इस्राइल डिफेंस फोर्स ने बताया कि उसने उत्तरी गाजा पट्टी में 14 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंगों को नष्ट कर दिया है। आईडीएफ ने कहा कि डिवीजन 252 के तहत नॉर्दर्न ब्रिगेड की सेनाएं और यहालाम यूनिट पिछले कुछ महीनों से एक खास अभियान में लगी हुई हैं, जिसका मकसद हमास के भूमिगत ढांचे को खत्म करना है। यह ऑपरेशन खासकर उत्तरी गाजा और येलो लाइन के पूर्व में बेत हनून इलाके में चल रहा है।
आईडीएफ के मुताबिक, इस अभियान के दौरान ब्रिगेड की सेनाओं ने यहालाम यूनिट के साथ मिलकर अब तक करीब 14 किलोमीटर लंबी सुरंगें नष्ट कर दी हैं। इन सुरंगों के अंदर सोने के कमरे और कई हथियार भी मिले हैं। सेना अभी भी इस इलाके को साफ करने के मिशन में लगी हुई है। आईडीएफ के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में उत्तरी ब्रिगेड की सेनाओं ने करीब 70 लड़ाकों को मार गिराया है, जिन्होंने सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया था और जो सैनिकों के लिए तुरंत खतरा बने हुए थे।
इसके साथ ही आईडीएफ ने अपनी डिफेंस पॉलिसी भी अपडेट की है। होम फ्रंट कमांड के हालात के आकलन के बाद यह तय किया गया कि कॉनफ्रंटेशन लाइन वाले इलाकों और मेरोन, बार योखाई, ओर हागानुज और सफसुफा जैसी बस्तियों में एक साथ अधिकतम 1500 लोगों के इकट्ठा होने की सीमा लागू होगी। आईडीएफ ने यह भी बताया कि उसने लेबनान में हिजबुल्ला संगठन के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जो उसके अनुसार उसके सैनिकों के लिए खतरा थे।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर गंभीर है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि कोई भी डील ऐसी होनी चाहिए, जिससे ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में मार्को रुबियो ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान मौजूदा संकट से बाहर निकलना चाहता है और इसी वजह से समझौते को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा आगे कहा कि ईरान की आर्थिक हालत लगातार खराब हुई है। महंगाई, कर्मचारियों को वेतन देने में दिक्कत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध अब भी जारी हैं। रुबियो ने ये भी कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले ईरान जिन समस्याओं से जूझ रहा था, वे अब भी मौजूद हैं और ज्यादातर पहले से ज्यादा खराब हो चुकी हैं।
व्लादिमीर पुतिन ने रूस में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया। पुतिन ने कहा कि रूस चाहता है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द स्थायी शांति कायम हो। उन्होंने ईरानी जनता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने देश की संप्रभुता के लिए बहादुरी से संघर्ष किया है। इस दौरान दोनों नेताओं ने रूस-ईरान के रिश्तों को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। अराघची ने कहा कि ईरान ने हालिया संघर्ष में अपनी ताकत दिखाई है और रूस जैसे सहयोगियों का समर्थन अहम है। गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह सफल नहीं हो पाई थी। ऐसे में रूस अब मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार नजर आ रहा है, ताकि क्षेत्र में तनाव कम हो सके।
खाड़ी क्षेत्र में उड़ानों की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इसी के चलते एयर इंडिया और इंडिगो भी जल्द ही कतर से भारत के लिए अपनी फ्लाइट सेवाएं फिर शुरू करने की योजना बना रही हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को दी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुल चुका है और कतर एयरवेज पहले से ही भारत के कई शहरों के लिए उड़ानें चला रही है।
पश्चिम एशिया से भारत के लिए अतिरिक्त उड़ानें भी शुरू हो गई हैं। सोमवार को यूएई और भारत के बीच लगभग 105 उड़ानें चलने की उम्मीद है। दुबई और अबू धाबी से सीमित संख्या में व्यावसायिक उड़ानें सुरक्षा और संचालन कारणों से चलाई जा रही हैं। सऊदी अरब और ओमान के कई एयरपोर्ट से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कुवैत का हवाई क्षेत्र भी खुल गया है और जज़ीरा एयरवेज और कुवैत एयरवेज ने सीमित उड़ानें फिर शुरू कर दी हैं। बहरीन का एयरस्पेस भी खुला है और गल्फ एयर भारत के विभिन्न शहरों के लिए उड़ानें चला रही है।
इसके अलावा, इराक का हवाई क्षेत्र भी सीमित उड़ानों के साथ खुला है, जिसका उपयोग भारत आने के लिए आगे की यात्रा में किया जा सकता है। ईरान का हवाई क्षेत्र फिलहाल आंशिक रूप से खुला है और केवल कार्गो व चार्टर्ड फ्लाइट्स की अनुमति है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है और वहां मौजूद लोगों से कहा है कि वे दूतावास की मदद से जमीन के रास्ते बाहर निकलें। अब तक तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 2,445 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की है। 28 फरवरी से अब तक करीब 12,96,000 यात्री इस क्षेत्र से भारत आ चुके हैं।
पश्चिम एशिया के हालातों पर विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोमवार को बताया कि भारत ने क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर बनाए रखी है और खाड़ी देशों के साथ अपने संपर्कों को और मजबूत किया है। एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट पर हुई एक अंतर-मंत्रालयी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के आधिकारिक दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री के निर्देश पर भारत ने खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंध और मजबूत किए हैं। हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 25-26 अप्रैल को यूएई का दौरा किया। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति से मुलाकात की और प्रधानमंत्री की तरफ से उनके लिए शुभकामनाएं दीं। दोनों पक्षों ने भारत-यूएई के व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय हालात और अन्य आपसी मुद्दों पर भी बात हुई।'
रणधीर जायसवाल ने बताया कि यह एक महीने के अंदर भारत से यूएई की दूसरी उच्च स्तरीय यात्रा है। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 11-12 अप्रैल को यूएई का दौरा किया था। उन्होंने वहां अपने समकक्ष से मुलाकात की और यूएई के राष्ट्रपति से भी मिले। खासकर हाल के संघर्ष के दौरान उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई का ध्यान रखने के लिए धन्यवाद दिया।
भारत सरकार ने 25 अप्रैल को ईरानी कोस्ट गार्ड की ओर से टोगो के झंडे वाले जहाज पर फायरिंग की जानकारी दी है। इस जहाज में कुछ भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। सरकार के अनुसार चेतावनी के तौर पर ये गोलीबारी की गई थी। सोमवार को, पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक मनदीप सिंह रंधावा ने इसकी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, ओमान के शिनास आउटर पोर्ट के पास से कई जहाज गुजर रहे थे, इनमें से एक टोगो के झंडे वाला केमिकल टैंकर एमटी सिरोन भी था। इन जहाजों को रोकने की कोशिश की गई और चेतावनी के तौर पर कुछ गोलियां चलाई गईं। मंत्रालय के मुताबिक सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। किसी भी भारतीय झंडे वाले जहाज को इस घटना से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े पक्षों के लगातार संपर्क में है। पिछले चौबीस घंटे में ऐसी कोई भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। सरकार ने बताया कि हालात पर नजर रखी जा रही है और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है।
वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के उन प्रयासों का जिक्र किया जिसके जरिए संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर भारत ने खाड़ी देशों के साथ अपने संपर्क और सहयोग को लगातार बढ़ाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने 25 और 26 अप्रैल को संयुक्त अरब अमीरात की आधिकारिक यात्रा की। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति से मुलाकात की, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री का संदेश और शुभकामनाएं पहुंचाईं।'
ईरान के कोस्ट गार्ड ने 25 अप्रैल को ओमान के शिनास आउटर पोर्ट के पास टोगो के झंडे वाले केमिकल टैंकर 'एमटी सिरोन' पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। इस टैंकर पर भारतीय नाविकों सहित कई लोग सवार थे। यह जानकारी सोमवार को पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने दी। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक मंदीप सिंह रंधावा ने एक बैठक में बताया कि जहाज दूसरे जहाजों के पास था, तभी ईरानी कोस्ट गार्ड ने दखल दिया और चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। उन्होंने कहा कि मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (एमईए), भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ मिलकर लगातार संपर्क में है, ताकि नाविकों की सुरक्षा बनी रहे और कामकाज प्रभावित न हो। रंधावा के मुताबिक, डीजी शिपिंग का कंट्रोल रूम अब तक 7,780 कॉल और 16,650 ईमेल संभाल चुका है। वे 2,770 भारतीय जहाजों के संपर्क में हैं, जिनमें से 12 ने हालात की जानकारी दी है। हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है।
इस्राइल का सैन्य खर्च 4.9 फीसदी घटकर 48.3 अरब रुपये हो गया। यह 2024 की तुलना में कम तीव्र लड़ाई वाले वर्ष को दर्शाता है, क्योंकि इस्राइल ने नवंबर 2024 में लेबनान और अक्तूबर 2025 में गाजा में युद्धविराम किया था। ईरान का खर्च 5.6 फीसदी घटकर 7.4 अरब रुपये हो गया। सिपरी ने इसका कारण मुद्रास्फीति और व्यापक आर्थिक दबाव बताया है। सिपरी शोधकर्ता जुबैदा करीम ने कहा कि ईरान अपनी सेना को वित्तपोषित करने के लिए बजट से बाहर के तेल राजस्व का भी उपयोग करता है।
फारस की खाड़ी में करीब 20,000 नाविक हफ्तों से फंसे हुए हैं। वे सैकड़ों जहाजों पर सवार हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में असमर्थ हैं। इस बीच, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पश्चिम एशिया में सैन्य खर्च स्थिर रहा। इन जहाजों में तेल और गैस टैंकर तथा मालवाहक जहाज शामिल हैं। सामान्य तौर पर, दुनिया के एक-पांचवें तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन इस जलमार्ग से होता है। लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, 13 से 19 अप्रैल के सप्ताह में लगभग 80 जहाज जलडमरूमध्य से गुजरे। युद्ध से पहले प्रतिदिन लगभग 130 या अधिक जहाज गुजरते थे। युद्ध शुरू होने के बाद दर्जनों जहाजों पर हमला हुआ है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कम से कम 10 नाविक मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह युद्धविराम अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था। फिर भी अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी। जवाब में, ईरान ने जलडमरूमध्य में जहाजों पर गोलीबारी की और दो जहाजों को जब्त कर लिया।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची पाकिस्तान के दौरे के बाद ओमान पहुंचे। अराघची ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल और विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी से मुलाकात की। इसके बाद अब ईरानी विदेश मंत्री रूस के लिए रवाना हो गए। अराघची ने ओमान के नेतृत्व से होर्मुज संकट को लेकर भी चर्चा की। रूस की सरकारी मीडिया ने बताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मिलने की योजना बना रहे हैं। रूस और तेहरान पर पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंध लगे हैं।
अराघची ने ओमान के सुल्तान से मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर लिखा, 'ओमान में हमारे मेजबान का शुक्रिया। दोनों देशों के मामलों और इलाके के डेवलपमेंट पर जरूरी बातचीत हुई। होर्मुज स्ट्रेट के तटीय देश होने के नाते, हमारा ध्यान सुरक्षित ट्रांजिट सुनिश्चित करने के तरीकों पर था, जिससे सभी प्यारे पड़ोसियों और दुनिया को फायदा हो। हमारे पड़ोसी हमारी प्राथमिकता हैं।'
इसके अलावा, ओमान के विदेश मंत्री ने अराघची से मुलाकात को लेकर लिखा, 'ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अराघची के साथ होर्मुज स्ट्रेट पर अच्छी चर्चा हुई। तटीय देशों के तौर पर, हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपनी साझा जिम्मेदारी और बहुत लंबे समय से बंधक बनाए गए नाविकों को रिहा करने की तत्काल मानवीय जरूरत को समझते हैं। नेविगेशन की स्थायी आजादी सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज्यादा डिप्लोमेसी और प्रैक्टिकल समाधानों की जरूरत है।'
बता दें, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब भी जारी है। हालांकि, सीजफायर को लेकर बातचीत की कवायद तेज है, लेकिन ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से सीधा इनकार कर दिया है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता में ये बातचीत हो रही है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची पाकिस्तान समेत तीन देशों की यात्रा पर निकले हुए हैं। पाकिस्तान के बाद वह ओमान पहुंचे और अब रूस में उनकी यात्रा का आखिरी पड़ाव है।
ईरान ने अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्ध खत्म करने का एक नया प्रस्ताव दिया है। हालांकि इस नए प्रस्ताव में परमाणु मुद्दे का कोई जिक्र नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे को बातचीत को अगले चरण के लिए टाल दिया गया है। इस रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी और मामले से जुड़े दो सूत्रों का हवाला दिया गया है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक, इस प्रस्ताव का मकसद बातचीत में मौजूदा रुकावट को खत्म करना और ईरानी नेतृत्व के अंदर न्यूक्लियर रियायतों के दायरे को लेकर चल रही असहमति को बाईपास करना है।
रिपोर्ट में कहा गया है, 'यदि ब्लॉकेड को हटाया जाता है और हमले पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं तो यूरेनियम संवर्धन के स्टॉक को हटाने और भविष्य में संवर्धन रोकने को लेकर ईरान के साथ किसी भी बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप का असर खत्म हो जाएगा। ट्रंप का ईरान पर हमला करने का यही मकसद रहा है।' इस बीच, तीन अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति सोमवार को अपनी शीर्ष राष्ट्रीय और विदेश नीति टीम के साथ लड़ाई पर सिचुएशन रूम मीटिंग कर सकते हैं।
सूत्रों ने एक्सियोस को बताया कि ट्रंप की टीम बातचीत में रुकावट और अगले संभावित कदमों पर चर्चा करेगी। रविवार को फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह ईरान के तेल एक्सपोर्ट को रोकने के लिए नेवल ब्लॉकेड जारी रखना चाहते हैं, जिसका मकसद आने वाले समय में तेहरान को हार मानने पर मजबूर करना है। ट्रंप के फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू के हवाले से कहा गया, 'जब आपके सिस्टम से बहुत ज्यादा तेल बह रहा हो और अगर किसी वजह से सप्लाई लाइन बंद हो जाती है और तेल को कंटेनरों या जहाजों में नहीं भरा जा सकता तो ज्यादा दबाव के कारण पाइपलाइन अंदर से फट सकती हैं। ऐसी स्थिति बनने में केवल तीन दिन लग सकते हैं।'
ईरान और अमेरिका के मध्य तनाव कम करने के उद्देश्य से पाकिस्तान की मध्यस्थता में युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर वार्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। इस दीर्घकालिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान ने स्वयं को एक मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान इस राजनयिक पहल के माध्यम से न केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को सुधारने का प्रयास कर रहा है, बल्कि उसे इस प्रक्रिया के बदले आर्थिक सहायता मिलने की भी प्रबल संभावना है। हालांकि, इन प्रयासों के बीच ईरान के भीतर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर विश्वसनीयता का संकट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ईरान के सांसद और 'राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग' के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने भी पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए उसकी निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया है।
रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान हमारा अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए सही मध्यस्थ नहीं है और उसमें मध्यस्थता के लिए जरूरी विश्वसनीयता नहीं है। वे हमेशा ट्रंप के फायदों का ध्यान रखते हैं और अमेरिकियों की मर्जी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहते।'
ईरानी नेता ने आगे कहा, 'उदाहरण के लिए, वे दुनिया को यह बताने को तैयार नहीं हैं कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान का प्रस्ताव मान लिया था लेकिन फिर अपनी बात से मुकर गया। वे यह नहीं कहते कि लेबनान या ब्लॉक किए गए एसेट्स के मुद्दे पर अमेरिकियों ने कमिटमेंट किए थे लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। एक मीडिएटर को बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए, हमेशा एक तरफ नहीं झुकना चाहिए।" पाकिस्तान का झुकाव इस स्थिति में अमेरिकी की तरफ साफ जाहिर है। इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला, जब दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के लिए सीजफायर की घोषणा की गई थी। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के एक्स हैंडल पर जो पोस्ट किया गया, उसमें लिखा था, 'ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का मैसेज।'
हालांकि इस पोस्ट को एडिट कर दिया गया था, लेकिन एडिटेड हिस्ट्री से इसका खुलासा हो गया। इससे एक बात साफ हो गई थी कि पाकिस्तान के पीएम के एक्स हैंडल पर जो भी पोस्ट किया गया, उसमें शब्द किसी और के थे, बस आवाज पाकिस्तानी पीएम की थी। इस पोस्ट के बाद ये अटकलें और तेज हो गई कि पाकिस्तान अमेरिका के इशारे पर मध्यस्थता का काम कर रहा है।
लेबनान के हथियारबंद समूह हिजबुल्ला ने इस्राइली सैनिकों और इस्राइली सेना के वाहनों को निशाना बनाने का दावा किया है। हिजबुल्ला ने कहा कि दक्षिणी लेबनान के बाहरी इलाके तेल अल नहास में इस्राइली सैनिकों को निशाना बनाया गया। हालांकि अभी तक इस्राइली सेना की तरफ से इसे लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
ईरान इस्राइल युद्ध के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राइल से मदद मांगी थी। एक्सियोस की रिपोर्ट में इस्राइली और अमेरिकी सूत्रों के हवाले से ये दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात की अपील पर इस्राइल ने अपना आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम यूएई की मदद के लिए भेजा था। इतना ही नहीं आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम संचालित करने के लिए इस्राइली सैनिक भी भेजे गए थे। इस्राइली आयरन डोम ने ईरान की तरफ से दागी गई अधिकतर मिसाइलों और रॉकेट को इंटरसेप्ट कर लिया था, लेकिन कुछ रॉकेट और मिसाइल रिहाइशी इलाकों में गिरे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने इस्राइली पीएम नेतन्याहू को फोन कर मदद मांगी थी। इसके बाद नेतन्याहू ने इस्राइली सेना को आयरन डोम बैट्री और इंटरसेप्टर्स यूएई भेजने का आदेश दिया था।
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार को इस्लामाबाद से रूस की राजधानी मॉस्को के लिए रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने ओमान का दौरा किया था। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों का पाकिस्तान दौरा अचानक रद्द कर दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने शांति के लिए कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो उसे बस फोन करने की जरूरत है। ट्रंप ने बताया कि ईरान ने बहुत कुछ देने का वादा किया, लेकिन वह काफी नहीं था। दिलचस्प बात यह है कि दौरा रद्द होने के 10 मिनट के भीतर ही ईरान ने एक नया और बेहतर प्रस्ताव भेजा। ट्रंप ने साफ कर दिया कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को यह गारंटी देनी होगी कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
पश्चिम एशिया मे जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मस्कट में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इसमें अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे युद्ध के बीच सुरक्षित समुद्री पारगमन सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज तटवर्ती देशों के बीच सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस्राइल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के 'हथियार भंडारण केंद्रों' पर हमला किया
कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जासिम अल-थानी ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला अल सऊद से फोन पर बात की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय घटनाक्रमों, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम (ceasefire) की समीक्षा की।
दोनों पक्षों ने क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए तनाव कम करने के प्रयासों पर विचार किया। कतर के प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि सभी पक्षों को मध्यस्थता की कोशिशों का सकारात्मक जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीकों और बातचीत से संकट की असली वजहों को सुलझाना जरूरी है। इससे एक टिकाऊ समझौता हो सकेगा जो भविष्य में दोबारा तनाव बढ़ने से रोकेगा।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि रविवार को देश के दक्षिणी हिस्से में हुए इजरायली हमलों में 14 लोगों की मौत हो गई। यह घटना इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध में हाल ही में बढ़ाई गई संघर्ष-विराम (सीजफायर) अवधि के बावजूद हुई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मृतकों में दो महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं, और इसके अलावा 37 अन्य लोग घायल हुए हैं।