रिसियामोड़ (बहराइच)। एक किसान ने खेती कार्य के लिए 2014 में बैंक से कर्ज लिया था। किसानों का कर्जा माफ हुआ तो उसे लगा कि उसका ऋण भी माफ हो जाएगा। लेकिन ऋण माफ न होने से किसान बैंक के चक्कर लगाने लगा।
इसी चिंता में बुधवार रात उसकी तबियत बिगड़ गई। परिवारीजन उसे अस्पताल ले गए। वहां इलाज शुरू होने के कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया।
रिसिया थाना अंतर्गत इटकौरी गांव निवासी ओंकारनाथ तिवारी (50) खेती-किसानी कर परिवार का भरण पोषण करते थे। खेती कार्य के लिए उन्होंने 2014 में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक सिसई सलोन की शाखा से दो लाख 73 हजार का कर्जा लिया।
जैसे-तैसे 74 हजार रुपये अदा किया था। इसी बीच योगी सरकार ने कर्ज माफी की घोषणा होने पर उन्हें लगा कि कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी। 1.94 लाख रुपये कर्ज ओंकार को अदा करना था। लेकिन कर्ज माफी की सूची जारी हुई तो उनका नाम उसमें नहीं था।
पुत्र प्रदीप ने बताया कि कर्ज माफी के लिए पिता ओंकार तीन महीने से बैंक के चक्कर लगा रहे थे। बैंक में उचित जवाब नहीं मिल रहा था। अनावश्यक दौड़ाया जा रहा था। इसके कारण वह बीते पखवारे भर से काफी चिंतित रहने लगे। बुधवार शाम को अलाव तापते समय बोले कर्ज से कैसे छुटकारा मिलेगा, इसके बाद बेहोश हो गए।
ग्रामीणों की सहायता से प्रदीप ने पिता को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां इलाज शुरू होने के कुछ देर बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने हृदयगति रुकने से ओंकार के मौत की पुष्टि की। शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया।
पत्नी धनराजा की हालत अर्द्ध विक्षिप्तों जैसी हो गई है। ग्राम प्रधान मतालिब खां ने भी कहा कि कर्ज को लेकर ओंकार काफी परेशान रहते थे।
कर्जमाफी के नियमों से बाहर था किसान
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक ए रायनी ने कहा कि ओंकार ने कर्जा लिया जरूर था, लेकिन कर्जमाफी के जो नियम थे, उसके दायरे में ओंकार नहीं आ रहे थे। 74 हजार रुपये भी वह जमा कर चुके थे। इस मामले में उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है।