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MSME For Bharat: वन मंत्री ने कहा- सरकार ने दिया सुरक्षित माहौल, उद्यमी बोले- एमएसएमई को सशक्त बनाना जरूरी

Fri, 12 Sep 2025 07:34 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

MSME For Bharat Conclave In Bareilly: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। रोजगार सृजन, उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने में इनकी अहम भूमिका है। देश में नवाचार से औद्योगिक विकास और संभावित चुनौतियों पर मंथन के लिए शुक्रवार को बरेली के अर्बन हाट ऑडिटोरियम में अमर उजाला की ओर से एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। 

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वन मंत्री डॉ अरुण कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में शुक्रवार को अमर उजाला की ओर से एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, डीएम अविनाश सिंह और एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मंथन हुआ। कॉन्क्लेव में उद्योग, व्यापार और विकास के क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने शिरकत की। 

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वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार

वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार रहे मुख्य अतिथि 
एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव के पहले सत्र में मुख्य अतिथि वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर बरेली के सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एसएसपी अनुराग आर्य और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य मौजूद रहे। 


बरेली की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल

दूसरे सत्र में उद्यमी ने अपने विचार रेखे
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में 'कल के MSME' विषय पर चर्चा हुई। इसमें घनश्याम खडेलवाल (चेयरमैन, बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज), डॉ. अभिनव अग्रवाल (डायरेक्टर, रामा श्यामा पेपर्स) और डॉ. मनीष शर्मा (सृष्टि पूर्ति वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड) ने अपने विचार साझा किए। 


बरेली के डीएम अविनाश सिंह 

तीसरे सत्र में स्थानीय चुनौतियों और अवसर पर विमर्श हुआ। इसमें राजेश गुप्ता (प्रेसिडेंट, चेंबर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्री समिति), राजीव सिंघल (प्रेसिडेंट, चेंबर ऑफ कॉमर्स वेलफेयर एसोसिएशन), आशुतोष शर्मा (प्रेसिडेंट, लघु भारतीय उद्योग) और मयूर धीरवानी (प्रेसिडेंट, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) शामिल हुए। इस सत्र में MSME सेक्टर की समस्याओं जैसे वित्तीय संसाधनों की कमी, तकनीकी उन्नयन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के अवसर, तथा नीतिगत सुधारों पर गहन चर्चा की गई। 

एमएसएमई भारत - फोटो : Adobestock
क्या है कॉन्क्लेव का उद्देश्य?
इस कॉन्क्लेव में विशेषज्ञ भविष्य की फंडिंग व्यवस्था, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की नई रणनीतियों, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों और नवाचारी वित्तीय विकल्पों पर गहराई से चर्चा करेंगे। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और भारतीय एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के उपाय भी एजेंडे का हिस्सा होंगे।

विशेष ध्यान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना पर रहेगा, जिसके तहत हर जिले के खास उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य है। इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश का बरेली जिला विशेष महत्व रखता है। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे उपाय तलाशना है, जिससे बरेली जैसे जिलों के एमएसएमई अपने पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक मंच पर मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित कर सकें।

हस्तशिल्प कला के लिए प्रसिद्ध है बरेली
एमएसएमई सेक्टर में बरेली का विशेष योगदान है। यहां जारी-जरदोजी कढ़ाई, कैन फर्नीचर और बांस वर्क्स का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। यह क्षेत्र अपनी पारंपरिक हस्तशिल्प कला के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। सरकारी सहयोग के अंतर्गत ओडीओपी (जारी-जरदोजी ) और हस्तशिल्प क्लस्टर के माध्यम से स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को विकास के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्य एमएसएमई में जरी-जरदोजी कारीगर इकाइयां और बेंत शिल्प समूह प्रमुख हैं। यह पारंपरिक डिजाइन और आधुनिक तकनीक का मेल कर गुणवत्ता उत्पाद बना रहे हैं। बरेली की पहचान जरी-जरदोजी और कैन फर्नीचर के लिए की जाती है।

वीडियो के जरिए बताया अखबार का महत्व 
एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव के शुभारंभ से पहले वीडियो के जरिए अखबार का महत्व बताया गया। उन लोगों की कहानी दिखाई गई, जिन्होंने विपरीत हालात में संघर्ष कर सफलता का मुकाम पाया। जिसमें अखबार का अहम रोल रहा। 

दीप प्रज्जवलित कर कॉन्क्लेव का किया शुभारंभ 
बरेली के अर्बन हाट ऑडिटोरियम में अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव का शुभारंभ वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, सांसद छत्रपाल सिंह, डीएम अविनाश सिंह और एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़ी तमाम हस्तियां जुटी हैं। 

सुरक्षा के लिए पुलिस हमेशा तत्पर- एसपी साउथ 
कार्यक्रम ने सबसे पहले एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने संबोधित किया। एसपी साउथ ने कहा कि उद्यमी कारोबारी समाज के मूलभूत ढांचे के हिस्सा है। उद्योगों के विकास में सुरक्षा का अहम योगदान होता है। सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुलिस विभाग हमेशा तत्पर है। 

एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने कई प्रयास किए हैं। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत कई सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क और दुरुस्त किया गया है।   

एमएसएमई से 25.95 करोड़ लोगों को रोजगार- डीएम 
डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि इस वक्त की जरूरत के लिए मुताबिक क्रेडिट या लोन समय से मिल जाए तो रोजगार का सबसे बड़ा साधन बन सकता है। सिडबी के मुताबिक मांग व पूर्ति में 30 लाख करोड़ रुपये का अंतर है। डीएम ने कहा कि 6.2 करोड़ एमएसएमई 25.95 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया कराते हैं। 

डीएम अविनाश सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऋण देने की प्रक्रिया काफी जटिल- डीएम 
डीएम ने कहा कि बैंकों के ऋण देने की दस्तावेजी प्रक्रिया अभी भी काफी जटिल है। हम सबको इसे सरल बनाने का प्रयास करना है। कुछ दिनों पहले वित्त मंत्री ने कहा था कि किसी का सिविल स्कोर कितना भी खराब हो, अगर वह आपके पास लोन मांगने आ रहा है तो आप उसे मना नहीं कर सकते हैं। 

सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार - फोटो : अमर उजाला
सांसद ने उद्योगपतियों से उद्योग लगाने की अपील 
सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार ने एमएसएमई उद्योगपतियों से अपील की कि वे आगे आएं और उद्योग लगाएं, जो दिक्कत आएगी उसका समाधान करने का प्रयास करेंगे। एग्रीकल्चर से जुड़े प्रोडक्ट का रॉ मैटेरियल का उत्पादन बहेड़ी और आसपास के क्षेत्र में तेजी से बढ़ सकते हैं। इनसे जुड़े छोटे उद्योग भी बढ़ेंगे तो किसान की आमदनी बढ़ेगी। विद्युत, सड़कों का सुधार होगा।

वन मंत्री ने अमर उजाला के कार्यक्रम का सराहा 
मुख्य अतिथि वन मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने एमएसएमई विकास के लिए आयोजित अमर उजाला के कार्यक्रम को सराहा। उन्होंने कहा कि हमारे यहां सरकार के समक्ष 2047 तक देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। सभी का सहयोग जरूरी है तभी विकसित उत्तर प्रदेश बनेगा।
 

'प्रदेश में कानून का राज'
डॉ अरुण कुमार ने कहा कि अब उद्यमी, व्यापारी से वसूली खत्म हो गई है। जो पलायन हो था वह वापस आकर औद्योगिक करार कर रहे हैं। 18 लाख करोड़ रुपये के करार हो चुके हैं। प्रदेश में कानून का राज है। लोग मानते थे कि यहां अपराध के अलावा और कुछ भी नहीं। 

उन्होंने कहा कि उद्यमी का देश के विकास में अहम भूमिका है। ट्रांसपोर्ट से लेकर आर्थिक स्थिति पर देश को मजबूत करते हैं। जो बैंक उद्यमियों का सहयोग नहीं कर रहे, उनके यहां एफडी न कराएं ताकि उन्हें सबक मिल सके। 

कार्यक्रम के मंच पर अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला
यूपी की अर्थ व्यवस्था में एमएसएमई की भूमिका अहम 
डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि उद्यमियों की हर संभव मदद की जानी चाहिए। 2023 तक यूपी की इकोनॉमी वन ट्रिलियन का लक्ष्य है, जिसमें एमएसएमई की भूमिका अहम है। किसी कार्यालय में जाए तो उनका सम्मान होना चाहिए। उसकी सेवा का सम्मान होना चाहिए। 

देश में उद्यमी चला रहे 27 हजार कारखाने- वन मंत्री 
वन मंत्री ने कहा कि देश में 27 हजार कारखाने उद्यमी चला रहे हैं। नोएडा में एयरपोर्ट, रेलवे और एमएसएमई के कई उद्योग लगे। सेमी कंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बनेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ेगा, तभी प्रदेश बढ़ेगा। क्योंकि एक-एक करके ही देश बढ़ेगा। 
 

'युवाओं को सरकार दे रही लोन' 
डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार पांच लाख का लोन दे रही है। अफसरों से कहा कि बैंक से देखें कि लोन के आवेदन क्यों निरस्त हो रहे हैं जबरन बेवजह निरस्त करने पर उचित कार्रवाई भी होनी चाहिए। 

वन मंत्री ने अमर उजाला किया धन्यवाद 
उन्होंने कहा कि हाल में लोगों से राय मांगी जाएगी कि उत्तर प्रदेश को कैसे विकसित किया जाए। लोगों से भी इस मुहिम में सहयोग की अपील की। अमर उजाला का धन्यवाद कि उन्होंने ऐसा आयोजन किया। अमर उजाला ने शहर की सेवा की है और शहर के विकास में योगदान के लिए सराहा। उद्यमियों से समस्या साझा करने को कहा ताकि निस्तारण हो सके।

एमएसएमई में करेंगे सहयोग- देवमूर्ति
एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देवमूर्ति ने कहा कि नेपाल और उत्तराखंड से दो से तीन हजार मरीज इलाज के लिए बरेली आ रहे हैं। एसआरएमएस प्रदेश का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज है, जिसने छह हजार लोगों को रोजगार दिया है। एमएसएमई में भी हम सहयोग करेंगे।
 

प्रशासन के आंकड़ों को जांचने की जरूरत- खंडेलवाल 
बीएल एग्रो चेयरमैन घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि प्रशासन के आंकड़ों को जांचने की जरूरत है। पांच सात लाख से क्या होगा इस पर विचार करना होगा। जैसे लार्ज को अलग किया वैसे एमएसएमई के लिए अलग-अलग विभाग बनने चाहिए ताकि सहूलियत मिले। उन्होंने कहा कि ट्रंप टैरिफ की समस्या से निजात चाहिए। 

'एमएसएमई को सशक्त बनाना जरूरी'
घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि ज्यादातर उद्यमी श्रम सस्ता होने से ही उद्योग चल रहे हैं। अगर आर्थिक सशक्त हैं तभी हमारी बात सुनी जाएगी। रक्षा मंत्रालय के जरिए हिंदुस्तान सशक्त हुआ वैसे ही एमएसएमई को सशक्त बनाना जरूरी है। उद्यमियों को सब्सिडी की सोच बदलनी होगी। चीन का युवा नवाचार पर कार्य कर रहे हैं। खेती भी उद्योग है। विद्यार्थियों का कौशल विकास जरूरी है। 

'शिक्षा में बदलाव जरूरी' 
उन्होंने कहा कि शिक्षा में बदलाव जरूरी है। सरकार प्रयास कर रही है पर सफल नहीं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में उपकरण पुराने हैं और वे पीछे रह जाएं तो क्या सीखेंगे। इंडस्ट्री में प्रशिक्षण के लिए पहुंचने पर कुछ सिख नहीं रहे। बीटेक छात्र सिर्फ डिग्री धारक है, पढ़ाई से उद्यमी नहीं बन जाएंगे। इंटर्नशिप में लापरवाही करते हैं। इंटरनेशनल मार्केट में बच्चों को सेट करने केलिए उनमें नई सोच विकसित करनी होगी।

इम्पोर्ट एक्सपोर्ट में बदलाव होना चाहिए- खंडेलवाल 
घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि ग्रीन एनर्जी की जरूरत है। क्योंकि कोई भी उत्पाद पांच साल में पुराने हो जाते हैं। नई टेक्नोलॉजी जरूरी है। एक्सपोर्ट के लिए दूसरे देश की मांग को जानना होगा। इंपोर्ट कर रहे हैं तो उससे देश का भला नहीं है। जो योग्य हैं उन्हें सब्सिडी और लोन बुलाकर बैंक दे रहे हैं। ज्यादातर उपकरण बाहर से आते हैं। जबकि उन्हें देश में तैयार करना होगा। इसलिए इम्पोर्ट एक्सपोर्ट में बदलाव चाहिए। परम्परागत उद्योग और जरी जरदोजी का भविष्य तभी बनेगा जब नवाचार होगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। स्किल्ड लेबर है नहीं।

डिजिटल मार्केटिंग भी जरूरी 
घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि माल बेचने के लिए डिजिटल मार्केटिंग का तरीका जरूरी है। विज्ञापन का तरीका भी नया होना चाहिए। इन पर भी विचार होना चाहिए। लक्ष्यों को लेकर भी प्रतिमाह प्रशासन के साथ बैठक जरूरी है ताकि उससे मिले इनपुट पर कार्य हो। माइक्रो से कुछ नहीं होगा। मीडियम इंडस्ट्री की जरूरत है। 

एमएसएमई से गुजरता है विकसित भारत का रास्ता 
डॉ मनीष शर्मा ने कहा कि पांच लाख के लोन से कुछ नहीं होगा। 1987 में पांच लाख का लोन मिला सब बेकार गया। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा। बीटेक करने वाले विद्यार्थी के लिए स्किल डेवलपमेंट का प्रयास किया पर वो सफल नहीं हुआ। विकसित भारत का रास्ता एमएसएमई से होकर गुजरता है। लेकिन विद्यार्थियों को कौशल विकास करना होगा। नौवीं क्लास का बच्चा छठी क्लास का सवाल हल नहीं कर पाता। 

एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव के मंच पर अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला
डॉ मनीष ने कहा कि सरकार काम कर रही है लेकिन जो मंशा है उसे पूरी करने के लिए बेहद प्रयास करना होगा। जब तक प्रति व्यक्ति आय नहीं बढ़ेगी तब तक विकास बेकार है। सौ करोड़ के प्लांट पर पांच करोड़ की सब्सिडी का कोई मतलब नहीं। रोजगार नहीं है। एजुकेशन, आरएनडी पर काम करना होगा। विदेश में यूनिवर्सिटी सरकार नहीं बल्कि दक्ष व्यक्ति चला रहा है। क्लस्टर फूड टेस्ट लैब बनानी चाहिए ताकि माल की गुणवत्ता पता चल सके। क्वालिटी बढ़ानी है तो ग्रीन टेक्नोलॉजी पर काम करना होगा।

'विशेषज्ञ लोगों से संवाद का मौका मिले'
रामा श्यामा पेपर्स के डायरेक्टर डॉ. अभिनव अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई के लिए काम किया है। पॉलिसीज में कंसल्टेंट की जरूरत है। युवा उद्यम करना चाहते हैं। संसाधन है लेकिन सफलता मिलेगी या नहीं, इसका असमंजस है। विशेषज्ञ लोगों से संवाद का मौका मिले, तभी विचार को धरातल पर उतारा जा सके। एआई का प्रयोग कैसे करें। स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए जाएं। प्लाईवुड के सामने टिंबर न मिलने पर एक्सपोर्ट कर रहे हैं। जीएसटी में प्लाईवुड 18 प्रतिशत पर ही है। जो स्टार्टअप करना चाहते हैं उनके लिए मॉड्यूलर फर्नीचर का स्कोप है। देश में इंडस्ट्री के विकास के लिए चल रही रेल सेवा से बरेली भी कनेक्ट हो सके, इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। इंसेंटिव पॉलिसी में पुरानी इंडस्ट्री को भी जोड़ना होगा। 

कॉन्क्लेव के मंच पर उद्यमी व अतिथिगण - फोटो : अमर उजाला
आईटीआई की निगरानी जरूरी- एके सिंह 
एसके सिंह ने कहा कि आर्टिजंस (कौशल) का जिला है। इसे उभारना होगा। इनके पास मूलभूत सुविधा नहीं है। जबकि इनके उत्पाद दुनिया में पहुंच रहे हैं। उन्हें सुविधा देनी होगी। क्वालिटी स्किल्ड लेबर आईटीआई से मिलेगी लेकिन उससे भी अच्छे लोग नहीं मिल रहे हैं। इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, फिटर नहीं मिलते। आईटीआई की निगरानी जरूरी है। सरकार के जियो का क्रियान्वयन सही तरीके से होना जरूरी है। 
 

उद्यमी को मिले सरकार की नीति का लाभ 
उन्होंने कहा कि नए उद्योग का एक हजार दिन तक निरीक्षण नहीं होगा लेकिन इसका लाभ एक भी उद्यमी को नहीं मिला। इंडस्ट्रियलिस्ट की पीड़ा सब रजिस्ट्रार से है। यूपीसीडा के प्रयास, उपायुक्त अब इनके आगे फेल हो जाते हैं। उत्पीड़न करते हैं। सोलर एनर्जी लगवाने पर छह छह माह बिल में एडजस्ट नहीं हो रहा। एबिटी मीटर नहीं लगे। जो बिल पहले था वही आज भी है। ऊपर से बैंक को ब्याज भी देना पड़ रहा है। सरकार की नीति का लाभ उद्यमी को मिले इसकी निगरानी होनी चाहिए।

बरेली भी हो रही विकसित- अशोक गोयल 
अशोक गोयल ने कहा कि साल 1982 में माइक्रो यूनिट लगाई और मीडियम तक आ चुका हूं। विश्वस्तरीय लग्जरी आइटम गद्दे बनाता हूं। जो पूरे देश में पहुंच रहे हैं। भारत ही नहीं बरेली भी विकसित हो रहा है। उपलब्ध संसाधन में कैसे विकास करेंगे यह सोचना होगा। बरेली में रह रहे हैं, वे इसी में अपना विकास कर सकते हैं।

रजत मेहरोत्रा ने रखे अपने विचार 
फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र के सचिव रजत मेहरोत्रा ने कहा कि फरीदपुर में निजी औद्योगिक क्षेत्र है। जबकि सुविधाएं वहां नहीं है।  इज ऑफ डूइंग बिजनेस का लाभ नहीं मिल रहा। कोई नई इंडस्ट्री लगाना मुश्किल है। सिंगल विंडो से जरूरी दस्तावेज एनओसी मिले। उद्योग बंधु की बैठक में मुद्दे नहीं सुलझ रहे। प्रोपर निगरानी होनी चाहिए। उद्यमी तमाम कार्य करते हैं पर विभागों में कोई इज्जत नहीं मिलती। 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य है। माइक्रो इंडस्ट्री को लार्ज बनना कठिन है। बिजली नहीं मिल रही। इंडस्ट्री फीडर से बाहर के कनेक्शन हो रहे हैं। नया फीडर लगना चाहिए। एफएमपीपी सरचार्ज लगा है, जिस पर अंकुश लगना चाहिए। 

सरकारी योजनाओं पर बैंक लगा रहे पलीता- अजय शुक्ला 
भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष अजय शुक्ला ने कहा कि क्षेत्र में बिजली की समस्या है। फीडर अलग बना उससे थोड़ी राहत मिली। सुरमा बरेली की धरोहर है। इतने आर्टिजंस (कुशल कारीगर) है जिले में लेकिन उनकी कद्र नहीं हो रही। अर्बन हाट में इन्हें भी जगह मिलनी चाहिए। सरकार ने गूगल सर्वे किया तो प्रदूषण विभाग के लोग भोजीपुरा पहुंचे। ऐसे उद्यमी के यहां पहुंचकर उसे पीड़ित किया। इंस्पेक्टर राज की कमी जीएसटी वाले पूरी कर रहे हैं। पीएम, सीएम योजना की स्कीम अच्छी है लेकिन बैंक इसे पलीता लगा रहे हैं। जो फार्म रिजेक्ट हो रहे हैं इसे दिखवाना चाहिए। बड़ा मुद्दा ये है कि एक फैक्टरी आरएंडी की व्यवस्था थम सके।

उद्यमी को प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलता- मयूर धीरवानी
आईआईए बरेली चैप्टर के चेयरमैन मयूर धीरवानी ने कहा कि एमएसएमई को सही से चलाएं तो देश विकसित बनेगा। सबसे पहले उद्योग लगाना और उसे चलना दोनों अलग अलग मामले हैं। जमीन न होना बड़ी समस्या है। विकास शुल्क ज्यादा है। उद्यमी को प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलता। मूलभूत सुविधा नहीं मिल रही। बिजली निगम को पूंजी दे सरकार ताकि वे सुविधा दे सकें। जर्जर लाइन जड़ से बदली जाएं। लोकल अथॉरिटी को सवाल उठाने होंगे। फंड उपलब्ध कराया जाए जिससे बिजली की समस्या थमे।  करार का आंकड़ा बताता है कि उद्योग स्थापना में अड़चन है। इन्वेस्ट यूपी में एक नोडल होना चाहिए। जो समस्याओं का समाधान कर सके। टीम बने और संचालन तक सहयोग करें। 

लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि बरेली शहर जैसी सुविधा और छोटे शहर जैसी सहूलियत। जुलूस बहुत ज्यादा होते हैं, इनका प्रबंधन होना चाहिए और उसके सदुपयोग पर विचार करना चाहिए। क्योंकि बड़ी आबादी बाहर से आती है जो आर्थिक सहयोग करते हैं।
 
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अमर उजाला का सार्थक मकसद- राजीव सिंघल 
सेंट्रल यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सिंघल ने कहा कि इंडस्ट्री कॉमर्स से जुड़ी है। अमर उजाला का सार्थक मकसद है कि औद्योगिक विकास पर मंथन का सिलसिला शुरू किया। स्थानीय मुद्दे जो उठते हैं उनकी समयसीमा बनाई जाए। एयरपोर्ट से उड़ान बढ़ाई जाएं। वहां पहुंचने वाली रोड दुरुस्त की जाए। ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कलर कोडिंग की बात कही लेकिन हुआ नहीं। समस्या का समाधान होना चाहिए तभी कार्यक्रम सफल होगा। कथनी और करनी में अंतर है। सीवर लाइन का काम खत्म ही नहीं हो रहा। बिजनेस बढ़ाने के लिए छोटी बातों पर ध्यान देना होगा।
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