प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच दिवसीय विदेश यात्रा के अंतिम चरण के तहत नॉर्वे का 'सफल' दौरा संपन्न कर इटली के लिए रवाना हो चुके हैं। ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंधों को 'ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के रूप में एक नई ऊंचाई दी गई। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान पीएम मोदी को भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने के लिए नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से भी नवाजा गया, जिसके बाद उन्होंने नॉर्वे के किंग हेराल्ड और अपने समकक्ष जोनास गहर स्टोर सहित अन्य नॉर्डिक नेताओं के साथ स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल विकास और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर बेहद फलदायी चर्चा की।
ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मुद्दों पर भारत और नॉर्डिक देशों के साझा और स्पष्ट दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में भारत और नॉर्डिक देश मिलकर एक 'नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था'पर जोर देते रहेंगे। यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, दोनों पक्ष जल्द से जल्द युद्धविराम और शांति प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारा रुख बिल्कुल साफ और संयुक्त है, 'नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स' यानी कोई समझौता नहीं, कोई दोहरा मापदंड नहीं।
पीएम मोदी ने शोध, नवाचार और प्रतिभा को दोनों पक्षों के बीच साझेदारी का एक बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने घोषणा की कि इस रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए दोनों पक्ष मिलकर अपने विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के बीच संबंधों को नया विस्तार देंगे। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत और नॉर्डिक देश आर्कटिक और ध्रुवीय शोध के क्षेत्र में अपने सहयोग को और गहरा करेंगे, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों को समझने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए कौशल विकास और प्रतिभा के आदान-प्रदान के नए व बड़े अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे।
तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों पक्षों के बीच संबंधों को 'ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का नया रूप देने का ऐतिहासिक फैसला किया है। पीएम मोदी ने कहा कि इस साझेदारी के तहत नॉर्डिक देशों की अनूठी विशेषज्ञता को भारत के कौशल और प्रतिभा के साथ जोड़ा जाएगा। इसके जरिए आइसलैंड की जियोथर्मल व मत्स्य पालन, नॉर्वे की ब्लू इकॉनमी व आर्कटिक विशेषज्ञता, और सभी नॉर्डिक देशों की समुद्री व सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञता का लाभ भारत को मिलेगा। साथ ही, स्वीडन की एडवांस मैन्युफैक्चरिंग व रक्षा क्षेत्र, फिनलैंड की टेलीकॉम व डिजिटल टेक्नोलॉजी और डेनमार्क की साइबर सुरक्षा व हेल्थ टेक को भारतीय प्रतिभा से जोड़कर पूरी दुनिया के लिए भरोसेमंद समाधान विकसित किए जाएंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो सके।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि अपने संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, हमने हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण पहल की हैं। अक्टूबर 2025 से, हमने नॉर्वे, आइसलैंड और अन्य यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ देशों के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी को प्रभावी बनाया है। अभी कुछ महीने पहले ही, हमने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन भी भागीदार हैं। इस महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते के साथ, हम भारत और नॉर्डिक देशों के बीच संबंधों के लिए एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत करने जा रहे हैं।
ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि नॉर्डिक देशों के साथ संबंधों को रफ्तार देने के लिए आठ साल पहले इस प्रारूप की शुरुआत की गई थी, जिसके बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने विशेष रूप से आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 4 गुना बढ़ गया है, जबकि नॉर्डिक देशों से भारत में होने वाले निवेश में करीब 200% की भारी बढ़ोतरी हुई है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि नॉर्डिक देशों के निवेश कोष भारत की तीव्र विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भागीदार बन रहे हैं और इस बढ़ते व्यापार-निवेश ने न केवल भारत की तरक्की में योगदान दिया है, बल्कि नॉर्डिक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी बेहद सकारात्मक असर डालते हुए वहां हजारों नए रोजगार पैदा किए हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी को नमस्कार। मुझे आज तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल होकर बहुत खुशी हुई है। सबसे पहले, मैं इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने के लिए नॉर्वे के प्रधानमंत्री का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं। मैं यहां मौजूद सभी नॉर्डिक नेताओं का स्वागत करता हूं। लोकतंत्र, कानून का शासन और बहुपक्षवाद के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता हमें स्वाभाविक साझेदार बनाती है।
नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तीसरे नॉर्डिक-भारत शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। बैठक के बाद आयोजित एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। उन्होंने इस मुलाकात को वैश्विक स्तर पर बढ़ रही अनिश्चितताओं के बीच सहयोग का एक बड़ा माध्यम बताया। पीएम स्टोर ने कहा कि नॉर्डिक देशों और भारत के बीच भौगोलिक स्थिति, आकार और इतिहास के स्तर पर विभिन्नताएं जरूर हैं, लेकिन आज के समय के बड़े मुद्दों से निपटने के लिए हमारा दृष्टिकोण पूरी तरह से समान है। यह बैठक लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी सहयोग की भावना को मजबूती से प्रदर्शित करती है।
इस उच्च स्तरीय बैठक में अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे के कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से बातचीत हुई। नॉर्डिक नेताओं और पीएम मोदी ने वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और लगातार बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। शिखर सम्मेलन के दौरान आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के रोडमैप पर भी बात हुई। प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कहा कि भारत और ईएफटीए देशों के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते के बाद, अब हमारे पास आर्थिक रिश्तों को और अधिक गहरा करने का एक शानदार अवसर है। नेताओं ने सुरक्षा और व्यापार के विभिन्न पहलुओं पर बात की, ताकि इस समझौते का अधिकतम लाभ दोनों पक्षों को मिल सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस बैठक से भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्ते मजबूत हुए हैं। दोनों पक्षों ने टिकाऊ विकास और नवाचार पर चर्चा की। बातचीत में स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीकों पर मुख्य ध्यान दिया गया। सभी देश लोकतांत्रिक मूल्यों और मानव-केंद्रित विकास के लिए एकजुट हैं। यह साझेदारी आने वाले समय में एक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य का निर्माण करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने विज्ञान और तकनीक साझेदारी को मजबूत करते हुए पांच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते ग्रीन एनर्जी, सतत विकास, समुद्री तकनीक, नवाचार और भू-विज्ञान सहयोग जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग मजबूत करना, उद्योग और स्टार्टअप भागीदारी बढ़ाना, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और सतत विकास परियोजनाओं को तेजी देना है।
सबसे अहम समझौतों में से एक डीएसआईआर/सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) और नॉर्वे की रिसर्च काउंसिल ऑफ नॉर्वे (आरसीएन) के बीच हुआ, जिसके तहत रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इनोवेशन और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाया जाएगा। समझौते में संयुक्त कार्यशालाएं, रिसर्च एवं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, वैज्ञानिकों के एक्सचेंज प्रोग्राम और जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की व्यवस्था शामिल है।
इसके अलावा, सीएसआईआर ने नॉर्वे की प्रमुख स्वतंत्र रिसर्च संस्था एसआईएनटीईएफ के साथ 2026-2029 के लिए एक नया सहयोग समझौता भी किया। यह साझेदारी सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी ट्रांजिशन पर केंद्रित होगी, जिसके तहत बायो-बेस्ड मैटेरियल, ओशन एनर्जी, ऑफशोर विंड, कार्बन कैप्चर, स्टोरेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च और इनोवेशन कार्यक्रम चलाए जाएंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण समझौते के तहत कई सीएसआईआर संस्थानों ने एसआईएनटीईएफ संस्थाओं के साथ समुद्री ऊर्जा और ऑफशोर विंड एनर्जी तकनीकों पर प्रोजेक्ट आधारित सहयोग समझौता किया।
इस सहयोग में सीएसआईआर-स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर, सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज, सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी और सीएसआईआर-फोर्थ पैराडाइम इंस्टीट्यूट शामिल हैं। वहीं नॉर्वे की ओर से एसआईएनटीईएफ ओशन, एसआईएनटीईएफ डिजिटल, एफएमई नॉर्थविंड और एसआईएनटीईएफ कम्युनिटी इस साझेदारी का हिस्सा होंगे। इस संयुक्त कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की ऑफशोर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को मजबूत करना और देश के नवीकरणीय ऊर्जा तथा कार्बन न्यूट्रैलिटी लक्ष्यों को समर्थन देना है। इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लोटिंग ऑफशोर विंड टेक्नोलॉजी, ऊर्जा लागत कम करना, सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड, ईएसजी फ्रेमवर्क, पायलट प्रोजेक्ट, स्किल डेवलपमेंट और औद्योगिक विकास पर काम किया जाएगा।
इस पहल के लिए सीएसआईआर लगभग 3.41 करोड़ रुपए की फंडिंग सहायता देगा। इसके अलावा, "ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार सहयोग" शीर्षक से एक संयुक्त घोषणा पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सीएसआईआर, एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) और नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनटीएनयू) के बीच हुआ। इस घोषणा पत्र में सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकोनॉमी, ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इसके तहत छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त रिसर्च गतिविधियां, अकादमिक सेमिनार और साझा शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-स्वीडन साझेदारी इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि सरकारों, उद्योगों, इनोवेटर्स और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से औद्योगिक परिवर्तन को आगे बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने एक प्रभावशाली लेख लिखा है, जिसमें टिकाऊ विकास, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार आधारित प्रगति को लेकर दोनों देशों की साझा सोच को सामने रखा गया है।
'भारत और स्वीडन: विकास, लचीलापन और स्थिरता एक साथ हासिल करना…' शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया है कि मौजूदा समय में दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा असुरक्षा और आर्थिक विभाजन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में देशों के सामने दो विकल्प हैं—या तो वे केवल अपने सीमित राष्ट्रीय हितों तक सिमट जाएं या फिर ऐसे वैश्विक सहयोग को मजबूत करें जो विकास, स्थिरता और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित कर सके। लेख में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद की अहमियत पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गई है। साथ ही, वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत भी महसूस की जा रही है ताकि वे वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप काम कर सकें।
लेख में आगे कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिसका असर भारत, स्वीडन समेत सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाज पर पड़ रहा है। हालांकि, जलवायु कार्रवाई को विकास की जरूरतों से अलग नहीं किया जा सकता। इसमें कहा गया कि दुनिया भर में अरबों लोग बेहतर जीवन स्तर, रोजगार, आधुनिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा तक पहुंच की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना ही आज की सबसे बड़ी आर्थिक और राजनीतिक आवश्यकता बन गया है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू से मुलाकात की और दिल्ली के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को आसान बनाना दिल्ली के निरंतर विकास के लिए सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे दौरे पर आज फिनलैंड के पीएम के साथ द्विपक्षीय बैठक की। आज पीएम मोदी भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे दौरे पर हैं और उनके इस दौरे पर भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा भारत-नॉर्वे संबंधों में एक अहम मील का पत्थर साबित हुआ है। दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई है।
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 'तीसरा इंडिया-नॉर्डिक समिट 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडॉटिर और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन भी समिट में शामिल होंगे।'
इससे पहले इंडिया-नॉर्डिक सम्मेलन के दो समिट हो चुके हैं, जिनमें पहला साल 2018 में स्टॉकहोम में और दूसरा 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुआ था।। इसके जरिए भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों को और ज्यादा रणनीतिक रूप दिया जाएगा, खासकर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, ग्रीन ट्रांजिशन, रिन्यूएबल एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और आर्कटिक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद है।
इंडिया-नॉर्वे समिट में हुए शामिल
समिट से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को ओस्लो में इंडिया-नॉर्वे बिजनेस और रिसर्च समिट में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने भारत-ईएफटीए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में 50 से ज्यादा कंपनियों के सीईओ और भारत और नॉर्वे के बिजनेस और रिसर्च क्षेत्र से जुड़े 250 से अधिक लोग शामिल हुए। इस दौरान भारतीय और नॉर्वियन संस्थाओं के बीच कई कारोबारी समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को अपनी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में नॉर्वे पहुंचे। खास सम्मान दिखाते हुए नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे। भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर, नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गंगटे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी को नॉर्वे के विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को दिए जाने वाले सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया गया।