बहराइच। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर जेठ मेले की अंतिम चौथी रविवार को है। तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। अंतिम चौथी में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ने लगा है। चित्तौरा झील के तट पर डुबकी लगाने के बाद पूजन अर्चन संग परंपरा निर्वहन का सिलसिला चल रहा है।
गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए जायरीन मजार शरीफ पर हाजिरी लगा रहे हैं। सुबह से गाजी के दरबार में जियारत का सैलाब उमड़ेगा। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर जेठ मेले की अंतिम चौथी का काफी विशेष महत्व है। तैयारियां पूरी होने का दावा प्रबंध समिति की ओर से किया जा रहा है।
गाजी की दरगाह पर जियारत के लिए लोग जत्थों में दरगाह शरीफ पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी के बावजूद जायरीन के उत्साह में कमी नहीं है। प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि नेपाल, बिहार, पूर्वांचल, दिल्ली, आजमगढ़, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, बस्ती से जायरीन जत्थों में दरगाह शरीफ पहुंच रहे हैं।
चित्तौरा झील के तट पर जायरीन डेरा डालकर परंपरा के मुताबिक डुबकी लगा रहे हैं। वहां परंपरा निर्वहन करने के बाद निशान लेकर गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए जायरीन मजार शरीफ पर हाजिरी लगा रहे हैं।
रविवार सुबह जेठ मेले की अंतिम चौथी के लिए जियारत का सिलसिला शुरू होगा। पूर्वी गेट से निशान के साथ जायरीन दरगाह शरीफ में पहुंचेंगे।