लखनऊ। शादी का झांसा देकर नाबालिग को भगा ले जाने व दुष्कर्म करने के आरोपी सरफराज को दोषी ठहराते हुए पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार उपाध्याय ने दस वर्ष की कैद और 27 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। रकम पीड़िता को देने का आदेश दिया है।
आरोपी सुएब, शाहनवाज और आकिल को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि सरफराज ने एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसा घृणित अपराध किया है। यह सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी अति घृणित अपराध है।
सरकारी वकील ने बताया कि पीड़िता के पिता ने मलिहाबाद थाने में 14 अक्टूबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक 13 अक्तूबर की सुबह जब सोकर उठे तो 15 वर्षीय बेटी नहीं थी। घर में रखे साढ़े सात लाख रुपये भी गायब थे। रिपोर्ट में वादी ने बताया कि सरफराज व शाहनवाज का उसके घर आना-जाना था। दोनों की हरकतें उन्हें नागवार लगीं तो घर आने से रोक दिया। वादी को यकीन था कि सरफराज उनकी बेटी को शादी का झांसा देकर भगा ले गया है।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना की और नाबालिग को घर भेजा। आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। सरकारी वकील ने बताया कि नाबालिग ने कोर्ट में बयान दिया कि सरफराज उसे शादी का झांसा देकर कानपुर के होटल में ले गया और तीन दिन तक दुष्कर्म किया।