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अभियान बेअसर, अब भी जान ले रहे आदमखोर कुते

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खूंखार कुत्तों के आतंक के आगे फेल नजर आ रहा प्रशासन
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सीतापुर। इसे हद दर्जे की लापरवाही कहें, तानाशाही कहें या फिर जिम्मेदारों की रस्म अदायगी। जो दावे तो बड़े-बड़े किए जा रहे हैं, लेकिन उस पर अमल होता नजर नहीं आ रहा है। खैराबाद क्षेत्र में आदमखोर कुत्तों ने इस कदर कहर बरपा रखा है कि एक के बाद एक लगातार कई मासूम बच्चे उनका निवाला बनते जा रहे हैं और प्रशासन का सारा सिस्टम फेल नजर आ रहा है।

हर मौत के बाद जो जिम्मेदार अधिकारी इन आदमखोरों को जल्द काबू कर लेने के दावे कर रहे थे। मगर अब लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद मुुंह छिपाते और जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं। घटनाओं का ग्राफ ऐसा बढ़ रहा है, लोगों के कलेजे कांपने लगे हैं। एक-एक कर अब तक 11 मौतें हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन का सारा इंतजाम सिर्फ और सिर्फ कोरे दावों पर ही टिका हुआ है।
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कल तक जो कुत्ते एक या दो बच्चों पर हमला कर रहे थे, वे अब दो से चार लोगों को अपना निवाला बनाने पर उतारू हैं। गौर करने की बात यह है कि खैराबाद में आदमखोर कुत्तों ने पहला हमला नवंबर-2017 में मलुही सरैंया गांव में किया था। यहां पर महेश की पुत्री हिमांशी को आदमखोर कुत्तों ने बुरी तरह से जख्मी कर दिया था।

जिसके चलते हिमांशी की मौत हो गई थी। उस घटना को प्रशासन ने गंभीरता से लिया ही नहीं। नतीजा एक के बाद एक करके कुत्तों ने मासूमों को निवाला बनाना शुरू कर दिया। मार्च माह में जब मासूमों की मौत का आंकड़ा छह पार कर गया, तब कहीं जाकर प्रशासन हरकत में आया, बावजूद इसके ठोस इंतजाम तब भी नहीं किए गए।

अधिक हो हल्ला मचने पर 21 मार्च को लखनऊ से एक्सपर्ट डॉ. विकास को बुलाया गया। उन्होंने उस दौरान तीन कुत्तों को ट्रैंक्यूलाइज कर दबोच लिया था। उस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने मान लिया कि अब कुत्ते हमला नहीं करेंगे और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नतीजा उस ग्रुप के अन्य आदमखोर कुत्तों ने हमले जारी रखे।

इधर एक मई को फिर आदमखोर कुत्तों ने एक ही दिन खैराबाद के ग्राम टिकरिया, गुरपलिया और कोलिया पहाड़पुर में हमला किया। टिकरिया निवासी कैलाश की पुत्री सावनी चौधरी (2), गुरपलिया निवासी आबिद के पुत्र खालिद (13) व खैराबाद के ही ग्राम कोन्या पहाड़पुर में इमलिया सुल्तानपुर के निवासी रघुनंदन की पुत्री कोमल (11) को कुत्तों ने मार डाला तब मथुरा से टीम बुलाई गई।

3 मई को मथुरा की टीम व अन्य टीमों ने संयुक्त रूप से बड़ा ऑपरेशन चलाया, करीब 24 कुत्तों को दबोचा गया। उस दौरान प्रशासन आश्वस्त हो गया कि अब तो कुत्ते पकड़ लिए गए, लेकिन 4 मई को ही कुत्तों के झुंड ने खैराबाद के मासूमपुर, चौबेपुर, पीरपुर व बुढ़ानापुर में हमला बोला।

इन हमलों में दो बच्चों की जान चली गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। 4 मई को हुई घटना ने प्रशासन के सारे प्रयासों की पोल पट्टी खोलकर रख दी है।

22 किमी के दायरे में फैला आतंक, सात लाख की आबादी दहशत में
आदमखोर कुत्तों के आतंक का दायरा दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है, कल तक इन कुत्तों के हमले जहां खैराबाद क्षेत्र में महज 6 से 7 किलोमीटर के दायरे में था। वह दायरा अब बढ़कर 22 किलोमीटर से भी अधिक हो गया है। इन कुत्तों के हमले से शहर कोतवाली, तालगांव कोतवाली, खैराबाद थाना, मछरेहटा थाना, मानपुर थाना क्षेत्र की करीब सात लाख की आबादी प्रभावित है।

लोग दहशत में हैं, जो अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। यहां बता दें कि 1 मई को खैराबाद में कुत्तों के हमले का स्थान व 4 मई को कुत्तों के हमले के स्थान में करीब 22 किलोमीटर की दूरी है। इस वजह से लोगों में भय बढ़ता ही जा रहा है।

डेढ़ घंटे में सात किलोमीटर की दूरी तय की
आदमखोर कुत्तों के आतंक का यह हाल है कि शुक्रवार को इन कुत्तों ने महज डेढ़ घंटे के भीतर ही सात किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान आदमखोरों ने चार जगहों पर हमले किए। जिसमें दो बच्चों की जान ले ली और एक छात्रा समेत दो लोगों को घायल कर दिया। यहां बता दें कि मासूमपुर, चौबेपुर, पीरपुर व बुढ़ानापुर की दूरी सात किलोमीटर की है। इतनी दूरी इन कुत्तों ने डेढ़ घंटे में ही तय कर ली।

...और रिंकी ने सूझबूझ से बचाई जान
सीतापुर। आदमखोर कुत्तों का सामना करने वाली रिंकी ने आज सूझबूझ व बेहद चतुराई से अपनी जान बचाई है। हालांकि रिंकी घटना के बाद से बेहद डरी सहमी है। वह घटना का जिक्र करते करते कांप जाती है। क्षेत्र के लोग रिंकी की चतुराई व बहादुरी के चर्चे कर रहे हैं।

खैराबाद के चौबेपुर निवासी तेजपाल की पुत्री रिंकी ने बताया कि वह आर्यकन्या इंटर कालेज में पढ़ती है। कॉलेज इंटर तक है। इसी वर्ष उसने इंटर पास किया है, इस वजह से बीए में एडमीशन के लिए वह घर से निकली थी। रिंकी कहती है कि वह जैसे ही गांव के बाहर पहुंची, उसके सामने तीन कुत्ते आ गए।

इससे पहले कि रिंकी कुछ समझ पाती, उसके चारों तरफ करीब सात कुत्ते पहुंच गए। रिंकी बताती है कि उसने आदमखोर कुत्तों के बारे में अखबारों में पढ़ रखा था, इस वजह से जब कुत्तों ने उसे घेरा, तब वह समझ गई, कि ये वहीं आदमखोर कुत्ते हैं, जिन्होंने आतंक मचा रखा है।

रिंकी बताती है कि वह डरी जरूर, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, इससे पहले कि कुत्ते हमला करते, रिंकी ने शोर मचाना शुरू कर दिया। हालांकि इसी बीच कुत्तों ने रिंकी पर हमला बोल दिया। रिंकी इस हमले से निपटने के लिए तैयार हो चुकी थी, सो उसने झट से अपना दुपट्टा उतारा और कुत्तों के आगे उछालने लगी, इससे झुंड में शामिल कुछ कुत्ते घबराकर पीछे हट गए।

इसी बीच गांव के लोग मौके पर पहुंच गए, जिन्होंने कुत्तों को खदेड़ा। गांव के बाशिंदों का भी कहना था कि अगर रिंकी सूझबूझ से काम न लेती तो लोग जान ही न पाते और कुत्ते उसे नोच डालते। हालांकि रिंकी कुत्तों के हमलों से जख्मी हुई है, जिला अस्पताल में उसका इलाज कराया गया है।

चाय पीकर घर से निकली थी गीता
खैराबाद के ग्राम मासूमपुर में कुत्तों ने सुशील की पुत्री गीता (7) को अपना निवाला बना चुके थे। घटना के बाद गीता की मां गुड़िया देवी का रो रोकर बुरा हाल था। मां बार-बार कह रही थी, हाय अभी तो गीता ने चाय पी थी, चाय पीने के बाद न जाने कब वह खेतों की तरफ चली गई। जहां कुत्तों ने उसे अपना निवाला बना डाला। इस घटना से सुशील का पूरा परिवार दुखी था।

प्रशासन के सिस्टम पर सवाल
शुक्रवार को हुई वारदात ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। क्षेत्र के बाशिंदे प्रशासन के सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं लोगों का कहना था कि इतनी बड़ी-बड़ी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन के आला अधिकारी इंतजाम करना तो दूर, उनका हाल लेने तक नहीं पहुंच रहे हैं।

मासूमपुर, महमूदपुर, अकबरपुर, चौबेपुर, पीरपुर, बुढ़ानापुर, मलुही सरैंया आदि दर्जनों गांवों के लोगों का बस एक ही कहना था, कि क्या मासूमों की जान इस कदर सस्ती हो गई है कि आदमखोर कुत्तों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

उजड़ गई नरेंद्र और निशां की दुनिया
शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बुढ़ानापुर निवासी नरेंद्र को आदमखोर कुत्तों ने झकझोर कर रख दिया है। नरेंद्र उर्फ राजेंद्र ने बताया कि वह मूलरूप से तालगांव के ग्राम हरिरायपुर गांव का निवासी है। बुढ़ानापुर गांव में उसकी ससुराल है। बच्चों की परवरिश बेहतर हो, इसको लेकर वह अपनी पत्नी निशा देवी के साथ उसके मायके में ही बस गया।

नरेंद्र व निशां के परिवार में पुत्र वीरेंद्र 10, विशाल (6) व पुत्री पारुल है। बताते हैं कि विशाल पैरों से दिव्यांग हैं। इस वजह से परिवार को वीरेंद्र से ही उम्मीदें थीं। लेकिन शुक्रवार को आदमखोर कुत्तों ने उसे निवाला बना डाला।

शुक्रवार को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया अभियान
खैराबाद में एक के बाद एक करके जहां 11 मासूमों की जान चली गई। वहीं प्रशासन का हाल यह है कि शुक्रवार को कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान ही नहीं चलाया गया। इसकी जानकारी भी लोगों को तब हो सकी, जब आदमखोर कुत्तों ने चार स्थानों पर हमला बोल दिया।
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ऐसे में जब जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा था। सिटी मजिस्ट्रेट हर्ष देव पांडेय ने बताया कि अभियान तो चलाया गया था, लेकिन एक भी कुत्ता हाथ नहीं आया। सिटी मजिस्ट्रेट का यह बयान लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
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