूमि का चिन्हांकन जल्द कर लिया जाएगा। निर्माण इकाई होने के कारण जल निगम को अपनी आवश्यकतानुसार भूमि का निर्धारण करना है।
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- एमपी सिंह, नगर आयुक्त, अयोध्या नगर निगम
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