लखनऊ। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नींद से जुड़ी बीमारियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि भारत में लगभग 10 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 40% पुरुष, 20% महिलाएं और 10% बच्चे खर्राटे लेते हैं, जिसके कारण उन्हें दिन में अत्यधिक नींद और थकान महसूस होती है।
डॉ. सूर्यकांत ने चेतावनी दी कि अधूरी नींद केवल थकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और पक्षाघात जैसे खतरें बढ़ाती है। वाहन चलाते समय खर्राटों और नींद की झपकी के कारण सड़क हादसे भी हो रहे हैं।
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि केजीएमयू में देश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन (फेफड़ों का पुनर्वास) प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। लोहिया संस्थान के डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि इडियोपैथिक फुफ्फुसीय फाइब्रोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीमारी में बिना किसी स्पष्ट कारण के फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं, जिससे सांस फूलने लगती है और कार्यक्षमता कम हो जाती है।
कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने प्रभावी रोग नियंत्रण के लिए डॉक्टरों के निरंतर प्रशिक्षण और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। डॉ. संतोष कुमार और डॉ. राजीव गर्ग ने सुझाव दिया कि धूल, धुएं और प्रदूषण से बचें, हमेशा मास्क पहनें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान का पूरी तरह त्याग करें।