77 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया ये अफसर, फफक कर रोया
शासन के आदेश पर मेरठ में शनिवार को 15 सदस्यीय विजिलेंस टीम ने शताब्दीनगर स्थित वन निगम ऑफिस में छापा मारा। इस दौरान टीम ने विभाग के डीएलएम नरेंद्र कुमार पाल को ठेकेदार से 77 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। विजिलेंस टीम ने परतापुर थाने में डीएलएम व शिकायतकर्ता ठेकेदार के मोबाइलों को अपने पास लेकर घंटों पूछताछ की।
शताब्दीनगर स्थित वन निगम कार्यालय में नरेंद्र कुमार पाल प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक (DLM) पद पर दो साल से तैनात है। बताया गया कि उनके अंडर में नौ जिलों का प्रभार था। नरेंद्र कुमार पाल द्वारा वन निगम के ठेकेदारों से रिश्वत मांगी जाती थी, जिसकी शिकायत शासन के बड़े अधिकारियों से की गई थी।
हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी को फटकार लगाते हुए मामले पर कार्रवाई कर कोर्ट को अवगत कराने के निर्देश दिए। इस पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी ने प्रबंध समिति को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। शुक्रवार शाम चार बजे प्रबंध समिति की बैठक हुई, जिसमें प्राचार्य के स्पष्टीकरण पत्र का संज्ञान लिया गया। प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्टीकरण अधूरा, भ्रामक व असंतोषजनक बताते हुए तत्काल प्रभाव से प्राचार्य को निलंबित कर दिया। समिति के निर्णय के अनुसार आरोपों की जांच प्रबंध समिति सचिव डॉ. ओपी अग्रवाल को सौंपी गई है। निलंबन अवधि में उन्हें वित्तीय हस्तपुस्तिका में उल्लेखित प्रावधानों के अनुरूप जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
562 दिन बाद भी नहीं दिए शैक्षिक प्रमाण
डॉ. एसएन शर्मा ने 20 अक्तूबर 2021 को प्राचार्य का पदभार संभाला था। 562 दिन पद पर रहते हुए भी उन्होंने अपने शैक्षिक प्रमाण पत्र आदि प्रबंध समिति को नहीं दिए। जबकि नियमानुसार ज्वाइनिंग के बाद शिक्षक या प्राचार्य को सभी शैक्षिक प्रमाण पत्र दिखाने होते हैं। यही वजह रही कि डॉ. एसएन शर्मा का परिवेक्षा काल एक साल और बढ़ाया गया। समिति ने अंतिम मौका देकर 15 दिन में प्रमाण पत्र देने के लिए तो डॉ. एसएन शर्मा ने कहा था कि लोक सेवा आयोग ने प्राचार्य बनाया है और प्रबंध समिति को प्रमाण पत्र देखने का अधिकार नहीं है।
मुझे बात रखने का मौका नहीं दिया : डॉ. शर्मा
निलंबित प्राचार्य डॉ. एसएन शर्मा का कहना है कि प्रबंध समिति मौका ढूंढ रही थी। साजिश के तहत उन्हें हटाया है। कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। बैठक में मुझे अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया और निलंबित कर दिया गया।