अमेरिका जल्द ही रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाला है। बाइडन प्रशासन ने कहा है कि नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन पर जल्द ही सख्त प्रतिबंधों का एलान किया जाएगा। इसके तहत रूस के साथ-साथ इस पाइपलाइन को बनाने वाली कंपनी पर भी पाबंदियां लगाई जाएंगी।
यूक्रेन संकट को लेकर यूएनजीए में बैठक जारी है। इसमें यूक्रेन के साथ-साथ रूस की तरफ से भी बयान जारी किया गया। रूसी राजदूत ने कहा कि इस मामले में संयुक्त राष्ट्र की दखलअंदाजी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन लगातार रूस विरोधी होता जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन नरसंहार को ्अंजाम दे रहा है और इसलिए रूस चुप नहीं बैठ सकता।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा है कि तुर्की यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ मास्को के कदमों को मान्यता नहीं देता है। तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि एर्दोआन ने बुधवार को पुतिन के साथ टेलीफोन पर बातचीत में यूक्रेन में संकट के राजनयिक समाधान का आग्रह किया। बयान में कहा गया है कि नाटो का सदस्य और काला सागर क्षेत्र में रूस का पड़ोसी देश तुर्की यूक्रेन संकट का वार्ता के जरिए समाधान चाहता है। तुर्की के राष्ट्रपति ने दोशों देशों के बारे में कहा, ‘‘हमारे लिए इनमें से किसी एक को छोड़ना संभव नहीं है।’’
इटली ने बुधवार कहा कि यूक्रेन के प्रति आक्रामक रवैये के लिए रूस के खिलाफ क्रमिक, व्यवस्थित तरीके से पाबंदी लगाने की जरूरत है और यह हालात के आधार पर ही होना चाहिए। इटली के विदेश मंत्री लूईजी दे मयों ने इतालवी सीनेट में रूस को लेकर इटली के रुख पर कुछ नहीं कहा। रूस इटली को उसकी जरूरत की 40 प्रतिशत गैस की आपूर्ति करता है। मयों ने उल्लेख किया कि यूक्रेन से होकर गुजरने वाली पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि ‘‘टकराव से बचने की यह भी एक वजह है।’’ इटली यूक्रेन को असैन्य सहायता में 12.5 करोड़ डॉलर प्रदान करने पर विचार कर रहा है। यूक्रेन के सशस्त्र बलों को गैर-घातक उपकरणों की आपूर्ति के साथ बारूद सुरंग हटाने के साजो-सामान आपूर्ति करने की भी योजना है।
रूस के चलते संकट का सामना कर रहे यूक्रेन की सरकारी, विदेश मंत्रालय और राज्य सुरक्षा सेवा की वेबसाइट बुधवार को डाउन हो गई। इसे लेकर यूक्रेन की सरकार ने इसे एक और बड़ा साइबर अटैक बताया है जो दोपहर बाद चार बजे के आस-पास शुरू हुआ। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि इस सप्ताह हमने ऑनलाइन चेतावनी देखी थी कि हैकर्स सरकारी एजेंसियों, बैंकों व रक्षा क्षेत्र पर बड़ा साइबर हमला करने की तैयारी में थे। ऐसे कई हमलों का सामना करने वाले यूक्रेन ने इसके लिए रूस को जिम्मेदार बताया है। साइबर हमलों पर क्या बोला रूस, पढ़ें पूरी खबर...
यूक्रेन के साथ रूस के सैन्य टकराव को लेकर ब्रिटेन ने मॉस्को पर कड़े प्रतिबंध लगाने का जो वादा किया था, उसे लेकर सहयोगी देशों ने निराशा जताई है। ब्रिटेन ने पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों के कब्जे वाले दो क्षेत्रों की स्वतंत्रता को रूस द्वारा मान्यता देने की घोषणा करने के बाद तीन धनी रूसियों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया है और पांच रूसी बैंकों पर प्रतिबंध लगाया है। जॉनसन ने कहा कि अगर रूस ने पूर्ण स्तर पर आक्रमण किया तो और अधिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। लेकिन उनके सहयोगियों का कहना है कि मौजूदा प्रतिबंध बहुत कम हैं तथा आगे के प्रतिबंध लगाने में बहुत देर हो जाएगी। विपक्षी लेबर पार्टी के नेता केर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री से बुधवार को सवाल किया, ‘‘अभी नहीं तो कब?’’ कंजरवेटिव सांसद लैन डंकन स्मिथ ने कहा, ‘‘यदि हम उन पर प्रतिबंध लगा कर चोट करने जा रहे हैं तो हमे उन पर कड़े प्रतिबंध लगाने और अभी चोट करने की जरूरत है।’’
रूस-यूक्रेन के तनाव के बीच यूरोपियन यूनियन ने गुरुवार को सभी यूरोपीय देशों के राष्ट्राध्यक्षों की आपात बैठक बुलाई है। बताया गया है कि इसमें रूस पर लगने वाले प्रतिबंधों को अंतिम रूप दिया जाएगा। ईयू की तरफ से सदस्य देशों को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि रूस ने यूक्रेन की स्वायत्ता पर हमला कर अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़े हैं और उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।
यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया से अपील की कि वे रूस को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन को लेकर बयान दिया, वह काफी डरावना था। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के पास मौजूदगी का ही कोई अधिकार नहीं है। यह काफी भड़काऊ भाषण था। कुलेबा ने कहा, "हम इतिहास के काफी अहम मोड़ पर हैं और यहां हुआ घटनाक्रम हमारा भविष्य तय करेगा। हम उस तरह की गलतियां नहीं दोहरा सकते, जैसे नेताओं ने विश्व युद्ध को भड़काने के दौरान की थीं।"
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी रूस-यूक्रेन संकट पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस वक्त जोखिम से गुजर रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच के तनाव को जल्द से जल्द खत्म करने की मांग की।
यूक्रेन और रूस के बीच जारी विवाद को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अहम बैठक शुरू हो चुकी है। बैठक के दौरान दोनों देशों के मौजूदा हालात को लेकर चर्चा जारी है। रूस के उठाए कदमों पर भी बहस की जा रही है।
चीन ने अमेरिका पर यूक्रेन संकट को लेकर भय और दहशत पैदा करने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बुधवार को कहा कि चीन रूस पर नए प्रतिबंधों का विरोध करता है और चीन के पुराने रूख को दोहराता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सीमाओं के आसपास रूसी सैनिकों की तैनाती और आक्रमण की आशंका के जवाब में अमेरिका कीव को हथियार प्रदान करके तनाव बढ़ा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीन-रूस के संबंध और करीब आए हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस महीने की शुरुआत में बीजिंग में वार्ता के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मेजबानी की थी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि यूक्रेन पर अगर रूस धावा बोलता है, तो वे यूक्रेनी सेना को सैन्य मदद भिजवाएंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को बचाव के हथियार और आर्थिक मदद दी जाएगी। इस मुद्दे पर यूके की लेबर पार्टी ने भी सरकार का साथ दिया और रूस पर एक साथ प्रतिबंधों के एलान की मांग की।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडाइमिर जेलेंस्की ने रूस की आक्रामकता और यूरोपीय देशों की कार्रवाई को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में यूक्रेन के जो हालात होंगे, उन्हीं से यूरोप की सुरक्षा का भविष्य तय होगा। इसी के साथ जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों और रूस से मांग की कि वे यूक्रेन को स्पष्ट और तुरंत सुरक्षा से जुड़े आश्वासन दें। यूक्रेन के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रूस ने यूक्रेन स्थित अपने सभी राजनयिक प्रतिष्ठानों से कर्मियों को निकालना शुरू कर दिया। मॉस्को का कीव में दूतावास है और खार्किव, ओडेसा तथा ल्वीव में वाणिज्य दूतावास हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बुधवार को रूस की दो-दिवसीय यात्रा पर रवाना हो गए। यूक्रेन संकट के बीच इमरान के इस दौरे पर दुनियाभर की निगाहें हैं। बताया गया है कि अपने दौरे में वह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत करेंगे और प्रमुख क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचारों के आदान-प्रदान के अलावा ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे। पाकिस्तान के किसी प्रधानमंत्री की पिछले 23 साल में रूस की यह पहली यात्रा है।
रूस-यूक्रेन के बीच टकराव से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और तरलीकृत गैस (एलएनजी) के दाम में तेज उछाल आ सकता है। इसका ऊर्जा आयातक देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साख निर्धारण और शोध से जुड़ी कंपनी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने बुधवार को यह चेतावनी दी। मूडीज इनवेस्टर सर्विस के प्रबंध निदेशक माइकल टेलर ने कहा कि आयात की स्थिति में बदलाव से व्यापार पर असर दिख सकता है। हालांकि, मध्य एशिया में जिंस उत्पादक देशों के पास चीन को आपूर्ति बढ़ाने का विकल्प हो सकता है। आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी बाधाएं बढ़ेंगी और इससे क्षेत्र में मुद्रास्फीतिक दबाव बढ़ेगा। हाल के दिनों में यूक्रेन और रूस के बीच तनाव बढ़ा है। रूस ने सोमवार को पूर्वी यूक्रेन के अलगावादियों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता दे दी और वहां रूसी सेना तैनात कर दी।
यूरोपीय देशों के संगठन यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने यूक्रेन संकट के बीच रूस पर जिन प्रतिबंधों के एलान का फैसला किया है, उनमें रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु, रूसी एयरफोर्स के कमांडर-इन-चीफ और ब्लैक सी के जहाजी बेड़े के प्रमुख कमांडर पर पाबंदियां शामिल हैं। बताया गया है कि इन प्रतिबंधों पर यूरोप के नेता जल्द ही हस्ताक्षर कर सकते हैं। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह अमेरिका और ब्रिटेन से भी ज्यादा सख्त पाबंदियां होंगी।
यूक्रेन संकट पर भारत के ‘स्वतंत्र रूख’ का स्वागत करते हुए रूस ने बुधवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर उसके (भारत के) विचार दोनों देशों के विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक गठजोड़ को प्रदर्शित करता है। रूसी मिशन के उप प्रमुख रोमन बाबूश्किन ने कहा ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उसने वैश्विक मामलों में ‘स्वतंत्र एवं संतुलित’ रूख अख्तियार किया है। ऑनलाइन माध्यम से मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत के स्वतंत्र रूख का स्वागत करते हैं जो उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो बार व्यक्त किया।’’
यूक्रेन में रह रहे लोगों ने रूस के हमले के खतरे के बीच सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। यूक्रेनी नागरिकों ने युद्ध और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विरोध में नारे लगाए और पोस्टरों का प्रदर्शन किया।
यूक्रेन के मुद्दे पर रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बुधवार को कहा कि भारत नियम आधारित व्यवस्था में विश्वास करता है और मानता है कि सभी पक्षकारों को एक दूसरे से संवाद करना चाहिए। लेखी ने कहा, ‘‘भारत नियम आधारित व्यवस्था में विश्वास करता है। हम सभी जगहों पर सौहर्द और शांति की प्रार्थना करते हैं । हमारा कहना है कि सभी पक्षकारों को एक दूसरे के साथ संवाद करना चाहिए।’’
यूक्रेन से जो भारतीय छात्र लौटे हैं, उनमें से अधिकतर वहां एमबीबीसी की पढ़ाई कर रहे हैं। हवाई अड्डे पर उतरने के बाद एमबीबीएस के 22 वर्षीय छात्र अनिल राप्रिया ने कहा, ‘‘मुझे अपने देश में लौटकर खुशी हो रही है। यूक्रेन में बदलते हालात के बीच भारतीय दूतावास ने हमें देश छोड़ने को कहा था, जिसके बाद मैं अभी भारत पहुंचा।’’ उधर एक और छात्र कीर्तन कलाठिया ने भारत लौटने के बाद हंसते हुए कहा, "हम यूक्रेन से सही सलामत लौटे, लेकिन एयरपोर्ट पर मीडियाकर्मियों ने हमें घेर लिया। इससे हमें थोड़ी चिंता हो गई।" वहीं, कृष राज ने कहा, ‘‘हम सभी चेरनिव्त्सी में बुकोविनियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी (बीएसएमयू) में पढ़ते हैं। हमने अपने कॉलेज के अधिकारियों को सूचित किया है कि हम जा रहे हैं और कक्षाएं अब ऑनलाइन होंगी। चेरनिव्त्सी में हालात ठीक हैं, क्योंकि यह सीमा क्षेत्र से काफी दूर है।’’
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलेडाइमिर जेलेंस्की ने बुधवार को रूसी सेना के हमले की आशंका के मद्देनजर पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया है। हालांकि, इमरजेंसी के दायरे से डोनेत्स्क और लुहांस्क को बाहर रखा गया है। माना जा रहा है कि यूक्रेनी सेना यहां अलगाववादियों को मुहंतोड़ जवाब देने की तैयारी कर चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र आम सभा यूक्रेन के इलाकों में उपजी अस्थाई परिस्थितियों को लेकर आज यानी बुधवार को वार्षिक चर्चा का आयोजन करेगा। इसमें रूस आर यूक्रेन मसले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
डोन्त्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र देश घोषित किए जाने के बाद आज दोनों की ओर से अधिकारिक मान्यता के लिए रूस में आवेदन भी कर दिया गया। दिल्ली में रूसी दूतावास के उप प्रमुख ने बताया कि डोन्त्स्क और लुहांस्क की ओर से आधिकारिक रूप से आवेदन किया गया है, लेकिन शुरू से ही अमेरिका ने यूक्रेन सेहित सोवियत संघ के देशों के घरेलू मामलों में दखल दी है।