यूरोपियन यूनियन के जलवायु आयुक्त ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका-इस्राइल युद्ध के बाद पैदा हुए ऊर्जा संकट ने जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने की जरूरत को और बढ़ा दिया है। कोलंबिया में आयोजित वैश्विक बैठक में उन्होंने कहा कि जलवायु कारणों के अलावा अब आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी यह कदम जरूरी हो गया है। होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेज उछाल आया है। यूरोपीय देश तेल आयात पर काफी निर्भर हैं।
संयुक्त अरब अमीरात के OPEC से बाहर निकलने के फैसले को ऊर्जा विशेषज्ञों ने तेल बाजार के लिए बड़ा संकेत बताया है। मेयर रिसोर्सेज की सीईओ ने कहा कि यूएई फिलहाल होरमुज जलडमरूमध्य संकट के कारण उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहा है, लेकिन संकट खत्म होने के बाद वह मौजूदा 35 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर करीब 50 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि OPEC पहले भी बड़े संकट झेल चुका है और आगे भी मजबूत बना रहेगा।
लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्ला ने इस्राइल पर एक बड़े हमले का दावा किया है। हिजबुल्ला के मुताबिक, उसने दक्षिण लेबनान के कांतारा शहर में एक इस्राइली मर्कावा टैंक को ड्रोन के जरिए सटीक निशाना बनाया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इस्राइल और लेबनान सीमा पर तनाव चरम पर है।
दोनों तरफ से लगातार हो रहे हमलों के कारण इस क्षेत्र में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। हालांकि, हिजबुल्लाह के इस बड़े दावे पर अभी तक इस्राइली सेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या टैंक को हुए नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखने और समुद्री आवाजाही को सीमित करने का अधिकार है, खासकर तब जब उसकी सुरक्षा खतरे में हो। उन्होंने पश्चिमी देशों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई देश अंतरराष्ट्रीय नियमों की आड़ में अपने हित साध रहे हैं। रूसी राजदूत ने पश्चिमी देशों की नीतियों की तुलना समुद्री लुटेरों से करते हुए कहा कि वे अपने गैरकानूनी कदमों को वैधता का आवरण देने की कोशिश करते हैं।
इस बीच लेबनान में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्राइल ने लितानी नदी के उत्तर में कई इलाकों को हवाई हमलों का निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इसका असर आसपास के गांवों पर भी पड़ा है और प्रमुख सड़कों (जो नबातिया, सिडोन और राजधानी बेरूत को जोड़ती हैं) पर भारी ट्रैफिक और अव्यवस्था देखी जा रही है।
ईरान ने अमेरिका को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब वॉशिंगटन अन्य देशों पर अपनी नीतियां थोपने की स्थिति में नहीं है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तालेई-निक ने कहा कि अमेरिका को स्वतंत्र देशों पर अपनी इच्छाएं नहीं थोपनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका अपनी अवैध और अव्यावहारिक मांगों को छोड़ने पर मजबूर हो। ईरान के अनुसार, वैश्विक व्यवस्था में बदलाव आ रहा है और स्वतंत्र देश अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं।
ईरान ने प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि इस्राइल से जुड़े या उसके स्वामित्व वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, अन्य शत्रु देशों और उनसे जुड़े जहाजों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। ईरान का कहना है कि जिन देशों ने उस पर प्रतिबंध लगाए या विदेशी बैंकों में उसके धन को रोककर आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, उनसे जुड़े जहाजों पर लगाए गए टोल के जरिए उस नुकसान की भरपाई की जाएगी।
ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने की योजना पर काम कर रहा है। खास बात यह है कि यह शुल्क डॉलर या किसी विदेशी मुद्रा में नहीं, बल्कि ईरानी करेंसी रियाल में लिया जाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी के अनुसार, इस संबंध में 11 बिंदुओं वाला प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे समिति से मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे संसद के मुख्य सदन में पेश किया जाएगा, जहां से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप ले सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मौजूदा क्षेत्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे समय में रूस के साथ हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हाल की घटनाएं यह दिखाती हैं कि ईरान और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अराघची ने कहा कि दोनों देशों के संबंध आगे बढ़ रहे हैं और ईरान रूस के समर्थन को महत्व देता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अपील की है। सुरक्षा परिषद की बैठक में उन्होंने कहा कि जहाजों को बिना किसी टैक्स या भेदभाव के गुजरने देना चाहिए, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था सांस ले सके। मार्च से इस रास्ते के बंद होने से दुनिया के तेल, गैस और खाद की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि इससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया में भुखमरी का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने इसे कोविड के बाद सबसे बड़ा आर्थिक झटका बताया और सभी पक्षों से बातचीत और संयम बरतने का आग्रह किया।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिजबुल्ला के रॉकेट और ड्रोन को देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि इस खतरे को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी है। नेतन्याहू के मुताबिक, हिजबुल्ला के 122 एमएम रॉकेट और ड्रोन को रोकने के लिए तकनीक और सेना का इस्तेमाल करना होगा।
सोमवार को इस्राइली सेना ने लेबनान की बेका घाटी और दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्ला के 20 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए। इनमें हथियारों के गोदाम और रॉकेट लॉन्च पैड शामिल हैं। इन हमलों में चार लोगों के मारे जाने की खबर है। युद्धविराम के बावजूद इस्राइल का कहना है कि वह किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए हमला करने का अधिकार रखता है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार को रूस से सीधे इस्लामाबाद पहुंचे। यह यात्रा अमेरिका के साथ संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से चल रहे राजनयिक प्रयासों का हिस्सा है। प्रेस टीवी के अनुसार, पिछले 48 घंटों में यह उनकी पाकिस्तान की तीसरी यात्रा है। अराघची की यह नवीनतम यात्रा रूस और ओमान सहित कई देशों में उच्च स्तरीय मुलाकातों की श्रृंखला के बाद हुई है। इससे पहले, अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता की, जहां द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई।
ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। अराघची ने बताया कि पुतिन के साथ उनकी बैठक बहुत अच्छी रही। यह बातचीत डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक चली। इसमें अमेरिका और इस्राइल की आक्रामकता और युद्ध पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों और क्षेत्र के ताजा हालातों पर भी विचार साझा किए। अराघची ने कहा कि बैठक में सहयोग बढ़ाने के लिए कई अच्छे सुझाव सामने आए। यह मुलाकात अराघची के तीन देशों के राजनयिक दौरे का हिस्सा थी। रूस आने से पहले उन्होंने पाकिस्तान और ओमान की यात्रा भी की थी।