फैजाबाद। मजहब-ए-इस्लाम को मुसलमान के चरित्र से नहीं अपितु पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद और आले मुहम्मद के चरित्र एवं व्यवहार से देखना चाहिए। दुनिया मुसलमान परिवार में जन्म लेने वाले व्यक्ति के चरित्र एवं व्यवहार को इस्लाम समझने की भूल करती है।
यह बातें मौलाना सैय्यद इब्ने अब्बास बारबकवीं ने वक्फ मस्जिद हसन रजा खां में हजरत अली के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर आयोजित महफिल जश्ने मौलूदे काबा में कहीं। मस्जिद के पेश नमाज मौलाना मोहसिन एवं मस्जिद के प्रबंधक समिति के अध्यक्ष मौलाना हुज्जत के नेतृत्व में आयोजित महफिल का आगाज मौलवी हैदर अली ने तिलावते कुरान से किया। महफिल में स्थानीय शायर आफताब रजा रिजवी, नूर फैजाबादी, फरहत इरफानी, वसीम कस्टवी, शबाब जिया हैदर, मनसूब आब्दी, कुमैल, शावर, शफक, मुहम्मद सहित मेहमान शायर कैसर जौनपुरी, मुसव्विर जैदरपुरी, शबाब जलालापुरी, कायेनात हल्लौरी, इरफान आलमपुरी, महफूज हल्लौरी एवं मरजान हाश्मी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नजराने अकीदत पेश की। मुंतजिम मुतावल्ली डॉ. मिर्जा शहाब शाह व संयोजक मुशायरा मुशफिक तौकीर जैदी ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन सैय्यद शबीह मुहम्मद रिजवी ने किया। महफिल के आयोजन में सैय्यद हसन जैगम, रिजवान हसनैन सहित अन्य का सराहनीय योगदान रहा।