पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह।
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उत्तर प्रदेश में ‘अपनी धरोहर-अपनी पहचान’ के अंतर्गत विभिन्न स्मारकों और पुरास्थलों सहेजने का काम चल रहा है। इसके लिए एडॉप्ट-ए-हेरिटेज नीति के तहत निजी क्षेत्र के सार्वजनिक उद्यम, पीएसयूए एनजीओ या व्यक्ति को स्मारक मित्र बनाया जा सकता है। स्मारक मित्र द्वारा सार्वजनिक जन सुविधाएं, पहुंच मार्ग, विभिन्न स्थलों की स्वच्छता व सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था का कार्य कराया जाएगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पहले चरण में 11 स्मारकों व पुरास्थलों का चयन किया गया है। इसके अंतर्गत लखनऊ में छतर मंजिल व फरहत बख्श कोठी, कोठी गुलिस्ताने इरम, दर्शन विलास कोठी, हुलासखेड़ा उत्खनन स्थल आदि चुने गए हैं।
इसके अलावा कुसुमवन सरोवर, गोवर्धन की छतरियां व रसखान की समाधि, मथुरा में और गुरुधाम मंदिर, कर्दमेश्वर महादेव मंदिर, वाराणसी के अलावा चुनार का किला, मिर्जापुर व प्राचीन दुर्ग बरुआसागर झांसी को चुना गया है।
बीरबल के महल का होगा जीर्णोद्धार
जालौन के कालपी स्थित बीरबल के महल का जीर्णोद्धार किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पुरातत्व विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह भवन गजशाला स्थापत्य कला का दुर्लभ नमूना है।