बहराइच। पिछली बसपा सरकार ने वर्ष 2010 में बहराइच में सुपर मार्केट योजना के तहत लगभग 110 दुकानों का निर्माण कराया था। निर्माण की लागत अधिक होने के चलते बसपा सरकार में तीन बार हुई नीलामी के बाद भी एक भी दुकानों का आवंटन कराने को व्यापारी आगे नहीं आए। इसके बाद सरकार बदल गई। अखिलेश सरकार ने भी सरकारी खजाने को भरने के लिए सात बार नीलामी की प्रक्रिया शुरू कराई। इसमें करीब 35 दुकानों का आवंटन हो सका। बीच में ही सरकार बदलने से नीलामी फिर से फाइलों में बंद हो गई। अब योगी सरकार बनने के बाद फिर से दो बार नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद करीब पांच दुकानों का आवंटन हो सका।
पिछली बसपा सरकार के समय में किसानों को उपज बेचने के लिए समुचित स्थान मुहैया कराने के उद्देश्य से मंडी परिषद की ओर से सुपर मार्केट के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। बहराइच के गल्ला मंडी परिसर के बाहर लगभग 110 दुकानों का निर्माण सुपर मार्केट योजना के तहत हुआ था। योजना के तहत किनारे की 13 दुकानों की लागत 6.45 लाख रुपये प्रति दुकान आयी थी। वहीं अन्य 97 दुकानों की लागत 5.86 लाख रुपये निर्धारित हुई थी। दुकानों का निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 2011 में बसपा सरकार में 26 मई को पहली नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद बसपा सरकार में दो और नीलामी प्रक्रिया अपनायी गईं, लेकिन एक भी दुकान लेने को व्यापारी आगे नहीं आए। वर्ष 2012 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में बनी सपा की सरकार में भी लगभग सात बार नीलामी की प्रक्रियाएं कराई थीं। इसके बाद महज 39 दुकानाें का ही आवंटन हो सका। अब योगी सरकार भी बसपा सरकार के समय में बनी दुकानों के आवंटन की कार्रवाई कर रही है। इसके बाद भी अभी तक महज पांच दुकानें ही लेने को व्यापारी आगे आए हैं।
आवंटन का यह नियम
सुपर मार्केट योजना के तहत बनाई गई दुकानों से व्यवसाय करने के लिए मंडी समिति में व्यापारी का पंजीकरण होना अनिवार्य है। पंजीकृत व्यापारी ही नीलामी की प्रक्रिया में भाग ले सकता है।
दाम घटाने पर होगा विचार
सुपर मार्केट योजना की दुकानों का आवंटन मूल्य काफी अधिक है। इसी कारण से व्यापारी दुकान लेने से कतरा रहे हैं। जल्द ही नीलामी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बची हुई दुकानाें का आवंटन मूल्य कम किए जाने पर विचार किया जाएगा। - सुभाष सिंह, सचिव मंडी समिति