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आरएसएस का निकला भव्य पथ संचलन

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फैजाबाद। आरएसएस के अयोध्या महानगर के स्वयंसेवकों ने रविवार को धूमधाम से शहर में संघ घोस के साथ पूर्ण गणवेश में पथ संचलन किया। इस दौरान शहर को भगवा रंग में सजाया गया था। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम रहे। पथ संचलन की शुरुआत अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन ने की। पथ संचलन गुलाबबाड़ी मैदान से रीडगंज, गुदड़ी बाजार, चौक, रिकाबगंज, कसाबबाड़ा, फतेहगंज, सुभाषनगर होते हुए वापस गुलाबबाड़ी पहुंचा। इस दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख के ध्वज प्रणाम के साथ हुआ। इस दौरान पूर्ण गणवेश में मौजूद अयोध्या महानगर के सैकड़ों स्वयंसेवकों ने सामूहिक स्वर में गीत गान किया। इसके बाद पथ संचलन का आदेश मिलने पर स्वयंसेवक वंदे मातरम, भारत माता की जय का उद्घोष करते हुए निकले। लौटने पर प्रार्थना व ध्वज प्रणाम के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया। रिकाबगंज में भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष दिनेश जायसवाल, नगर उपाध्यक्ष राजीव शुक्ल, अजय ओझा व सिविल लाइन पर अमल गुप्त व उनके साथियों, सुभाषनगर में हिंदू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी पवन मिश्रा व हिंदू महासंघ के जिला संयोजक संजय सिंह ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। पथ संचलन में प्रांत कार्यवाह डॉ. अनिल मिश्रा, महानगर संघ चालक डॉ. विक्रमा पांडेय, विभाग प्रचारक अमरनाथ, महानगर प्रचारक अंबेश, विभाग कार्यवाह राम कुमार राय, सांसद लल्लू सिंह, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, पूर्व मंत्री अनिल तिवारी, जिला प्रचार प्रमुख पीयूष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।


हम विपरीत धारा में चलने वाले लोग : स्वांत रंजन
फैजाबाद। जब हम एकत्र होते हैं तो अपने ध्येय और लक्ष्य का स्मरण करते हैं। इतनी धूप में हम यहां बैठे हैं। हम विपरीत धारा में चलने वाले लोग हैं। यह बातें पथ संचलन की शुरूआत करते हुए शहर के गुलाबबाड़ी मैदान में जुटे अयोध्या महानगर के स्वयंसेवकों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहीं।
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स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए स्वांत रंजन ने कहा कि समाज पर कोई आपत्ति आती है तो सबसे पहले संघ के स्वयंसेवक पहुंचते हैं, यह जगजाहिर है। केदारनाथ त्रासदी में सड़कें बह गई थीं, आने जाने वाले रास्ते ठीक नहीं थे। संघ के स्वयंसेवकों ने पैदल पगडंडी पर चलकर उनको वहां से निकाला। हम समाज के लिए संगठन का काम करते हैं। जो मन, वचन और कर्म से जैसा सोचता है, जैसा बोलता है वैसा करता है, यही साधना है। कहा कि कई बाधाएं दिखाई देती हैं, कुछ देश के भीतर हैं व कुछ देश के बाहर। इससे सावधान रहने की आवश्यकता है। हम पथ संचलन के माध्यम से समाज को संगठित होने का संदेश देने वाले हैं। राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने का कार्य भी हम कर रहे हैं।
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