मध्य नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शनिवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 675 हो गई। वहीं, 2,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए जा चुके हैं। राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं और खराब मौसम के बीच लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने और नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए राहत एवं बचाव अभियान तेज करने की अपील की। खरगे ने कहा कि इस संकट की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मानवीय प्रतिक्रिया की जरूरत है। उन्होंने सरकार से नेपाल के लोगों तक हरसंभव राहत पहुंचाने के साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उनकी जल्द वापसी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इन लोगों की सुरक्षा और जल्द से जल्द देश वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। खरगे ने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल की जनता के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए। साथ ही, उन परिवारों की चिंता को भी समझना चाहिए जो अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि नेपाल में आई आपदा बड़े स्तर पर मानवीय संकट है और इससे निपटने के लिए भारत को अपनी ओर से हर संभव मदद उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नागरिकों के लिए रेस्क्यू और एवैक्यूएशन अभियान तेज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार के राहत प्रयासों के साथ-साथ फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित निकालना तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए।
नेपाल में कई भारतीय नागरिकों के अब भी संपर्क में नहीं आने के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर राहत और बचाव अभियान को और व्यापक बनाने की मांग की है। थरूर ने केंद्र से पूरी NDRF टीम और भारी क्षमता वाले हेलिकॉप्टर भेजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मलबे में अब भी लोगों के जीवित होने की संभावना को देखते हुए हर संभव संसाधन तुरंत इस्तेमाल किए जाने चाहिए। उन्होंने सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स को अर्थमूविंग मशीनों के साथ तैनात करने और भारत की ओर से पेश किए गए बेली ब्रिजों की मदद से पसांग ल्हामू हाईवे को फिर खोलने की मांग भी की।
थरूर के मुताबिक, विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि चीन की तरफ सैकड़ों अन्य लोग फंसे हुए हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं। कांग्रेस सांसद ने प्रभावित इलाकों में ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार, थर्मल इमेजिंग, प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और सैटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल की मांग की। उन्होंने तिमुरे से रसुवागढ़ी तक के क्षेत्र में लगातार और विशेष बचाव अभियान चलाने पर भी जोर दिया।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड से मची तबाही पर भारत ने चिंता जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि नेपाल के संकट को लेकर भारत भी चिंतित है और बाढ़ प्रभावित पड़ोसी देश को राहत सामग्री भेजी जा रही है। नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 669 हो गई है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि नेपाल इस संकट से अकेले नहीं जूझ रहा है। भारत हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है और राहत सामग्री लगातार भेजी जा रही है।
नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 669 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों की संख्या 2426 है। प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को 120 भारतीय नागरिक चीन से नेपाल पहुंचे। इसके साथ ही नेपाल में भारतीय नागरिकों से जुड़ी राहत और बचाव गतिविधियां जारी हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की छह टीमें शनिवार को काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है। ये टीमें मृतकों के अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल के विश्लेषण में मदद करेंगी। भारत की एक विशेष तकनीकी टीम सुरंग बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लेने के लिए पहले ही काठमांडू पहुंच चुकी है। टीम ने आज से प्रभावित क्षेत्र में काम शुरू कर दिया है। तकनीकी टीम की सिफारिश के आधार पर भारत की एक विशेष टनल रेस्क्यू टीम जरूरी उपकरणों के साथ नेपाल पहुंचने वाली है। यह टीम प्रभावित क्षेत्र में सुरंग से जुड़े बचाव अभियान में सहायता करेगी।
नेपाल में प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के बीच भारत ने चार और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 29 अगस्त 2026 को रासुवा स्थित एक जलविद्युत परियोजना से चार भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया गया। इनके जल्द ही काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है। रेस्क्यू किए गए भारतीय नागरिकों में रिपु कुमार, चनेश्वर नरजारी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिनहाजुद्दीन शामिल हैं।
कितने भारतीय अब भी लापता?
विदेश मंत्रालय के 29 अगस्त 2026 को शाम पांच बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक:
नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने कहा कि देश की तत्काल प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना और उन्हें तत्काल राहत प्रदान करना है। एक प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए उन्होंने बताया कि 187 विदेशी नागरिकों सहित 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है। फिर से बाढ़ आने की संभावनाओं और चिंताओं को देखते हुए खनाल ने कहा कि जोखिम पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र "उच्च सतर्कता" पर है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने का एकमात्र तरीका हेलीकॉप्टर है। कुछ भूभाग "दलदली भूमि" में बदल गया है, जिसका मतलब है कि हेलीकॉप्टर वहां उतर नहीं सकते।
नेपाली सेना ने कुछ स्थलों से श्रमिकों को बचाया, लेकिन त्रिशुली गलियारे में स्थित परियोजनाओं में पहुंच अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। भोटेकोशी बाढ़ के बाद पनबिजली सुरंगों में सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है। नेपाली सेना के जवान भोटेकोशी बाढ़ के बाद रसुवा में एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को बचा रहे हैं। कीचड़ और मलबे के नीचे सैकड़ों जलविद्युत कर्मचारियों के सुरंगों और भूमिगत बिजली संयंत्रों में फंसे होने की आशंका है।
शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण काठमांडो में फंसे महाराष्ट्र के लगभग 100 तीर्थयात्रियों को बिहार सरकार ने सुरक्षित बाहर निकाला और ट्रेन से उनके गृह राज्य भेजा। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि यह बचाव कार्य महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध पर किया गया।
बयान में कहा गया, "बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर, सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने शुक्रवार को तीर्थयात्रियों को नेपाल सीमा से सुरक्षित सीतामढ़ी पहुंचाया।" यह बचाव कार्य मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल की देखरेख में किया गया।
नेपाल के वित्त मंत्री ने अनुमान लगाया है कि विनाशकारी बाढ़ के बाद देश के पुनर्निर्माण के लिए 4 अरब डॉलर से 5 अरब डॉलर के बीच की राशि की जरूरत होगी। स्वर्णिम वागले ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि यह सिर्फ एक अनुमान है। नुकसान और क्षति का आकलन किया जा रहा है। गौरतलब है कि बाढ़ ने घरों को तबाह करने के साथ-साथ सड़कों और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नष्ट कर दिया है। जलविद्युत संयंत्र भी प्रभावित हुए हैं।
नेपाल के दक्षिणी मध्य तराई क्षेत्र के चितवन जिले के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से अब तक बरामद किए गए 233 शवों में से केवल चार की ही पहचान हो पाई है। चितवन जिला प्रशासन कार्यालय ने एक बयान में कहा, "स्वास्थ्य संस्थानों और नदी तटों से एकत्र किए गए शव/अवशेष सड़ने की अवस्था में हैं और अब उनकी पहचान करना संभव नहीं है।" अधिकारियों ने बताया कि शेष 229 शवों को हिरासत केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में रखा जा रहा है, और डीएनए के नमूने अभी भी एकत्र किए जा रहे हैं और उनका रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
नेपाल बाढ़ त्रासदी में अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों की संख्या 2426 है। प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
नेपाल बाढ़ त्रासदी में मरने वालों का आंकड़ा 616 पहुंच गया है। वहीं, लापता लोगों का आंकड़ा भी 2000 से ज्यादा हो गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सरकारी मीडिया ने बताया है कि तिब्बत में भूस्खलन के मलबे के बीच बनी झील में जलस्तर एक बार फिर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इसकी वजह से एक बार फिर से भूस्खलन या मिट्टी के खिसकने का खतरा लगातार बना हुआ है। वहीं, नेपाल में राहत एवं बचाव कार्य में जुटे खोज दल जीवित बचे लोगों को खोजने के लिए मौसम के अनुकूल सीमित समय का पूरा फायदा उठा रहे हैं। सड़क को दोबारा खोलने के प्रयास भी जारी हैं।
अचानक आई बाढ़ में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई और लगभग 2,000 अन्य लापता हो गए। इस बचाव अभियान में स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय दल शनिवार को नेपाल पहुंचा। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, चिकित्सा कर्मियों और सुरंग बचाव विशेषज्ञों सहित इस टीम को नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। टीम को हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।
बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में भीषण बाढ़ आई, जिसमें 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई और बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत अवसंरचना को व्यापक क्षति पहुंची। शुक्रवार को नेपाल ने कहा कि वह अपने सुरक्षा बलों की अधिकतम तैनाती को "प्राथमिकता" देना चाहता है, जो स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों और दुर्गम भूभाग से भलीभांति परिचित हैं। हालांकि, विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने कहा कि सरकार उन कठिन मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने के लिए तैयार है, जहां अत्यंत जटिल भौतिक संरचनाओं के लिए विशेष तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है।
त्रिशुली नदी में भारी बारिश के कारण मौसम की स्थिति बिगड़ने से बचाव अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। जानकारी के अनुसार खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण, आसपास के क्षेत्रों के लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
नेपाल ने अपना फैसला बदलते हुए बाढ़ राहत कार्यों के लिए विदेशी मदद लेने पर सहमति जताई है। जिन देशों के नागरिक लापता हैं, उन देशों के दबाव के कारण सरकार को अपने फैसले से पीछे हटना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि वे टनल में बचाव कार्य और शवों की पहचान में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद लेंगे। भोटेकोशी बाढ़ की कवरेज करने वाले विदेशी पत्रकारों के लिए नेपाल ने नए नियम लागू किए हैं। पत्रकारों को पासपोर्ट और वीजा, अपने संगठन द्वारा जारी पहचान पत्र, वेतन और भत्तों का विवरण आदि जमा करना होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच लापता हुए पश्चिम बंगाल के 39 पर्यटकों में से दो पर्यटकों से संपर्क स्थापित हो गया है, जबकि 37 लोग अब भी लापता हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार रात यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन दो पर्यटकों से संपर्क हुआ है, वे उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट उपमंडल के रहने वाले हैं।
शुक्रवार रात मुख्यमंत्री ने लापता पर्यटकों के परिजनों के साथ वर्चुअल बैठक की। यह बैठक दक्षिण कोलकाता स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय भवानी भवन में आयोजित की गई थी। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, "यह सिर्फ उन परिवारों का संकट नहीं है जिनके सदस्य नेपाल में लापता हैं। पूरा राज्य उनकी चिंता कर रहा है। हम सभी को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।"
नेपाल में मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) के प्रयास जारी हैं। भारतीय वायु सेना का एक सी-130 विमान प्रभावित लोगों की सहायता के लिए दवाओं और खाद्य पदार्थों सहित 10 टन आवश्यक राहत सामग्री लेकर रवाना हो गया है।
महाराष्ट्र के लोगों को भी सुरक्षित लौटाने के प्रयास जारी हैं। देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय से वीडियो साझा किया गया। नागरिकों से बात करते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के प्रयासों से लोगों को समय पर बचाया जा सका और कम समय में भारत वापसी संभव हो पाई। सरकार ने तत्काल सहायता सुनिश्चित की। नेपाल में फंसे लोगों ने वीडियो कॉल के दौरान सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार और का आभार व्यक्त किया।
तमिलनाडु के मंत्री नारायणसामी आनंद और मंत्री डी. सरथकुमार ने नेपाल में आई बाढ़ के बाद सुरक्षित लौटे 21 तीर्थयात्रियों के समूह का चेन्नई हवाई अड्डे पर स्वागत किया। दल में शामिल एक तीर्थयात्री ने बताया, जब हमारी वैन कहीं रुकी, तो हम बाढ़ और कीचड़ भरे पानी के तेज बहाव में फंस गए... पानी और मलबे का तेज बहाव रास्ते में आने वाले सभी वाहनों और अन्य चीजों को बहा ले जा रहा था... हमने वैन से बाहर निकलने की कोशिश की और 10 फीट दूर जाने का प्रयास किया... वहां से हमें हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर काठमांडू ले जाया गया। राज्य सरकार में शामिल एक अन्य मंत्री आनंद ने बताया कि लापता लोगों को सुरक्षित लाने के लिए सरकार तत्परता से काम कर रही है, समन्वय के लिए चार मंत्रियों को दिल्ली में रखा गया है।
नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद उत्तराखंड के निवासियों की सहायता के लिए प्रदेश की सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) में हेल्पलाइन नंबर पर कुल छह फोन कॉल आए हैं। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सरकार ने फोन पर मिली जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के साथ साझा कर दी है। एसईओओसी इस मामले में गृह मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स हैंडल पर जारी एक सूची में बताया है कि प्रदेश के 12 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनसे संपर्क नहीं हो सका है। इन लोगों का नेपाल में पता नहीं चल पाया है। सीएम सरमा के मुताबिक सरकार इन लोगों से संपर्क करने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के हरसंभव प्रयास कर रही है।
आंध्र प्रदेश के एक अन्य तीर्थयात्री गाडू वेंकटप्पा ने कहा, 21 तारीख की रात को हम विशाखापत्तनम से रवाना हुए। हम पहले दिल्ली गए और वहां से काठमांडू पहुंचे। मूल योजना के अनुसार, हमें अगले ही दिन काठमांडू से मानसरोवर यात्रा शुरू करनी थी। हालांकि, चीन सरकार से वीजा मिलने में देरी के कारण हमें काठमांडू में तीन दिन रुकना पड़ा। तीन प्रतिनिधि वीजा लेने के लिए दिल्ली में ही रुक गए, जबकि बाकी लोग काठमांडू में थे। दिल्ली में वीजा एक दिन पहले ही मिल गया था, लेकिन टिकट न मिलने के कारण हमारे दल के साथी सुबह 4:30 बजे की फ्लाइट से नहीं आ सके। फ्लाइट छूटने के बाद वे सुबह 8:00 बजे की फ्लाइट लेकर काठमांडू आए। अगर वे पहले आ जाते, तो हमें अपनी यात्रा सुबह 6:00 बजे के बजाय सुबह 3:00 बजे शुरू करनी पड़ती। अगर हम सुबह 3:00 बजे निकलते, तो हम ठीक उसी समय चीनी दूतावास के पास होते जब अचानक बाढ़ आई थी। ये बिल्कुल वही जगह है जहां सद्गुरु के अनुयायी और अन्य लोग थे। हम अपने निर्धारित कमरों के ठीक बगल में क्रमानुसार ठहरे रहे। अब सुरक्षित भारत लौटने के बाद एहसास हो रहा है कि सुबह जल्दी न उठने के कारण हम एक बड़ी मुसीबत से बच गए।
भारत से नेपाल जाने वाले जितने लोग जलप्रलय के बाद सुरक्षित लौट रहे हैं, वे ईश्वर का शुक्रिया अदा करने के साथ-साथ राहत की सांस ले रहे हैं। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम पहुंचे तीर्थयात्रियों के दल में शामिल गदा एलावेनी ने कहा, 'हमने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हमारे साथ होगा... हमें दर्शन तो नहीं मिले, लेकिन भगवान ने हमें सुरक्षित घर पहुंचा दिया। लगभग 80 किलोमीटर जाने के लिए हमने काठमांडू से तीन घंटे का सफर तय किया। जब हम चाय पीने के लिए रुके, तो हमसे आधे घंटे पहले निकली दो बसें बह गईं/लापता हो गईं। हम तीन बसों में यात्रा कर रहे थे, हम सभी सुरक्षित बच गए।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाले तरुण प्रकाश चौधरी ने बताया कि उनकी बहन डॉ. प्रियंका चौधरी नेपाल गई हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गईं प्रियंका के भाई ने कहा, नेपाल में बाढ़ के बाद हमें ईशा फाउंडेशन के माध्यम से पता चला कि वह लापता हैं। 25 अगस्त की शाम को उनसे बात हुई थी। माता-पिता बहुत चिंतित हैं। पूरा परिवार उनके लौटने का इंतजार कर रहा है।
नेपाल से लौटे तीर्थयात्रियों के लिए बिहार के सीतामढ़ी में भोजन का बंदोबस्त किया गया। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने 28 अगस्त की रात रक्षाबंधन के अवसर पर नेपाल से लौट रहे 106 तीर्थयात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया।
तमिलनाडु में रहने वाली कनागा सुंदरम्बल की पड़ोसी और उनकी महिला मित्र अरुलजोथी ने नेपाल की त्रासदी पर कहा, कनागा एक सरकारी अस्पताल में काम करती थीं और लगभग 30 वर्षों से हमारी करीबी पारिवारिक मित्र रही हैं... 15 अगस्त को मेरे पति ने ट्रेन का टिकट बुक कराया और उन्हें चेन्नई भेजा। वहां से वे आध्यात्मिक यात्रा पर नेपाल गईं। दो दिन पहले नेपाल में हुई दुर्घटना के बाद, हमने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन बंद या डिस्कनेक्ट होने के कारण हम उनसे संपर्क नहीं कर पाए। हम कल से उनकी बेटी से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें बताया गया कि वह काम के सिलसिले में विदेश गई हैं। हमारी एकमात्र कामना और प्रार्थना है कि वह सुरक्षित घर लौट आएं।
नेपाल के भीषण सैलाब के 72 घंटे बीतने के बाद भी भारत के कम से कम 320 नागरिकों का कोई पता नहीं चल पाया है। हर बीतते पल के साथ इनके जीवन की डोर भी क्षीण होती जा रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया सैलाब से इलाके की सड़कें ध्वस्त हो जाने के कारण मुश्किल जगहों पर फंसे 100 से अध भारतीयों तक राहत और बचाव दल पहुंच नहीं पा रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेपाल में फंसे भारतीयों के बचाव कार्य की समीक्षा की। उन्होंने नागरिकों को बचाने के लिए नेपाल सरकार काे धन्यवाद दिया आैर बचाकर लाए गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों से भेंट की। वहीं, नेपाल में 85 भारतीय पर्यटक भी बचाए गए हैं।
टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इन्फोसिस ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद उसकी सहयोगी कंपनी इन्फोसिस पब्लिक सर्विसेज के प्रमुख लैक्स गोपीशेट्टी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। गोपीशेट्टी निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे। हमारी पहली प्राथमिकता उनकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करना है।
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चीन ने बताया कि उसके 8 इंजीनियरों के दल ने झील का निरीक्षण कर आकलन किया कि इसमें 12 से 20 लाख घन मीटर पानी है। बाद में चीन ने अपने बचाव कर्मियों को सुरक्षित जगहों पर बुला लिया। चीन ने झील से पैदा खतरे को लेकर सबसे निचले लेवल का अलर्ट जारी किया है।
नेपाल के भोटेकोशी नदी में फिर सैलाब की आशंका से स्थानीय लोगों में दहशत है। लोगों ने ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। इस बीच, नेपाल में मरने वालों की संख्या 579 हो गई है। कम से कम 1,924 लोग लापता हैं, जिनमें 320 भारतीय हैं। दरअसल, चीन ने नेपाल को शुक्रवार को जानकारी दी कि भोटेकोशी नदी की दो सहायक नदियों पर ग्लेशियर टूटने से तिब्बत में जो नया झील बना था, उसमें रिसाव शुरू हो गया है। इससे भोटेकोशी में फिर पानी बढ़ने लगा। इससे रसुवा जिले के मुख्य जिलाधिकारी नरेंद्र परियार ने करीब 90 मिनट तक बचाव कार्य रोकने का आदेश दिया। परियार ने सभी नागरिकों, बचाव दलों से सुरक्षित जगहों पर पहुंचने की अपील की। इस अपील से दहशत में आए रसुवा और आसपास के लोग बचने के लिए पहाड़ियों की ओर भागते नजर आए। हालांकि देर रात तक स्थिति बिगड़ी नहीं थी।