जिला अस्पताल में पैरासीटामाल तक नहीं
बाराबंकी। बारिश शुरू होते ही जगह-जगह जलभराव होने से डेंगू फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहा हो, मगर हकीकत ये है कि जिला अस्पताल में एक सप्ताह से पैरासीटामाल तक नहीं है।
डेंगू नियंत्रण करने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव करने के लिए विभाग के पास मौजूद आधे से ज्यादा मशीनें खराब पड़ी हैं। ऐसे में डेंगू से निपटने का विभाग का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। विभाग की ये लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ सकती है।
जिला अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से पैरासीटामाल टैबलेट नहीं होने से मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जा रही है। जबकि डेंगू के लक्षण मिलने पर पैरासीटामाल से ही प्रारंभिक इलाज शुरू होता है।
डेंगू का सीजन शुरू होने के दौरान दवाओं की कमी मरीजों पर भारी पड़ सकती है। जिला अस्पताल आए मरीज राम प्रताप, रेनू यादव, विनीत आदि ने बताया कि पैरासीटामाल नहीं होने से बाहर से दवाएं लिखी गई हैं।
वैक्टर बार्न विभाग भी इस ओर बेपरवाह है। एंटी लार्वा छिड़काव कराने के लिए विभाग के पास एक बड़ी फागिंग मशीन ट्रेलर के साथ ही उपलब्ध है। इसके अलावा 42 हैंड कंप्रेशर पंप हैं, जिसमें से 22 खराब पड़े हैं।
30 स्ट्रप पंप में से पांच ही दुरुस्त हैं बाकी 25 पंप खराब पड़े हैं। वहीं सात छोटी फागिंग मशीनों में से तीन मशीनें खराब हैं। जिन्हें अभी तक दुरुस्त नहीं कराया गया है।
50 मशीनों के खराब होने से एंटी लार्वा छिड़काव बाधित हो रहा है। जिला अस्पताल में बने 10 बेड के डेंगू वार्ड के स्थान पर टीबी वार्ड बना दिया गया। ऐसे में विभाग के ये खोखले दावे मरीजों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
जिला अस्पताल के फिजीशीयन डॉ. संदीप कुमार का कहना है कि, तीन दिन से अधिक बुखार रहे तो इसकी चिकित्सक से उपचार कराने के साथ ही प्लेटलेट्स की जांच कराएं।
प्लेटलेट्स कम होने पर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज शुरू कराएं, समय-समय पर जांच कराकर प्लेटलेट्स देखते रहें। आसपास पानी नहीं जमा होनेे दें, दिन में फुल आस्तीन के कपड़े व रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
तेज बुखार के साथ शरीर में लाल रंग के चक्कते पड़ना व शरीर में दर्द होना डेंगू के लक्षण हैं। डेंगू व तेज बुखार होने पर लिक्विड डायट लें।