ओमान का कहना है कि उसने अपने मुसन्दम और अश शर्कियाह साउथ गवर्नरेट के पास निशाना बनाए गए लाइबेरिया के झंडे वाले दो तेल टैंकरों से क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला है। एक अलग बयान में, ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर ने कहा कि देश के तट के पास निशाना बनाए जाने के बाद तेल टैंकर 'अल बहिया' से आठ क्रू सदस्यों को बचाया गया। उसने बताया कि तीन क्रू सदस्य अभी भी लापता हैं।
हूती प्रवक्ता याह्या सरी का कहना है कि उनके समूह ने देश के अल-बैदा प्रांत के ऊपर चीन में बने एक ड्रोन को मार गिराया है। बयान में यह भी कहा गया कि समूह 'देश के हवाई क्षेत्र और क्षेत्रीय अखंडता के किसी भी उल्लंघन का डटकर मुकाबला करेगा'।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, ईरान और हिजबुल्ला को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले उस बिल में शामिल किया जा सकता है जिस पर कांग्रेस अभी विचार कर रही है।
कुवैत का कहना है कि उसकी सेना कई हवाई लक्ष्यों का सामना कर रही है। पिछले कुछ दिनों से कुवैत और खाड़ी के दूसरे देशों के साथ ऐसा ही हो रहा है। ईरान का कहना है कि वह इस इलाके में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहा है, लेकिन खाड़ी देशों ने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अमेरिकी सेना ईरान पर हमला करने के लिए उनके इलाकों का इस्तेमाल नहीं कर रही है। ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र से उन दो अमीराती जहाजों के बारे में भी जानकारी मिली है जिन पर रात में ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया था। 'स्टोल्ट मैग्नीशियम' जहाज के सभी 23 क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है, जबकि दूसरे जहाज 'अल बहिया' के तीन क्रू सदस्य लापता हैं। ये जहाज ओमान की समुद्री सीमा में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में हमले का शिकार हुए।
कुवैत की सेना का कहना है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम एक हमले का जवाब दे रहे हैं। हाल के दिनों में, अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत और अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर कई बार हमले किए हैं। हालिया गोलीबारी तब शुरू हुई जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमला किया। मंगलवार को कुवैत पर हुए हमले में किसी के हताहत होने या किसी नुकसान की कोई तुरंत जानकारी या रिपोर्ट नहीं मिली है।
बहरीन की अदालत ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए जासूसी करने के आरोप में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार तीनों पर बहरीन के खिलाफ शत्रुतापूर्ण और आतंकी गतिविधियों में मदद करने का आरोप था। हाल के दिनों में खाड़ी देशों ने ईरान समर्थक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
तेहरान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोहम्मद एस्लामी ने कहा है कि ईरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहे, लेकिन इसके इस्तेमाल की शर्तें ईरान तय करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पड़ोसी देशों में मौजूद अपने सैन्य ठिकानों से ईरान पर हमले कर रहा है, इसलिए ईरान अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है। एस्लामी ने कहा कि ईरान किसी भी विरोधी देश को होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं करने देगा।
अमेरिकी सीनेट में अल्पमत नेता चक शूमर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ट्रंप बिना स्पष्ट रणनीति के पुराने गलत फैसलों को दोहरा रहे हैं। शूमर ने कहा कि ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष को संभालने के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना दिखाई नहीं दे रही है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान ने दोबारा हमला किया तो इस्राइल पहले से ज्यादा ताकत के साथ जवाब देगा। नेतन्याहू ने एक कार्यक्रम में कहा, 'ईरान के नेताओं से कहता हूं कि अगर आपने हम पर हमला किया तो यह मत समझिए कि सब शांत रहेगा। अब वह समय खत्म हो चुका है जब कोई हम पर हमला करे और हम जवाब न दें'। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका द्वारा ईरान पर नए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 87.49 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। सोमवार को भी तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा संघर्षविराम के कमजोर पड़ने की आशंका से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने का भी खतरा पैदा हो गया है।
समुद्री निगरानी मंच 'मरीन ट्रैफिक' के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। मंगलवार सुबह से केवल चार जहाज इस रास्ते से गुजरे हैं। इनमें एक तेल टैंकर और तीन कंटेनर जहाज शामिल हैं। बताया गया कि लौटते समय इन जहाजों ने अपनी अंतिम मंजिल और स्वामित्व संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
रोम में इस्राइल और लेबनान के बीच बातचीत का पहला दिन खत्म हो गया है। इससे पहले, इस्राइल के विदेश मंत्री ने कहा था कि देश अमेरिका की मध्यस्थता वाले समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान के दो इलाकों से सेना हटाने की योजना पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। फ्रेमवर्क समझौते को कैसे लागू किया जाए, इस पर चर्चा करने के लिए बातचीत के दूसरे दिन भी जारी रहने की उम्मीद है।
ईरान की संसद के 290 में से 180 सांसदों ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते (एमओयू) को समाप्त करने की मांग की है। सांसदों ने बयान जारी कर कहा कि अब बदले की कार्रवाई का समय है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर नया कानून बनाने और ईरान की रक्षा नीति को और मजबूत करने की भी मांग की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगाने के अपने पहले के बयान से पीछे हटते हुए नया रुख अपनाया है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान को छोड़कर सभी देशों के जहाजों के लिए खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि अब टैरिफ की जगह खाड़ी देशों के साथ व्यापार और निवेश समझौतों पर जोर दिया जाएगा।
कतर ने होर्मुज जलडमरूमध्य में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर हमला है और इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हुआ है। कतर ने ईरान से अपील की कि वह ऐसे सभी कदम तुरंत बंद करे जो क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं। मंत्रालय ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करे तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। इससे पहले यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी क्रूज मिसाइलों के हमले में दो अमीराती तेल टैंकर निशाना बने। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य भारतीय घायल हुए हैं।
ओमान के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, ओमान ने सभी संबंधित पक्षों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मस्कट 'अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप जलडमरूमध्य में नेविगेशन की आज़ादी को पूरी तरह बहाल करने के लिए सभी पक्षों के साथ अपना पारदर्शी और निष्पक्ष सहयोग जारी रखे हुए है'।
सल्तनत ऑफ ओमान 'समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन' के तहत एक सदस्य देश के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अपनी पूरी प्रतिबद्धता दोहराता है, और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और उनके अनुसार काम करने का आग्रह करता है। मंत्रालय ने सऊदी अरब पर हुए हूथी रॉकेट हमलों की भी निंदा की और कहा कि वह सऊदी अरब द्वारा 'अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा' के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करता है। इससे पहले, कतर के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके में हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले की निंदा की थी।
इस्राइल ने ड्रोन से पिछले एक घंटे के अंदर ही पुलिस स्टेशन पर चार मिसाइलें दागीं। यह गाजा पट्टी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं पर जान-बूझकर किए जा रहे हमलों का ही एक हिस्सा है। इसमें सात पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई; जिनमें पुलिस स्टेशन के डायरेक्टर, उनके डिप्टी और पांच अन्य अधिकारी शामिल थे। उनका काम एक ऐसे इलाके में कानून-व्यवस्था और संगठन बनाए रखना था, जो विस्थापितों के कैंप के बीच एक बाजार के तौर पर जाना जाता है।
गाजा में सरकारी मीडिया कार्यालय का कहना है कि अक्तूबर में इलाके में सीजफायर लागू होने के बाद से इस्राइली सेना की तरफ से 3,689 बार इसका उल्लंघन किया गया है। कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि तब से इस्राइली सेना के हमलों के कारण 1,122 लोग मारे गए हैं और 3,599 घायल हुए हैं। अमेरिका की मध्यस्थता से हुए समझौते के बाद गाजा में सीजफायर 10 अक्तूबर, 2025 को लागू हुआ था।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की अमेरिकी धमकी के बाद विशेषज्ञों ने वॉशिंगटन की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। किंग्स कॉलेज लंदन के विशेषज्ञ रॉब गाइस्ट पिनफोल्ड ने कहा कि यह दिखाता है कि अमेरिका बिना स्पष्ट रणनीति के इस संघर्ष में उतरा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी हमेशा कहते रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला और स्वतंत्र रहना चाहिए। लेकिन हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की कार्रवाई के जवाब में इस मार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत टोल लगाने की धमकी दी है। विशेषज्ञ का कहना है कि इससे स्थिति और उलझ गई है। उनके मुताबिक, अमेरिका जिस तरह की नीति का विरोध कर रहा था, अब उसी तरह के कदम उठाने की बात कर रहा है। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र में अमेरिका की रणनीति को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों के मोबाइल नेटवर्क हैक कर अमेरिकी सैन्य कर्मियों और ठेकेदारों की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की। यह दावा ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी टेलीकॉम डेटा और सुरक्षा विशेषज्ञों के हवाले से सामने आई है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सांसद इस खुलासे से चिंतित हैं, क्योंकि मोबाइल रोमिंग सिस्टम और स्मार्टफोन के विज्ञापन डेटा का इस्तेमाल कर सैन्य कर्मियों की लोकेशन पता लगाई जा सकती है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खाड़ी देशों के अधिकारियों को शक है कि ईरान या उसके सहयोगी स्थानीय मोबाइल नेटवर्क के रोमिंग सिस्टम का फायदा उठाकर अमेरिकी कर्मियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ गैरी मिलर ने कहा कि ईरान के पास रियल टाइम लोकेशन ट्रैक करने की क्षमता है और संभव है कि उसने मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल किया हो। हालांकि, इस दावे पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हिरासत में लिए गए 55 ईरानी मछुआरों को वापस ईरान भेजा जा रहा है। यह जानकारी अबू धाबी स्थित ईरानी दूतावास ने दी है। दूतावास के अनुसार, 14 मछुआरे समुद्र के रास्ते ईरान लौट चुके हैं, जबकि बाकी लोगों को हवाई मार्ग से भेजा जाएगा। इन मछुआरों को मार्च और अप्रैल में यूएई तटरक्षक बल ने हिरासत में लिया था। ईरानी दूतावास का कहना है कि उस समय क्षेत्र में तनाव और नेविगेशन (ट्रैकिंग) सिस्टम में आई गड़बड़ी के कारण मछुआरे अनजाने में यूएई के समुद्री क्षेत्र में पहुंच गए थे। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सभी मछुआरों ने दो महीने से अधिक समय तक स्वेहान डिटेंशन सेंटर और रास अल-खैमाह व शारजाह की जेलों में समय बिताया। इन मछुआरों में ज्यादातर ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान और होर्मोजगान प्रांत के रहने वाले हैं।
टैंकर 'स्टोल्ट मैग्नीशियम' के मैनेजर, 'स्टोल्ट टैंकरर्स' का कहना है कि अरब सागर में ओमान के पास चलते समय 'किसी अज्ञात बाहरी चीज के धमाके' के बाद टैंकर में आग लग गई। कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह घटना रात 12:40 बजे (सोमवार को 20:40 GMT) हुई और इससे जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। कंपनी ने आगे बताया कि जहाज पर मौजूद सभी नाविक सुरक्षित हैं और सभी का पता चल गया है, साथ ही क्रू ने आग बुझाने का काम भी शुरू कर दिया है। यूकेएमटीओ ने ओमान के कलहत से 40 नॉटिकल मील (75 किमी) उत्तर-पूर्व में एक घटना की सूचना दी थी, जिसके बारे में हमने पहले भी बताया था और यह एलएसईजी शिपिंग डेटा पर 'स्टोल्ट मैग्नीशियम' की लोकेशन से मेल खाती है।
यूरोपीय एविएशन सेफ्टी एजेंसी (ईएएसए) का कहना है कि एयरलाइंस को बहरीन, कुवैत, कतर, यूएई और ओमान की खाड़ी के पानी के पास उड़ान नहीं भरनी चाहिए। ईएएसए ने एक बयान में कहा, 'सैन्य गतिविधियों में अप्रत्याशित बदलाव और साथ ही मिसाइल, ड्रोन, लड़ाकू विमान और एयर-डिफेंस सिस्टम के इस्तेमाल की संभावना के कारण, संबंधित हवाई क्षेत्र में सभी ऊंचाइयों और उड़ान स्तरों पर नागरिक उड़ानों के लिए बहुत ज्यादा खतरा पैदा हो गया है'। एजेंसी ने पिछले हफ्ते एयरलाइंस को ईरान, इराक और लेबनान के हवाई क्षेत्र में उड़ान न भरने की सलाह दी थी।
अमेरिका ने इराक और कुवैत के पास ईरान के सीमावर्ती इलाकों पर नए हमले किए हैं। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, खुजेस्तान प्रांत के डिप्टी गवर्नर वलीओल्लाह हयाती ने बताया कि अबादान शहर (जहां पश्चिम एशिया की सबसे पुरानी तेल रिफाइनरी है) और बंदरगाह शहर माहशहर पर हमले किए गए। फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, माहशहर पर हमला स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1:30 बजे (10:00 GMT) हुआ। अबादान शहर पर स्थानीय समयानुसार दोपहर 1:25 बजे हमला हुआ।
ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी का कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध ने अपने आधिकारिक तौर पर तय किए गए लक्ष्यों में से कोई भी हासिल नहीं किया है और इसे यूएन का समर्थन भी नहीं है। उन्होंने फ्रांसीसी अखबार 'ले मोंडे' में छपे एक लेख में लिखा, 'यह युद्ध एक तबाही है'। मंत्री ने आगे कहा, 'फिर भी, अगर यह खाड़ी में 'रोकथाम' की गलत धारणा को खत्म करता है, तो उम्मीद की जा सकती है- एक ज्यादा निष्पक्ष, व्यावहारिक और असरदार सिस्टम बन सकता है, जिससे लगभग आधी सदी की रणनीतिक गलतियों को सुधारा जा सकेगा'। उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से इस इलाके के लिए सबसे बड़ा खतरा तेहरान से नहीं, बल्कि तेल अवीव से है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की सेना का एक आधिकारिक हिस्सा है और ब्रिटेन पर एक सरकारी संस्था को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ब्रिटेन ने सोमवार को IRGC और उससे जुड़े एक समूह को समर्थन देने पर रोक लगा दी। यह कदम उन नए अधिकारों के तहत उठाया गया है जिनका मकसद विदेशी देशों को निगरानी और तोड़-फोड़ जैसी गतिविधियों के लिए प्रॉक्सी (प्रतिनिधि समूहों) का इस्तेमाल करने से रोकना है। ईरान, जो अमेरिका और इस्राइल के साथ संघर्ष में है, पहले भी प्रॉक्सी का इस्तेमाल करने से इनकार कर चुका है।
ईरान से दागी गई मिसाइलों और प्रोजेक्टाइल की वजह से इस इलाके के कई देशों में एयर डिफेंस सिस्टम के लिए रात और सुबह का समय काफी हलचल भरा रहा। इसका असर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है। इसका ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर पड़ रहा है, जहां कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। दुनिया भर के एनर्जी मार्केट में जाने वाला लगभग 20 प्रतिशत ईंधन इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। और चूंकि जहाज हमले का शिकार होने के जोखिम से बच रहे हैं, इसलिए इसका असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ रहा है और दुनिया भर में पेट्रोल स्टेशनों पर कीमतें बढ़ रही हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी ईरान में स्थित बुशहर की चार जगहों पर- जहां परमाणु ठिकाने भी हैं; अमेरिकी मिसाइलों से हमला हुआ है। इससे पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया था कि दक्षिणी शहर बंदर अब्बास के पास कम से कम पांच धमाकों की आवाज सुनी गई थी।
अरब सागर में कई जहाजों पर हमला हुआ है। इस पर डच शिपिंग कंपनी 'स्टोल्ट टैंकर' ने बताया कि अरब सागर में ओमान के पास उसके एक जहाज पर हमला किया गया; ईरान ने कई जहाजों को निशाना बनाया था।
ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका की 'जंग, बुराई और आक्रामकता' से कभी नहीं खुलेगा। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल इस रणनीतिक जलमार्ग के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेंगे। होर्मुज़ जलडमरूमध्य तभी खुल सकता है जब ईरानी जनता के अधिकारों का सम्मान किया जाए। अकरामिनिया ने यह भी कहा कि ईरान अपने 'शहीदों के खून का बदला लेने' के लिए प्रतिबद्ध है, खासकर इस्लामी क्रांति के 'शहीद नेता' का जिक्र करते हुए उन्होंने अमेरिका पर तीखा निशाना साधा।
अमेरिकी हवाई हमले में क्षतिग्रस्त होने के कुछ ही दिनों बाद ईरान के गोलिस्तान प्रांत स्थित रणनीतिक महत्व वाले अक्काला रेलवे पुल को मरम्मत के बाद दोबारा चालू कर दिया गया है। स्थानीय मीडिया एसएनएन के अनुसार इस पुल पर ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं। ईरानी अधिकारी इसे देश का सबसे महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर बताते हैं, जो तेहरान को तुर्कमेनिस्तान और चीन की दिशा से जोड़ता है। ईरानी अखबार कयहान के मुताबिक इस मार्ग का इस्तेमाल रूसी माल ढुलाई के लिए भी किया जाता है, जबकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद चीन ने अस्थिर समुद्री मार्गों से बचने के लिए इस रेल मार्ग पर निर्भरता बढ़ा दी है। अमेरिकी हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रेलवे लाइन, पुल और अन्य अहम परिवहन ढांचों को भी निशाना बनाया गया था।
ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, ओमान के लिमाह क्षेत्र के दक्षिण-पूर्व में समुद्री मार्ग से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया गया है। घटना के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल हमले से हुए नुकसान, टैंकर की स्थिति या किसी संभावित हताहत के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और उसके प्रबंधन को लेकर संसद में 'स्ट्रैटेजिक एक्शन फॉर द सिक्योरिटी एंड सस्टेनेबल प्रोग्रेस ऑफ द स्ट्रेट ऑफ होरमुज एंड द पर्शियन गल्फ' नामक विधेयक औपचारिक रूप से पेश किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह कदम अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने की घटना के साथ ही उठाया गया है। अजीजी ने कहा कि ईरान अपनी 'रेड लाइन्स' की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन के मुद्दे पर। उन्होंने इसे पहला कदम बताते हुए संकेत दिया कि आने वाले समय में इस दिशा में और भी कदम उठाए जाएंगे।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने खाड़ी देशों और जॉर्डन पर हाल में हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने की साजिश बताया है। जारी बयान में उन्होंने विशेष रूप से सऊदी अरब पर हुए हालिया हमले को 'घोर निंदनीय' बताते हुए कहा कि ऐसे शत्रुतापूर्ण कदम केवल सऊदी अरब और अन्य प्रभावित देशों की संप्रभुता व सुरक्षा को ही निशाना नहीं बनाते, बल्कि पूरे अरब खाड़ी क्षेत्र को लगातार तनाव और अस्थिरता में रखने की कोशिश करते हैं। राष्ट्रपति आउन ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां उन ताकतों के एजेंडे का हिस्सा हैं जो अरब देशों और उनकी जनता के हित में नहीं हैं। उन्होंने लेबनान की ओर से सरकार और जनता दोनों के स्तर पर सऊदी अरब, सभी खाड़ी देशों और जॉर्डन के प्रति पूर्ण एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारी जहाजों पर हाल में हुए हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान के उप मिशन प्रमुख (डीसीएम) मोहम्मद जवाद हुसैनी को तलब किया। मंगलवार को दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय पहुंचने के बाद ईरानी राजनयिक वहां से रवाना हुए। इससे एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए ईरानी हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य भारतीय घायल हुए थे। इस घटना के बाद भारत ने अपनी गंभीर चिंता ईरानी पक्ष के समक्ष दर्ज कराई और मामले को लेकर जवाब मांगा।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा जारी आईआरजीसी के बयान में कहा गया कि यह हमला अमेरिकी सेना की एक महत्वपूर्ण सैन्य सुविधा पर किया गया, जिसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए किया जा रहा था। बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई 'अमेरिकी अपराधियों' को उनके कदमों की सजा देने के उद्देश्य से की गई। इससे पहले ईरान और जॉर्डन दोनों ने इस हमले की पुष्टि की थी। वहीं, जॉर्डन की सशस्त्र सेनाओं ने कहा कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली चार बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना की कड़ी आलोचना की है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने की बात कही गई है। साओ पाउलो में सोमवार को दिए अपने बयान में लूला ने इसे 'समुद्री डकैती' करार देते हुए कहा, 'पहले के समय में इसे समुद्री डकैती कहा जाता था। अमेरिका जैसा बड़ा देश, जिसने वर्षों तक समुद्री डकैती के खिलाफ लड़ाई लड़ी, अब खुद समुद्री डाकू की तरह व्यवहार नहीं कर सकता।'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 7 जुलाई से दोबारा शुरू हो गया है और कई महीनों से लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। सीबीएस न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने सीनेट के कार्यवाहक अध्यक्ष चक ग्रासली को भेजे पत्र में कहा कि अमेरिकी हमले सीमित, सुनियोजित और नागरिकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमले कर दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना जरूरत पड़ने पर आगे भी हमले जारी रखेगी। इस बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर लागू करने का ऐलान किया है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी। वहीं ईरान ने अमेरिकी हस्तक्षेप को खारिज करते हुए चेतावनी दी है कि उसकी अनुमति के बिना हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं ले सकता और किसी भी सैन्य कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उसके दो तेल टैंकरों 'मोम्बासा' और 'बहिया' पर दो क्रूज मिसाइलों से हमला किया। हमले के बाद दोनों टैंकरों में भीषण आग लग गई। इस घटना में मोम्बासा पर तैनात एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए। घायलों में छह की हालत गंभीर बताई गई है, जिनमें चार भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। यूएई ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और बेहद दुस्साहसिक कार्रवाई करार देते हुए कहा कि उसे अपने जहाजों और हितों की रक्षा करने तथा ईरान की इस कार्रवाई का उचित जवाब देने का पूरा अधिकार है। वहीं बहरीन में भी कुछ देर पहले मिसाइल हमले की आशंका के बीच सायरन बजाए गए, हालांकि वहां किसी नुकसान या हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की इस जवाबी कार्रवाई को क्षेत्र में तनाव बढ़ने का नया संकेत माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष तेज होने के बाद अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत एक महीने के उच्चतम स्तर 84 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा या जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित हुई, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर दुनिया भर में ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका ने मंगलवार तड़के ईरान पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ ब्लॉकेड दोबारा लागू कर रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और हॉर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 'बहुत जोरदार हमला' कर रहा है और यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध कराने की लागत अन्य देशों के जहाजों से वसूली जाएगी। अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने बहरीन और यूएई से जुड़े दो तेल टैंकरों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जारी जवाबी हमलों के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो प्रतिशत बढ़कर चार सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो ऑयल टैंकरों पर हमले का दावा किया है। अज जजीरा ने ईरान की अर्ध-आधिकारिक समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के हवाले से बताया कि, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले दो सुपर ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया है। रिपोर्ट में इस कार्रवाई के लिए आईआरजीसी के एक आधिकारिक बयान का हवाला दिया गया है।
यह रिपोर्ट संयुक्त अरब अमीरात के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद सामने आई है, जिसमें यूएई ने कहा था कि ईरान ने ओमान के समुद्री क्षेत्र में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया है, जिसके कारण चालक दल के एक भारतीय सदस्य की मौत हो गई है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय ने ओमान के समुद्री क्षेत्र में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने राष्ट्रीय तेल टैंकरों 'मोम्बासा' और 'अल बहिया' पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु पर भारत सरकार और वहां की जनता के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। यूएई ने रेखांकित किया कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का घोर उल्लंघन है। इसके साथ ही उन्होंने सभी प्रकार की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तत्काल समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने का आह्वान किया।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी नौवहन मार्ग से गुजरते समय दो राष्ट्रीय टैंकरों 'मोम्बासा' और 'अल बहिया' पर दो ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले के कारण मोम्बासा टैंकर पर सवार एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई। इसके अलावा आठ अन्य लोग घायल हो गए, जिनमें से चार गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में छह भारतीय नागरिक और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने कमांडर इन चीफ के निर्देश पर आज शाम 4:45 बजे (ईटी) ईरान के खिलाफ लगातार तीसरे दिन हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरानी बलों को भारी नुकसान पहुंचाना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्दोष नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की उनकी क्षमता को कमजोर करना है।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल प्लेटफॉर्म मीडिया एक्स पर बताया है कि कमांडर इन चीफ के निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) बल 14 जुलाई को शाम 4 बजे (अमेरिका के समय अनुसार) से ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकेबंदी फिर से शुरू करेंगे। यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होगी। हालांकि, नाकेबंदी का उल्लंघन न करने वाले अन्य जहाजों को क्षेत्र से गुजरने की अनुमति होगी। इससे पहले 13 अप्रैल से 18 जून तक ऐसी नाकेबंदी की गई थी। उस दौरान अमेरिकी बलों ने 140 से अधिक जहाजों के रास्ते बदले थे, नियमों का उल्लंघन करने वाले 9 जहाजों को निष्क्रिय किया था और मानवीय सहायता वाले 50 से अधिक जहाजों को जाने दिया था। फिलहाल, सभी नाविकों को ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में काम करते समय चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है।
The United States Central Command (CENTCOM) has announced that U.S. military forces will resume their naval blockade against Iranian ports starting July 14 at 4:00 PM ET.
— ANI (@ANI) July 13, 2026
Acting under the directive of the Commander in Chief, forces will intercept and restrict unauthorized… pic.twitter.com/zcA0OvacCq