यूपी कोऑपरेटिव बैंक के सभापति फतेह बहादुर सिंह ने अंशधारकों को 2012-13 के लिए नौ फीसदी लाभांश देने की घोषणा की। कहा कि बैंक लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
बदलते बैंकिंग परिवेश में रिजर्व बैंक और नाबार्ड के दिशा निर्देशों के अनुरूप सभी सहकारी बैंकों को सीबीएस प्रणाली से जोड़ा गया है। आरटीजीएस और एनईएफटी के साथ ही एटीएम सुविधा भी उपलब्ध है।
11 बैंकों को रिजर्व बैंक का लाइसेंस शीघ्र
प्रमुख सचिव सहकारिता देवाशीष पंडा ने बताया कि नौ जिला सहकारी बैंकों को शीघ्र पुनर्जीवित किया जाएगा। 11 बैंकों को रिजर्व बैंक का लाइसेंस दिलाने के प्रयास हो रहे हैं।
उर्वरक व्यवसाय में सहकारी संस्थाओं का योगदान 35 से बढ़कर 49 प्रतिशत हो गया है। 2500 निष्क्रिय प्राथमिक समितियों को सक्रिय किया गया है। उन्हें पांच-पांच लाख की मदद देकर खाद-बीज का वितरण कराया जा रहा है।
इफको ने लूटे 450 करोड़
यूपी कोआपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष छोटे सिंह यादव ने इफको पर प्रदेश में महंगा डीएपी बेचने का आरोप लगाया। कहा कि इफको ने एक साल में प्रदेश में कुल 99100 टन डीएपी बेची।
अन्य राज्यों में 1050 रुपये में डीएपी का बैग दिया गया लेकिन यूपी में 1130 रुपये में। इफको ने इस तरह किसानों से करीब 450 करोड़ रुपये लूट लिए। यदि यह पैसा सहकारी बैंकों को दे दिया जाता तो 16 बैंक पुनर्जीवित हो जाते।
इफको के पक्ष में खड़े हुए चंद्रपाल
इफको के निदेशक और वरिष्ठ समाजवादी नेता चंद्रपाल सिंह यादव ने मंच से ही छोटे सिंह यादव के तर्कों को गलत बताया। उन्होंने कहा, इफको ने प्रदेश में बिहार और मध्य प्रदेश से सस्ता डीएपी दिया है।
केंद्र सरकार ने 550 डालर प्रति टन के हिसाब से डीएपी आयात किया था। कम मूल्य पर बेचने पर अब केंद्र सरकार प्रतिपूर्ति नहीं करती है।