लखनऊ। दहेज में गाड़ी न मिलने पर पत्नी और चार साल की बच्ची की जलाकर हत्या करने के आरोपी पति अजय प्रकाश सिंह को बरी करते हुए एडीजे मधु डोगरा ने आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोपों में दोषी ठहराकर दस वर्ष की सजा सुनाई है। अजय प्रकाश को 55 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी रही सास राजलक्ष्मी और देवर संजय प्रकाश सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
कोर्ट ने मामले में दोषी ठहराए गए अजय प्रकाश को दहेज हत्या और हत्या के मामले में दोषी नहीं ठहराया। कोर्ट के इस आदेश से नाराज वादी के वकील ने कोर्ट में जमकर हंगामा किया। अधिवक्ता ने न्यायाधीश, सरकारी वकील, कोर्ट के स्टाफ को खरीखोटी सुनाई और अभद्रता भी की।
कोर्ट ने आरोपियों को हत्या और दहेज हत्या के आरोपों से बरी करते हुए कहा कि मृतका तृप्ति और उसकी पुत्री आयुषी की मौत जलने के तुरंत बाद हो गई थी। दोनों को मारकर जानबूझकर जलाने का कोई साक्ष्य नहीं है। अजय प्रकाश ने घटना की सूचना मिलने के बाद भी पत्नी और बेटी को बचाने के लिए दरवाजा नहीं तोड़ा और न ही कोई प्रयास किया। इससे उसकी आपराधिक मंशा का पता चलता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी देवर संजय और सास राजलक्ष्मी की ओर से मृतका को प्रताड़ित करने का कोई साक्ष्य फाइल पर नहीं है। आरोपी अजय प्रकाश ने मृतका के साथ लगातार मानसिक और शारीरिक क्रूरता की। इसके कारण तृप्ति ने आहत होकर अपने और पुत्री पर मिट्टी का तेल डालकर आत्महत्या कर ली।
पत्रावली के अनुसार वादी संतोष सिंह ने गोसाईंगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर के मुताबिक उन्होंने अपनी बहन तृप्ति सिंह की शादी 29 अप्रैल 2007 को अजय प्रकाश के साथ की थी। शादी के बाद से ही तृप्ति को पति अजय प्रकाश सिंह, सास राजलक्ष्मी सिंह, देवर संजय प्रकाश सिंह, जेठ जय प्रकाश और जेठानी सुमन सिंह दहेज में अल्टो कार और अजय के बीपीएड करने के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग करते थे। आरोपियों की मांग पर वादी के पिता ने डेढ़ लाख रुपये तो दे दिए, लेकिन कार की मांग पूरी नहीं कर पाए। आरोप लगाया गया कि 25 फरवरी को कार की मांग पूरी न हो पाने पर दिन में तृप्ति और उसकी बेटी आयुषी पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना की और आरोपी पति अजय प्रकाश सिंह, सास राजलक्ष्मी सिंह तथा देवर संजय प्रकाश सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।
कोर्ट में अधिवक्ता ने की अभद्रता, एफआईआर दर्ज
लखनऊ। आरोपी को सजा देने के बाद दूसरे मामले की सुनवाई कर रही कोर्ट को एक वादी के वकील ने बुरा भला कहा। यही नहीं, न्यायाधीश से अभद्रता की। इससे कोर्ट के काम में बाधा आई और न्यायाधीश को कोर्ट छोड़कर अपने चैंबर में जाना पड़ा। इस मामले में सरकारी अधिवक्ता धीरज सिंह ने वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
दहेज हत्या के दो आरोपियों को बरी करने और पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में सजा सुनाने के बाद एडीजे मधु डोगरा बुधवार को दूसरे मामले की सुनवाई कर रही थीं। इसी बीच वादी संतोष सिंह की वकील ज्योत्सना सिंह अपने देवर, भाई, बेटे और कुछ वकीलों के साथ कोर्ट में दाखिल हुईं। आरोप है कि ज्योत्सना सिंह ने न्यायाधीश पर गंभीर आरोप लगाए। साथ ही कोर्ट के सरकारी वकील और कर्मचारियों पर भी बिक जाने का आरोप लगाया। उसके साथ आए अन्य लोगों ने सरकारी वकील से अभद्रता की। इससे कोर्ट के काम में बाधा आई और न्यायाधीश ने सुनवाई बंद कर दी। सरकारी अधिवक्ता की तहरीर पर ज्योत्सना सिंह, उनके बेटे, देवर, भाई व अन्य के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, अभद्रता व गाली गलौज समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।