फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घाघरा की लहरों में समाए 50 बीघा खेत

विज्ञापन
विज्ञापन
तटीय इलाकों में कटान से मचा हड़कंप, नुकसान की आशंका में फटाफट फसल काट रहे किसान
विज्ञापन

रेउसा/सीतापुर। घाघरा दिन पर दिन रौद्ररूप धारण करने के साथ ही कटान भी तेज कर रही है। रेउसा क्षेत्र में तो नदी कहर बरपा रही है। यहां नदी ने गुरुवार को तेजी से कटान किया है। रातभर में करीब 50 बीघा खेत कटकर नदी में समा गए हैं।

कटान देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे में हड़कंप मचा हुआ है। तमाम किसानों ने नुकसान की आशंका के चलते अपनी फसल को फटाफट काटकर समेटना शुरू कर दिया है। घाघरा नदी में इनदिनों उफान मार रहे पानी का बहाव इस कदर तेज है कि उसने तटीय इलाके में कटान तेज कर दिया है।
विज्ञापन


रेउसा क्षेत्र के कोनी, लोधपुरवा, कटैला पुरवा, लालापुरवा, परमेश्वरदीन पुरवा, नगीना पुरवा आदि गांवों के करीब नदी तेजी से कटान कर रही है। नगीना पुरवा के पास नदी बेहद तेजी से जमीन को काट रही है। गदीले की 2 बीघा, फारूख की 2 बीघा, मोहर्रम की 5 बीघा, बाबू की 3 बीघा मेंथा की फसल खेत समेत नदी में कटकर समा गई है।

कटान देखकर अन्य किसानों ने फसल को काटकर ढोना शुरू कर दिया है। बीते 24 घंटे में नदी करीब 50 बीघा खेत को निगल चुकी है। जबकि अन्य खेत कटान के मुहाने पर खड़े हुए हैं। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि नदी के उफान मारते पानी में मामूली गिरावट आई है, लेकिन खतरा टलता नजर नहीं आ रहा है।

उधर घाघरा व शारदा बैराजों से गुरुवार को 1,77,765 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में और उफान आने की संभावना जताई जा रही है।

तो क्या फ्लाप हो गया प्रयास
बीते वर्ष की ही बात है। वर्ष 2017 में नदी का कटान रोकने के लिए ठोस इंतजाम करने के दावे किए गए थे। इसको लेकर काशीपुर मल्लापुर, दुर्गा पुरवा, लोधपुरवा गांव के निकट स्टड बनाने का काम चल रहा है। इसके बावजूद नदी तेजी से कटान कर रही है। कटान देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे कहने लगे हैं कि प्रशासन के सारे दावे व प्रयास फ्लाप हो गए हैं। यही वजह है कि कटान पर लगाम नहीं लग रही है।

सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुटे बाशिंदे
तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने सुरक्षित ठिकानों की तलाश शुरू कर दी है। घाघरा नदी दिन ब दिन रौद्र रूप लेती जा रही है। इस वजह से ग्रामीणों ने यह मान लिया है कि भले ही एक या दो दिन टल जाए लेकिन नदी की बाढ़ तटीय इलाकों पर मुसीबत बनकर जरूर आएगी।

यही वजह है कि तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने मुसीबत आने से पहले ही सुरक्षित ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया है। ऐसे में फसल काटनी हो या फिर घरों का सामान ढोना हो। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खूब काम आ रही हैं। लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से अपना सामान ढोकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा रहे हैं।

सीतापुर से बहराइच तक घाघरा का कहर
गांजरी इलाके से गुजरने वाली घाघरा नदी का कहर सिर्फ सीतापुर में ही नहीं बरप रहा है। बल्कि पड़ोसी जिला बहराइच भी इससे अछूता नहीं है। दरअसल यह नदी सीतापुर व बहराइच जिले की सीमा पर बहती है। इस वजह से नदी अपने दोनों किनारों पर कहर बरपा रही है।
विज्ञापन


एक तरफ सीतापुर के गांव हैं, तो दूसरी तरफ बहराइच के भगवानपुर, रमुआपुर, पांडेयपुर, रमपुरवा आदि गांवों में बाढ़ की नौबत आ रही है। इससे साफ हो रहा है कि घाघरा का कहर सीतापुर से लेकर बहराइच तक बरपता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें