आयकर विभाग ने लखनऊ और बाराबंकी में जेएसवी ग्रुप के ठिकानों पर मारे गए छापों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी करने के प्रमाण हासिल किए है। सूत्रों के मुताबिक जेएसवी ग्रुप ने बाराबंकी में गैलेंट ग्रुप के नए औद्योगिक प्रतिष्ठान के लिए 100 एकड़ भूमि बेची थी, जिसके एवज में उसे करीब 45 करोड़ रुपये का नगद भुगतान किया गया था। अब आयकर विभाग इस रकम का सौ प्रतिशत जुर्माना और करीब 70 प्रतिशत टैक्स जेएसवी ग्रुप से वसूलने की तैयारी में है, जो करीब 70 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है। आयकर विभाग की पूछताछ में जेएसवी ग्रुप के संचालकों ने टैक्स चोरी की बात कबूली है।
सूत्रों के मुताबिक गैलेंट ग्रुप को बेची गई अधिकतर भूमि जेएसवी ग्रुप के संचालकों के नाम थी। इसके अलावा बाराबंकी में रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले हबीबुल्लाह की कुछ भूमि भी गैलेंट ग्रुप को नगद भुगतान लेकर बेची गई थी। जांच में सामने आया कि हबीबुल्लाह ने नोटबंदी के दौरान किसानों को मुंहमांगी कीमत पर पुराने नोट देकर उनकी भूमि को खरीदा था। बाद में जेएसवी ग्रुप के साथ उसने अपनी भूमि भी गैलेंट ग्रुप को बेच दी। इसके प्रमाण आयकर विभाग को अप्रैल माह में गोरखपुर समेत देश भर के पांच राज्यों में गैलेंट ग्रुप के 50 से अधिक ठिकानों पर छापों के दौरान आयकर विभाग को मिले थे। भूमि खरीद से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल में करीब 45 करोड़ रुपये का नगद भुगतान करने के पुख्ता सुबूत मिलने के बाद बृहस्पतिवार को जेएसवी ग्रुप और हबीबुल्लाह के सात ठिकानों पर छापा मारा गया था। लखनऊ में पांच, जबकि बाराबंकी के दो ठिकानों को आयकर विभाग ने दो दिन तक खंगालने के बाद कई अहम सुबूत जुटाए हैं। शुक्रवार देर रात सभी ठिकानों पर छापे समाप्त हो गए।
जला दिए सारे मोबाइल और सिम
जांच में सामने आया कि गैलेंट ग्रुप पर मारे गए छापों के बाद जेएसवी ग्रुप के संचालक सतर्क हो गए थे। उन्होंने अपने सारे मोबाइल और सिम कार्ड को जला दिया था ताकि जांच एजेंसियों के शिकंजे से बचा जा सके। हालांकि गैलेंट ग्रुप के संचालकों के मोबाइल से आयकर विभाग ने पहले ही इस खरीद-फरोख्त से संबंधित डाटा रिकवर कर लिया था। जब आयकर विभाग ने जेएसवी ग्रुप के संचालकों से उनके मोबाइल फोन और सिम कार्ड के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने यह कबूल कर लिया।