पालकी यात्रा के साथ संपन्न हुआ पहला कुल
देवा (बाराबंकी)। हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर पहला कुल संपन्न हुआ। जो रब है वही राम है का संदेश देने वाली धरती पर करवा चौथ के दिन पहला कुल के अवसर पर पालकी निकाली गई। दोपहर में पालकी जब निकली तो उसके आगे पीछे हजारों की तादात में बाबा के अनुयाई या वारिस, हक वारिस के साथ पालकी को छूने को बेताब थे। घंटों मशक्कत के बाद पालकी यात्रा दरगाह पर पहुंच कर समाप्त हुई।
उधर शाम को देवा महोत्सव कमेटी द्वारा डीएम की अगुवाई में चादर समर्पण परंपरा पूरी अकीदत के साथ मनाई गई। चादर समर्पण के दौरान भारी संख्या में जायरीन मौजूद रहे। रविवार को पालकी का जुलूस शकील शाह परिसर से शुरू हुआ। जो हाजी वारिस अली शाह की मजार से पालकी पूरे शानो शौकत के साथ निकली। तो उसके आगे घुड़सवार पुलिस के जवान चल रहे थे।
पीछे से सिर पर पीली चादर से सिर ढके हजारों जायरीन पालकी को कंधा देने के लिए बेताब थे। पालकी यात्रा कौमी एकता द्वार से निकल कर सैयद कुर्बान अली की मजार पर पहुंची। इस बीच पालकी पर जगह-जगह फूल और इत्र की वर्षा की जा रही थी।
पालकी यात्रा दादा मियां के आस्ताने पर पालकी वापस पहुंची। जहां हाजी सैय्यद उसमान गनी शाह ने दादा मियां के मजार पर चादर पेश की। उसके बाद महफिले समां का आयोजन किया गया। कुरान शरीफ की सूरतों की तिलावत के बाद शिजरा व सलाम पढ़ा गया। इसी के साथ परंपरा अनुसार दादामियां का कुल शरीफ संपन्न हुआ।
देवा मेला प्रदर्शनी समिति द्वारा हाजी वारिस अली शाह की मजार पर चादर समर्पण किया गया। समिति के अध्यक्ष व जिलाधिकारी की अगुवाई में कमेटी के सभी सदस्य और आला अधिकारियों के साथ चादर लेकर जुलूस गाजे बाजे के साथ निकला।
आगे आगे हाजी वारिस की शान में कव्वाली हो रही थी तो जायरीन या वारिस के जयकारे लगाकर साथ चल दिए। कौमी एकता द्वार पर पहुंचते पहुंचते भीड़ का रेला पहुंच गया था। घंटों मशक्कत के बाद चादर समर्पण कर देश के अमन चैन की दुआ मांगी गई। मजार पर चादर समर्पण करने पहुंचे सभी लोगों का इस्तकबाल किया गया। इस मौके पर एसपी अनिल कुमार सिंह, एडीएम अनिल सिंह आदि लोगों ने सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर चादर चढ़कर दुआ मांगी।