गोंडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को प्रदेश सरकार में शिक्षा विभाग ने साकार कर दिखाया है। अब पुस्तक ही नहीं, बल्कि उसमें छपे क्यूआर कोड से बच्चे, शिक्षक और अभिभावक भी सरलता से किताबों को पढ़ने के साथ उसे पढ़ा भी सकेंगे। इसके लिए क्यूआर कोड़ को स्मार्टफोन में वेब स्कैन करते ही पूरा विषय खुल जाएगा।
उत्तर प्रदेश में पहली बार बेसिक शिक्षा की पुस्तकों में कुछ नया देखने को मिलेगा। नए सत्र में जुलाई से छात्रों को जो पुस्तकें मिलने जा रही हैं, उसमें क्यूआर कोड डाला गया है। छात्र और अध्यापक संबंधित पाठ के ऊपर बने कोड को अपने स्मार्ट फोन से जैसे ही स्कैन करेंगे, पाठ से संबंधित जानकारी और ऑडियो सब कुछ मोबाइल के स्क्रीन पर आ जाएगा। प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पठन-पाठन को सुगम बनाने की पहल के तहत बेसिक शिक्षा विभाग ने विषयों पर बेहतर समझ बनाने के लिए उच्च क्यूआर कोड पर आधारित मोबाइल तकनीक का उपयोग करने का काम पूरा किया है।
इस सुविधा से विद्यार्थी मोबाइल फोन पर एक क्लिक से अपनी पाठ्य पुस्तकें पढ़ सकेंगे। इसके लिए छात्रों एवं शिक्षकों को क्यूआर कोड स्कैनर डाउनलोड करना होगा, जो पुस्तकों पर दर्ज क्विक रेस्पांस कोड को पढ़कर संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराएगा। परिषदीय विद्यालयों में आने वाली नई पुस्तकों में समाहित क्यूआर कोड की सहायता से शिक्षक पाठ्य पुस्तक में दी गई विषय वस्तु के अतिरिक्त टेस्ट, ऑडियो एवं वीडियो के रूप में उपलब्ध डिजिटल पाठ्य सामग्री को ऑनलाइन देख कर शिक्षण कार्य में उसका प्रभावी प्रयोग भी कर सकेंगे। इसके लिए स्मार्टफोन में वेब स्कैन करते ही पूरा विषय खुल जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि यदि एक किताब भी पूरे स्कूल में है तो उसे शिक्षक या अभिभावक क्यूआर कोड के जरिए पठन-पाठन सामग्री को पढ़ सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उसे डाउन लोड कर उसका प्रिंट भी ले सकेंगे।
कम होगा किताबों का बोझ
आदर्श शिक्षक रवि प्रताप सिंह कहते हैं कि डिजिटल इंडिया के तहत यह बड़ी पहल है। इससे बच्चों की पीठ का बोझ भी कम होगा और जब चाहें वह स्मार्ट फोन, लैपटॉप, टैब आदि के जरिए पूरा विषय व सामग्री पढ़ सकेंगे। यह प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी व निचले पायदान पर लागू सबसे बड़ी पहल है।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और बच्चों पर बस्ते का बोझ कम करने की पहल के तहत यह प्रौद्योगिकी वाकई कमाल की साबित होगी। क्यूआर कोड आज के समय की आवश्यकता बन चुकी है। इसे बेसिक के पुस्तकों में आना हमारे लिए शुभ संकेत है।
-संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए गोंडा