प्रदेश में 118 मदरसे फर्जी पाए गए हैं। सरकारी अनुदान के लिए यह मदरसे सिर्फ कागजों में चल रहे थे।
यह खुलासा अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय की जांच में हुआ है। फर्जी मदरसे कई साल से शिक्षकों व छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का चूना अब तक सरकार को लगा चुके हैं।
इस स्थिति को देख खुद विभागीय मंत्री आजम खां ने इस मामले की विस्तार से जांच के निर्देश दिए हैं।
फर्जीबाड़े के मामले में सबसे आगे मेरठ जिला निकला है। यहां से 34 मदरसे सिर्फ कागजों में चलते पाए गए हैं। दूसरा स्थान गोंडा जिले का है। यहां से 17 मदरसे फर्जी पाए गए।
तीसरा नंबर बलरामपुर जिले का है। यहां से भी सरकार को 13 फर्जी मदरसे मिले हैं। फर्जीबाड़े के मामले में राजधानी लखनऊ भी अछूती नहीं रही। यहां भी चार मदरसे कागजों में चलते पाए गए हैं।
इनमें कई मदरसे तो ऐसे हैं जो केंद्र सरकार की मदरसा मॉर्डेनाइजेशन स्कीम में चयनित हो चुके हैं। अल्पसंख्यक विभाग के पास जब चयनित मदरसों की सूची आई तब जाकर विभाग के कई अधिकारियों का माथा ठनका।
इसमें झांसी जैसे जिले में 100 मदरसे दिखाए गए थे। विभाग ने जब जांच शुरू की तो प्रारंभिक जांच में ही छह मदरसे फर्जी मिल गए। इसके बाद विभाग ने पूरे जिले की जांच करा दी। इसके बाद तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
मंत्री आजम खां के पास जब यह जानकारी गई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। अब सरकार इनकी विस्तृत जांच कराने जा रही है। इसमें यह भी पता लगाया जाएगा कि यह मदरसे कब से और कितना अनुदान अब तक सरकार से ले चुके हैं।
साथ ही प्रदेश में ऐसे और कितने फर्जी मदरसे चल रहे हैं। जिले के विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का भी पता लगाया जा रहा है। इसके बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी कहते हैं कि अल्पसंख्यक विभाग मामले की गहराई से जांच करा रहा है। कई जगह फर्जी मदरसा मिले हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों के वेतन व छात्रवृत्ति सरकार से लेने के लिए कई जगह कागजों पर मदरसें चलते पाए गए हैं। फर्जी मदरसों को चिन्हित करने का काम सरकार कर रही है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
क्या है मदरसा मॉर्डेनाइजेशन स्कीम
केंद्र सरकार मदरसों में मुस्लिम बच्चों को गुणवत्ता व आधुनिक शिक्षा देने के लिए अनुदान देती है। मदरसों में पारंपरिक शिक्षा के अलावा विज्ञान, गणित, भाषा व सामाजिक अध्ययन जैसे विषय पढ़ाने के लिए शिक्षकों को अनुदान दिया जाता है।
प्रत्येक मदरसे में पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक को 12 हजार, ग्रेजुएट शिक्षक को छह हजार व अंडर ग्रेजुएट शिक्षक को तीन हजार रुपये प्रति माह अनुदान मिलता है। हाईस्कूल एवं इससे ऊपर के मदरसों में कंप्यूटर लैब विकसित करने के लिए एक रुपये का अनुदान दिया जाता है।
साइंस लैब के लिए भी सरकार अनुदान देती है। साथ ही कंप्यूटर व साइंस दोनों लैब के लिए सरकार वार्षिक रखरखाव का पैसा भी देती है। बुक्स व लाइब्रेरी के नाम पर भी 50 हजार रुपये सरकार से मिलते हैं। फर्जी छात्रसंख्या दिखाकर यह छात्रवृत्ति का पैसा भी हड़प लेते हैं।
यूपी में मदरसा शिक्षा
हाईस्कूल व उससे ऊपर-2026
प्राइमरी व जूनियर-6500
सरकारी अनुदान प्राप्त-459
इनके अलावा कई मदरसे ऐसे हैं जो बगैर मदरसा बोर्ड की मान्यता के चल रहे हैं।)