नवाबगंज (गोंडा)। बुधवार को 6 लोगों पर हमला करने वाला तेंदुआ गुरुवार को नजर ही नहीं आया। न ही उसकी कोई लोकेशन ही ट्रेस हुई। अलबत्ता जिस टमाटर व परवल के खेत में तेंदुए के छिपे होने की बात कही जा रही है, उसे भी वन विभाग ने पूरी तरह से खाली करा लिया है। डीएफओ टी.रंगाराजू का कहना है कि लखनऊ व कानपुर से तेंदुए को पकड़ने वाली टीम जिले में पहुंच चुकी है। तेंदुए को खोजने के लिए हाथी के जरिए कांबिंग अभियान चल रहा है। उम्मीद है कि उसे जल्दी ही पकड़ लिया जाएगा। तब तक के लिए ग्रामीणों से टमाटर व परवल के अपने खेतों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
बुधवार को नवाबगंज में वन विभाग के एक दरोगा सहित छह लोगों पर हमला करने वाला तेंदुआ गुरुवार को 24 घंटे बीत जाने के बाद भी नहीं दिखाई दिया। वन विभाग व पुलिस की दो टीमें गुरुवार को तेंदुए को पकड़ने के लिए टमाटर व परवल के खेतों के इर्द-गिर्द जमी रहीं। वहीं तेंदुए को पकड़ने के लिए जो पिंजरा बुधवार को लगाया गया था। उसमें भी तेंदुआ नहीं गया। वन विभाग की अपील पर गुरुवार को ग्रामीण बैकफुट पर आ गए और कोई भी ग्रामीण अपने परवल व टमाटर के खेतों में नहीं गया।
डीएफओ टी.रंगाराजू ने बताया कि बुधवार को इस मामले में उनकी बात पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ से हो गई थी। जिनके निर्देश पर तेंदुए को पकड़ने में एक्सपर्ट लखनऊ व कानपुर से दो टीमें जिले में भेजी गई है। जबकि इस दरम्यान तेंदुए की लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाथी की भी व्यवस्था कर ली गई है। जिसके जरिए कांबिंग अभियान चल रहा है। ग्रामीणों को अपने खेतों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। उम्मीद है कि एक्सपर्ट के साथ मिलकर वह उसे जल्दी ही पकड़ लेंगे।
ड्रोन कैमरे में भी नहीं आई तस्वीर
गुरुवार को नवाबगंज के हरिहरपुर व चाईंपुरवा के इर्द-गिर्द तेंदुए की तलाश में ड्रोन कैमरों की भी मदद ली गई। लेकिन उसमें भी उसकी कोई तस्वीर नहीं आई। उधर पिछले 48 घंटों से टमाटर व परवल के खेत में किसी तरह की तोड़ाई का काम न होने से लाखों रुपये कीमत के टमाटर व परवल भी बेकार हो गए हैं। बताया जाता है कि टमाटर व परवल के खेत की बाड़ जिस तरह से ग्रामीणों ने बना रखी है, वह करीब 5-6 फीट ऊंची है। जिसके कारण ही तेंदुए का कोई सटीक सुराग नहीं मिल रहा।
घाघरा के रास्ते कतर्निया से गोंडा पहुंचा
बहराइच के कतर्निया जंगल से घाघरा नदी के रास्ते तेंदुए के गोंडा में पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। डीएफओ टी.रंगाराजू की मानें तो नवाबगंज के हरिहरपुर गांव पहुंचा तेंदुआ घाघरा नदी के रास्ते कतर्निया से गोंडा पहुंचा है। क्योंकि ज्यादा गर्मी से बचने के लिए यह जानवर ज्यादातर पानी व उसके आसपास ही रहते हैं। तेंदुआ पानी में तैर कर ही कतर्निया से यहां आया है। क्योंकि बलरमपुर के सोहेलवा जंगल से अगर वह गोंडा आता तो बीच में किसी न किसी गांव में वह किसी न किसी घटना को अंजाम तो देता ही।