फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Janmashtami 2022 Live: जन्माष्टमी पर इस समय करेंगे पूजा तो मिलेगा दोगुना लाभ, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Thu, 18 Aug 2022 07:44 PM IST
योगेश साहू धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

खास बातें

Shri Krishna Janmashtami 2022 Live News Update in Hindi: इस बार रक्षाबंधन की तरह जन्माष्टमी को लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है कि आखिरकार जन्माष्टमी कब मनाई जाए। 18 या 19 अगस्त को। दरअसल हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार या व्रत तिथि के आधार पर मनाई जाती है ऐसे में उदया तिथि में अंतर आने की वजह से व्रत-त्योहार में दिनों का फर्क हो जाता है। अष्टमी तिथि आज यानी 18 अगस्त को रात 9 बजकर 21 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं अष्टमी तिथि 19 अगस्त को रात 10 बजकर 59 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।
विज्ञापन
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

लाइव अपडेट

07:27 PM, 18-Aug-2022

राष्ट्रपति मुर्मू ने दी शुभकामनाएं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रार्थना की कि त्योहार सभी को मन, वचन और कर्म में सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे। राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन व शिक्षाएं भलाई व नैतिकता की सीख देते हैं।

06:28 PM, 18-Aug-2022

संतान की कामना के लिए जन्माष्टमी की रात करें इस मंत्र का जाप

गुणवान संतान की कामना रखने वाले दंपति जन्माष्टमी की रात इस मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपका होने वाला बच्चा गुणी और बुद्धिमान होगा।
देवकीसुतं गोविन्दम् वासुदेव जगत्पते। 
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।

04:10 PM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

धूप बत्ती, अगरबत्ती, कपूर, केसर, चंदन, यज्ञोपवीत , कुमकुम, अक्षत, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, आभूषण, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे,  तुलसीमाला, खड़ा धनिया, सप्तमृत्तिका, सप्तधान, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, तुलसी दल, शुद्ध घी, दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न, छोटी इलायची, लौंग मौली, इत्र की शीशी, सिंहासन, बाजोट या झूला (चौकी, आसन), पंच पल्लव, पंचामृत, केले के पत्ते, औषधि, श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, गणेशजी की तस्वीर, अम्बिका जी की तस्वीर, भगवान के वस्त्र, गणेशजी को अर्पित करने के लिए वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने के लिए वस्त्र, जल कलश, सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा, पंच रत्न, दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, बन्दनवार, ताम्बूल, नारियल, चावल, गेहूं, गुलाब और लाल कमल के फूल, दूर्वा, अर्घ्य पात्र आदि। 

विज्ञापन
03:08 PM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी पर इस तरह करें पूजा

- जन्माष्टमी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि सभी तरह के कार्यों को निपटा लें।
- फिर घर के मंदिर का साफ-सफाई कर लें।
- इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आवहन करते हुए दीप प्रज्वलित करें।
- फिर बाद में लड्डू गोपाल के पूजन आरंभ कर दें।
- लड्डू गोपाल को जल से अभिषेक कर चंदन और भोग लगाएं।
- इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं।
- फिर रात्रि का इंतजार करते हुए दिन भर कृष्ण मंत्रों का जाप करें।
- रात्रि में 12 बजे भगवान का जन्म दिन मनाएं 
- कान्हा को दूध,दही, घी, शहद, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
-अंत में बाल गोपाल की आरती उतारे हुए मंगल गीत गाएं।

02:20 PM, 18-Aug-2022

भगवान श्रीकृष्ण ने सफलता पाने के लिए बताएं हैं 5 सूत्र

श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन ही एक प्रबंधन की किताब है,जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन जीने के लिए श्रेष्ठम सूत्र हैं। अगर आप दिमाग को शांत और मन को स्थिर रखने की कोशिश करें तो बुरी परिस्थितियों में भी आप अपने लिए कुछ बहुत बेहतरीन हल निकाल पाएंगे,

1.जीवन संघर्ष है,मुकावला करो

2. स्वस्थ्य शरीर से मिलती है विजय

3. पढ़ाई किताबी ना हो, रचनात्मक हो

4. रिश्तों को सहेजकर रखें

5. शांति से सब कुछ संभव है

 

विज्ञापन
01:31 PM, 18-Aug-2022
राधा कृष्ण की प्रेम कहानी और विवाह न होने का कारण - फोटो : amar ujala

दांपत्य जीवन में प्रेम के लिए घर पर ऐसी लगाएं राधा-कृष्ण की फोटो

परिवार में किसी वजह से सुख शांति नहीं है या फिर पति-पत्नी के बीच क्लेश रहता है तो आपको कृष्ण-राधाजी की आलिंगनवद्ध तस्वीर अपने बेडरूम की उत्तर दिशा में लगानी चाहिए।ध्यान रहे सोते समय पैर इधर न हो।
 

12:58 PM, 18-Aug-2022

कृष्ण जन्माष्टमी 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जाता है। लेकिन इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं हो पा रहा है। अष्टमी तिथि 18 अगस्त को शाम के 09 बजकर 21 मिनट से शुरू हो रही है जो 19 अगस्त की रात 10 बजकर 59 मिनट पर खत्म हो जाएगी। 
 

12:26 PM, 18-Aug-2022
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी पर पूजा का समय

पंचांग के अनुसार इस साल जन्माष्टमी का त्योहार 18 अगस्त को है,लेकिन कुछ जगहों पर उदया तिथि के आधार पर 19 अगस्त को भी मना रहे हैं। अष्टमी तिथि 18 अगस्त को शाम के 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है और 19 अगस्त को रात के 10 बजकर 59 मिनट पर खत्म हो रही है। शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत और जन्मोत्सव दोनों अलग-अलग चीज है। जिस रात निशीथ काल में यानी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि आरंभ होती है उस समय व्रत और अगले दिन जन्मोत्सव मनाना चाहिए। 

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादों के महीने में अष्टमी तिथि के आधी रात और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस कारण से हर साल भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव रात्रि में मनाई जाती है। पंचांग की गणना के अनुसार 18 अगस्त को रात के समय करीब 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक निशीथ काल का समय रहेगा। ऐसे में इस समय पूजा करना सबसे ज्यादा शुभ और फलदायी रहेगा। निशीथ काल में भगवान काव पंचामृत से अभिषेक करें।

11:56 AM, 18-Aug-2022

आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए घर पर भगवान कृष्ण की ऐसी तस्वीर लगाएं

अगर आप अंदर आत्मविश्वास की कमी है तो अपने घर की उत्तर दिशा में अर्जुन को गीता का ज्ञान देते हुए श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाएं और रोज पूजा करें, इससे आपमें आत्मविश्वास आएगा।साथ ही किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देते वक्त आप नहीं घबराएंगे।

11:39 AM, 18-Aug-2022

घर पर लड्डू गोपाल को जन्मदिन पर ऐसे सजाएं

- कृष्ण जन्माष्टमी पर घर पर बालगोपाल की मूर्ति के लिए नए वस्त्र जरूर खरीदें और उन्हे पहनाएं।
- मोरमुकुट, मोरपंख, आभूषण,बांसुरी और माला जरूर लाएं।
- जन्मदिन पर बालगोपाल की पूजा और आरती जरूर उतारें और माथे पर टीका लगाएं।
- जन्माष्टमी पर बाल गोपाल के लिए झूले लाएं और उन्हें झूला झूलाएं।

11:20 AM, 18-Aug-2022

सिंह,कन्या,तुला और वृश्चिक राशि वाले कैसे करें जन्माष्टमी की पूजा

सिंह राशि- जिन जातकों की राशि सिंह है वे लोग जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को गुलाबी रंग का वस्त्र पहनाएं। मेवे का भोग लगाएं।
कन्या राशि- कन्या राशि वाले कान्हा को हरे रंग का वस्त्र पहनाएं और माखन मिश्री का भोग अर्पित करें।
तुला राशि - इस राशि के जातक भगवान कृष्ण को केसरिया रंग का कपड़ा अर्पित करें और धी और माखन का भोग लगाएं।
वृश्चिक राशि- इस राशि को लोग भगवान कृष्ण को लाल वस्त्र पहनाएं और तुलसी के पत्ते के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
 

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन राशि अनुसार करें इन मंत्रों का जाप

10:31 AM, 18-Aug-2022
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

श्रीकृष्ण का 5249वां जन्मोत्सव और 8 शुभ योग

इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का यह 5249वां जन्म दिवस है। शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रात के आठवें मुहूर्त में हुआ था। अष्टमी तिथि की उदया तिथि 19 को है ऐसे में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव 19 अगस्त को मनाना ज्यादा अच्छा रहेगा। इस जन्माष्टमी पर 8 तरह का शुभ योग भी बन रहा है। ये 8 शुभ योग इस प्रकार है- महालक्ष्मी, बुधादित्य,ध्रुव, छत्र,कुलदीपक,भारती, हर्ष और सत्कीर्ति  

10:17 AM, 18-Aug-2022

19 अगस्त का जन्माष्टमी मनाना ज्यादा अच्छा

अष्टमी तिथि 18 और 19 अगस्त दो दिन होने से इस बार कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में जन्माष्टमी कब मनाना उचित रहेगा इसका संक्षिप्त ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। दरअसल इस बार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अगस्त को सुबह के बजाय रात में करीब 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है। फिर 19 अगस्त को सूर्योदय से रात तक रहेगी। ऐसे में अष्टमी की उदया तिथि 19 अगस्त को मानी जाएगी। इस उदया तिथि के अनुसार जन्माष्टमी तिथि 19 अगस्त का मनाना ज्यादा अच्छा रहेगा।

10:03 AM, 18-Aug-2022

पुराणों में कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

  • विष्णु और ब्रह्म पुराण- इस पुराण के अनुसार भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी से कहते हैं कि भादों माह में जब बारिश जोरो पर होती है तब भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मैं जन्म लूंगा।
  • ब्रह्मवैवर्त पुराण- भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्य रात्रि को रोहिणी नक्षत्र, वृषभ लग्न के संयोग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
  • भविष्य पुराण- भगवान स्वंय कहते हैं कि जब सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृष राशि में विराजमान होंगे तब भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की रात को रोहिणी नक्षत्र में मै जन्म लूंगा।
  • अग्नि पुराण- अग्नि पुराण के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र और भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आधी रात को हुआ था।
  •  देवीभागवत पुराण- देवीभागवत पुराण श्रीकृष्ण जन्म के बारे में कहता है वृष लग्न, रोहिणी नक्षत्र, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि पर देवकी के गर्भ से जन्म होगा।
  • हरिवंश पुराण - हरिवंश पुराण के अनुसार भगवान कृष्ण के जन्म के समय अभिजित नक्षत्र, जयंती योग और विजय मुहूर्त था।

09:44 AM, 18-Aug-2022

भगवान कृष्ण की नगरी समेत कई जगहों पर इस बार जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जा रही है, लेकिन पुरी समेत कुछ जगहों पर जन्माष्टमी का त्योहार 18 अगस्त का भी मनाया जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी पर 51 मिनट के अभिजीत मुहूर्त का साथ कई अन्य शुभ संयोग भी बन रहा है। जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि की उदया तिथि 19 अगस्त को है। 

जन्माष्टमी तिथि- 18 और 19 अगस्त 
अष्टमी तिथि आरंभ-  18 अगस्त, गुरुवार रात्रि 09: 21 से
अष्टमी तिथि समाप्त- 19 अगस्त,शुक्रवार रात्रि 10:59 तक
अभिजीत मुहूर्त- 12:05 -12:56 तक
वृद्धि योग- 17 अगस्त दोपहर 08:56से गुरुवार 18 अगस्त रात्रि 08:41 तक

09:30 AM, 18-Aug-2022

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में इस दिन मनेगी जन्माष्टमी

इस बार जन्माष्टमी दो दिन यानी 18 और 19 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी, दरअसल अष्टमी तिथि 18 अगस्त को सूर्योदय के समय नहीं लगेगी बल्कि रात को शुरू होगी। 19 अगस्त को अष्टमी तिथि दिन और रात दोनों समय रहेगी। ऐसे में कृष्ण की नगरी मथुरा, वृंदावन और द्वारका में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव 19 अगस्त को मनाया जाएगा।
 

09:21 AM, 18-Aug-2022

Krishna Janmashtami 2022: अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का महत्व?

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग बनने पर हुआ था। सभी 27 नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। इस नक्षत्र की गिनती बहुत ही शुभ नक्षत्रों में होती है।

09:14 AM, 18-Aug-2022
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

जन्माष्टमी के वॉलपेपर और शुभकामना संदेश

09:14 AM, 18-Aug-2022
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

जन्माष्टमी के वॉलपेपर और शुभकामना संदेश

09:13 AM, 18-Aug-2022
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

जन्माष्टमी के वॉलपेपर और शुभकामना संदेश

09:08 AM, 18-Aug-2022
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी नीशीथ काल पूजा मुहूर्त 

जन्माष्टमी के दिन कान्हा की पूजा के लिए नीशीथ काल पूजा का मुहूर्त- रात 12:03 से 12:47 तक
अवधि- 0 घंटे 44 मिनट

Krishna Janmashtami 2022: राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी

09:00 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी पंचोपचार पूजन विधि

जिनको श्रीकृष्ण की षोडशोपचार पूजा करना संभव ना हो उनको पंचोपचार पूजा करनी चाहिए। पूजन करते समय 'सपरिवाराय श्री कृष्णाय नमः' यह नाम मंत्र कहते हुए एक-एक सामग्री श्री कृष्ण को अर्पण करना चाहिए। श्री कृष्ण जी को दही ,पोहा और मक्खन का भोग लगाना चाहिए। उसके पश्चात श्री कृष्ण जी की आरती करनी चाहिए।

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन राशि अनुसार करें इन मंत्रों का जाप

08:47 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा कैसे करें  

श्रीकृष्ण की पूजा में उनकी प्रतिमा को गोपी चंदन का गंध प्रयोग में लाया जाता है। श्रीकृष्ण की पूजा करते समय अनामिका से गंध लगाना चाहिए। श्री कृष्ण जी को हल्दी कुमकुम चढ़ाते समय पहले हल्दी और फिर कुमकुम दाहिने हाथ के अंगूठे और अनामिका मैं लेकर उनके चरणों में अर्पण करना चाहिए। अंगूठा और अनामिका जोड़कर जो मुद्रा तैयार होती है,उससे पूजक का अनाहत चक्र जागृत होता है। उस कारण भक्ति भाव निर्माण होने में सहायता होती है। 

08:36 AM, 18-Aug-2022
कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा के दौरान क्या करें-क्या न करें 

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव का समय होता है। इसमें रात्रि के समय भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही जोश और भक्ति के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा के दौरान हमें क्या कुछ करना चाहिए और क्या नहीं।

- कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा में कान्हा को पंचीरी और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं।
- कान्हा को भोग लगाते समय सभी चीजों में तुलसी के पत्ते अवश्य डालें।
- कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को नए कपड़े अवश्य ही पहनाएं।
- पूजा में हमेशा साफ कपड़े और साफ बर्तनों का प्रयोग करें।
- कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात को ही करें और घी का दीपक जलाएं।
- कृष्ण जन्माष्टमी पूजा के दौरान कभी भी किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें।

जन्माष्टमी के दिन घर ले आएं ये चीजें

08:20 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का समय 

भाद्रपद अष्टमी तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल भी जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त को है। जन्माष्टमी पर निशीथकाल में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस बार निशीथकाल का समय रात के 12 बजकर 03 मिनय से 12 बजकर 47 मिनट तक है। ऐसे में पूजा के लिए 44 मिनट का शुभ मुहूर्त है। 

यह भी पढ़ें-

कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन क्यों ?

इन चीजों के बिना अधूरी है कृष्ण जन्माष्टमी पूजा

08:08 AM, 18-Aug-2022
Happy Krishna Janmashtami 2022 Wishes - फोटो : अमर उजाला

कब मनाएं जन्माष्टमी आज या कल?

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में आधी रात को मथुरा में हुआ था। ऐसे में भगवान के भक्त हर वर्ष इसी तिथि और माह पर बड़े ही उत्साह और जोश के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस बार अष्टमी तिथि 18 अगस्त को रात के 9 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ हो रही है। जो 19 अगस्त को रात के करीब 10 बजकर मिनट पर समाप्त हो जाएगी। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को घनघोर रात के समय हुआ था ऐसे में कुथ विद्वान 18 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने को शुभ मान रहे हैं। वहीं 19 अगस्त को उदय तिथि है जिस कारण से बहुत से विद्वान 19 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी मनाने की सलाह दे रहे हैं। 

यह भी पढ़ें-
कृष्ण जन्माष्टमी की कथा और आरती

07:18 AM, 18-Aug-2022
कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : Amar ujala

जन्माष्टमी पर मेष,वृषभ, मिथुन और कर्क राशि वाले इन चीजों का भोग अर्पित करें

इस कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आप अपनी राशि के अनुसार कान्हा को भोग लगाकर प्रभु को प्रसन्न करें और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना का आशीर्वाद प्राप्त करें।

मेष राशि- इस राशि के जातकों को जन्माष्टमी पर कान्हा को लाल वस्त्र पहनाएं और माखन-मिश्री का भोग चढ़ाएं।
वृषभ राशि- इस राशि के लोग चांदी के वर्क से कान्हा की साज-सजावट करें और माखन का भोग लगाएं।
मिथुन राशि- आप कान्हा को दही का भोग लगाएं।
कर्क राशि- कर्क राशि के लोग जन्माष्टमी के दिन दूध और केसर का भोग लगाएं।
 

07:07 AM, 18-Aug-2022
श्रीकृष्ण के मंत्र - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी पर कान्हा को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों करें जाप

1- ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
2- कृं कृष्णाय नमः
3- गोकुल नाथाय नमः
4- ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा
5- ओम क्लीम कृष्णाय नमः
6- पंचामृत स्नान 
“पंचामृतं मयाआनीतं पयोदधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।
7-स्नान मंत्र
“गंगा, सरस्वती, रेवा, पयोष्णी, नर्मदाजलैः। स्नापितोअसि मया देव तथा शांति कुरुष्व मे।।

06:59 AM, 18-Aug-2022

इस जन्माष्टमी पर बना शुभ योग

इस वर्ष जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त दो दिन मनाई जा रही है। 18 अगस्त,गुरुवार के दिन बहुत ही अच्छा शुभ योग का संयोग बन रहा है। इस दिन वृद्धि योग का संयोग है। इसके अलावा जन्माष्टमी पर अभिजीत मुहूर्त 18 अगस्त को 12 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। 18 अगस्त की रात 08 बजकर 41 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। वहीं ध्रुव योग का भी संयोग 18 अगस्त का रात 08 बजकर 41 मिनट से 19 अगस्त की रात 08 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

06:51 AM, 18-Aug-2022

आज कब शुरू होगी भाद्रपद की अष्टमी तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और जन्मोत्सव का पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। रात्रि में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हुए उनके जन्म का उत्सव बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। अष्टमी तिथि आज यानी 18 अगस्त को शाम 09 बजकर 21 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 19 अगस्त को रात के 10 बजकर 59 मिनट पर खत्म होगी।
 

06:26 AM, 18-Aug-2022
18 अगस्त को है कृष्ण जन्माष्टमी - फोटो : अमर उजाला

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के दौरान जरूर करें उनकी आरती

Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics In Hindi: श्रीकृष्ण की आरती

आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला 
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक

चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग,  मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।

अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।

जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू 
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू 

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

06:21 AM, 18-Aug-2022

घर में है लड्डू गोपाल तो जरूर करें 6 काम

नियम से कराएं स्नान 
बाल गोपाल को एक बच्चे की तरह ही रखना होता है। जिस तरह आप रोज स्नान करते हैं, उसी तरह आपको नियमित रूप से लड्डू गोपाल को भी स्नान करना होगा। लेकिन स्नान कराते समय इन बातओं का ध्यान रखना चाहिए। लड्डू गोपाल को स्नान कराने के लिए दूध, दही, शहद, गंगाजल, घी का इस्तेमाल करना चाहिए। शंख में दूध, दही, गंगाजल और घी डालकर स्नान कराना चाहिए।

06:08 AM, 18-Aug-2022

श्रीकृष्ण मठ मंदिर उडुपी, कर्नाटक

दक्षिण भारत में भगवान श्रीकृष्ण के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में श्रीकृष्ण मठ है। यह मंदिर कर्नाटक के उडुपी में है। उडुपी के श्रीकृष्ण मठ मंदिर की एक खासियत है। यहां भगवान कृष्ण की पूजा खिड़की के नौ छिद्रों में से की जाती है। मंदिर का निर्माण लकड़ी और पत्थर से किया गया है। मंदिर के करीब मौजूद तालाब के पानी में मंदिर का प्रतिबिंब दिखाई देता है। यहां जन्माष्टमी का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। श्रीकृष्ण मठ मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर बहुत ज्यादा भीड़ लगती है।

05:42 AM, 18-Aug-2022

जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा

भारत के चार धामों में से एक उड़ीसा का जगन्नाथ पुरी मंदिर है। यहां भगवान कृष्ण बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि द्वापर के बाद भगवान श्रीकृष्ण पुरी में निवास करने लगे थे। जगन्नाथ पुरी की वार्षिक रथ यात्रा दुनिया भर में मशहूर है। यहां भगवान कृष्ण के रथ को खींचने के लिए दूर दराज से भक्त आते हैं। तीन विशाल रथों की यात्रा निकाली जाती है, जिसमें सबसे आगे प्रभु बलराम, फिर बहन सुभद्रा और आखिर में जगत के नाथ भगवान श्री जगन्नाथ जी होते हैं। आप कृष्ण जन्माष्टमी या फिर रक्षाबंधन के मौके पर भी जगन्नाथ पुरी धाम जा सकते हैं।

05:26 AM, 18-Aug-2022

पार्थसारथी मंदिर त्रिपलीकेन, चेन्नई

चेन्नई में श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध मंदिर पार्थसारथी मंदिर त्रिपलीकेन स्थित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के चार अवतारों की पूजा होती है, जिसमें कृष्ण, राम, नृसिंह और भगवान वराह शामिल हैं। इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। मंदिर की वास्तुकला भी अद्भुत है।

05:08 AM, 18-Aug-2022

कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन कृष्ण मंदिरों के बारे में जानें

दक्षिण का द्वारका गुरुवायूर मंदिर, केरल
दक्षिण भारत के केरल राज्य में श्रीकृष्ण के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। इनमें से एक गुरुवायूर मंदिर है, जिसे दक्षिण का द्वारका कहा जाता है। इस मंदिर को भूलोका बैकुंठ के रूप में भी जाना जाता है, जो कि पृथ्वी पर भगवान विष्णु का पवित्र निवास स्थान है। यहां भगवान कृष्ण का बाल रूप है, जिसे गुरुवायुरप्पन कहते हैं। इस मंदिर को लेकर एक मान्यता है कि जब गुजरात के द्वारका में बाढ़ आई, जो कृष्ण की मूर्ति बाढ़ में बह गई, जिसे बृहस्पति देव ने देखकर बचा लिया। उन्होंने इस मूर्ति की दोबारा स्थापना का विचार मन में लाते हुए जगह की तलाश की। केरल में उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन हुए, जिन्हें बृहस्पति देव को कृष्ण की मूर्ति केरल में स्थापित करने को कहा। बृहस्पति देव ने वायु देव की मदद से मूर्ति को केरल में स्थापित कर दिया। इसलिए केरल के कृष्ण मंदिर का नाम बृहस्पति (गुरु) और वायु देव के नाम पर गुरुवायूर मंदिर हो गया।

04:48 AM, 18-Aug-2022

गोकुल-वृंदावन जैसा नजारा

बाल गोपाल का बचपन गोकुल वृंदावन में बीता। यह जगह उनकी बहुत प्रिय है। नंदलाल ग्वाला थे, जो अपनी गायों को चराने जाते थे। माखन खाते थे और रासलीला करते थे। इस जन्माष्टमी पर आप उनके आसपास गोकुल वृंदावन का दृश्य बना सकते हैं। इसके लिए आप बाजार से कुछ खिलौने ले आएं। कृष्ण जन्माष्टमी पर बाजारों में मिट्टी की गाय, ग्वालिन, गोवर्धन पर्वत आदि खिलौने मिल जाएंगे, जिसे आप घर पर सजाकर जन्माष्टमी की झांकी तैयार कर सकते हैं।

04:34 AM, 18-Aug-2022

रंगोली बनाएं

कृष्ण जन्माष्टमी पर आप घर के द्वार पर या मंदिर के आसपास रंगोली बना सकते हैं। रंगोली को शुभ माना जाता है। किसी भी पर्व में रंगोली बनाकर घर सजाने के साथ ही भगवान को आमंत्रित किया जाता है। इसलिए सुंदर रंगों और कलाकृति से रंगोली बनाकर घर सजा सकते हैं।

04:19 AM, 18-Aug-2022

बाल गोपाल का झूला सजाएं

घर और मंदिर सजाने के साथ ही बाल गोपाल का पालना या झूला भी सजा सकती हैं। जन्म के बाद कान्हा का पालने या झूले में बैठाकर झुलाया जाता है। इसलिए कृष्ण जी के झूले को फूलों से, मोतियों से सजा सकती हैं। झूले में बैठने वाली जगह पर कान्हा के लिए बिस्तर भी लगाएं ताकि वह आराम से बैठ पाएं।

03:52 AM, 18-Aug-2022

रोशनी से जगमगा दें घर

भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का जन्म धरती के लिए किसी वरदान से कम नहीं। ऐसे में उनके स्वागत के लिए आप मोमबत्ती, दीए या बिजली से चलने वाली झालरों व लाइट्स का उपयोग कर सकते हैं। मंदिर के इर्द गिर्द झालर लगा सकते हैं। जहां भी अंधकार हो, वहां मोमबत्ती या दीपक जला सकते हैं।

03:34 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी में मंदिर सजाने के आइडियाज

गुब्बारे और फूलों से सजाएं
बच्चों के जन्मदिन की तरह ही कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कन्हैया का जन्मदिन मनाया जाता है। इसलिए आप घर और मंदिर को उसी तरह सजा सकते हैं, जैसे बच्चों के लिए सजाते हैं। रंग बिरंगे गुब्बारों को घर की दीवारों, मंदिर के इर्द गिर्द लगाएं। चाहें तो कृष्ण जन्माष्टमी की सजावट के लिए फूलों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। फूल सजावट के साथ ही पूजा के काम भी आते हैं।

03:16 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी पूजन विधि

  • जन्माष्टमी के दिन रात 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।
  • इस दिन भगवान श्री कृष्ण को दूध और गंगाजल से स्नान करवाया जाता है और साथ ही नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।  
  • इसके बाद उन्हें मोरपंख, बांसुरी, मुकुट, चंदन, वैजंयती माला, तुलसी दल आदि से सजाया जाता है। 
  • इसके बाद उन्हें फल, फूल, मखाने, मक्खन, मिश्री का भोग, मिठाई, मेवे आदि अर्पित करें। 
  • फिर भगवान श्री कृष्ण के सम्मुख दीप-धूप जलाएं। 
  • आखिर में श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की आरती उतारें और प्रसाद सभी में बांटे। 
  • साथ ही, पूजन के दौरान हुई भूल चूक की क्षमा मांगें। 

02:56 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी के दिन राहुकाल 

18 अगस्त, गुरुवार दोपहर 02: 06 मिनट से 03: 42 मिनट तक होगा

02:38 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी 2022 विशेष मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त 12: 05 मिनट से 12:56 मिनट तक 
वृद्धि योग: 17 अगस्त, बुधवार,  दोपहर 8: 56 मिनट से 18 अगस्त, गुरुवार, रात्रि 8: 41 मिनट पर

02:22 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी तिथि: 18 अगस्त 2022,  गुरुवार
अष्टमी तिथि का आरंभ: 18 अगस्त, गुरुवार रात्रि  09: 21 मिनट से 
अष्टमी तिथि का समाप्त:19 अगस्त, शुक्रवार रात्रि 10:59 मिनट तक

02:05 AM, 18-Aug-2022

क्योंं मनाया जाता है जन्माष्टमी पर्व?

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान श्री कृष्ण सभी मुरादें शीघ्र पूर्ण कर देते हैं। निसंतान स्त्रियां संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत करती हैं। हर साल भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म दिवस जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त यानी कि दो दिन पड़ रही है। श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर वृद्धि योग बन रहा है, इसे बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा का विधान है। 

01:49 AM, 18-Aug-2022

क्यों मनाते हैं दही हांडी?

कृष्ण के बचपन के शरारतों को याद करने के लिए जन्माष्टमी में माखन की मटकी को ऊंचाई पर टांग दिया जाता है। लड़के नाचते-गाते पिरामिड बनाते हुए मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ते हैं। इसे दही हांडी कहते हैं, जो लड़का ऊपर जाकर हांडी फोड़ता है, उसे गोविंदा कहा जाता है। 

01:28 AM, 18-Aug-2022

जन्माष्टमी के दिन दही हांडी का आयोजन

कुछ जगहों पर जन्माष्टमी के दिन दही हांडी का आयोजन होता है। विशेषकर इसका महत्व गुजरात और महाराष्ट्र में है। दही हांडी का इतिहास बहुत दिलचस्प है। बालपन में कान्हा बहुत नटखट थे। वह पूरे गांव में अपनी शरारतों के लिए प्रसिद्ध थे। कन्हैया को माखन और दही बहुत प्रिय था। उन्हें माखन इतना प्रिय था कि वह अपने सखाओं के साथ मिलकर गांव के लोगों के घर का माखन चोरी करके खा जाते थे। कान्हा से माखन बचाने के लिए महिलाएं माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटका दिया करती, लेकिन बाल गोपाल अपने सखाओं के साथ मिलकर एक पिरामिड बनाकर उसके जरिए ऊंचाई पर लटकी मटकी से माखन चोरी कर लेते।

12:56 AM, 18-Aug-2022

कैसे मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी?

जन्माष्टमी पर भक्त श्रद्धानुसार उपवास रखते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं। बाल गोपाल का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को घर में मौजूद लड्डू गोपाल की प्रतिमा का जन्म कराया जाता है। फिर उन्हें स्नान कराकर सुंदर वस्त्र धारण कराए जाते हैं। फूल अर्पित कर धूप-दीप से वंदन किया जाता है। कान्हा को भोग अर्पित किया जाता है। उन्हें दूध-दही, मक्खन विशेष पसंद हैं। इसलिए भगवान को भोग लगाकर सबको प्रसाद वितरित किया जाता है। 

12:40 AM, 18-Aug-2022

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

पुराणों के मुताबिक, श्रीकृष्ण त्रिदेवों में से एक भगवान विष्णु के अवतार हैं। कृष्ण के आशीर्वाद और कृपा को पाने के लिए हर साल लोग इस दिन व्रत रखते हैं, मध्य रात्रि में विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं। भजन कीर्तन करते हैं और जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया जाता है। कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी पर दही-हांडी का उत्सव भी होता है।

12:21 AM, 18-Aug-2022

कृष्ण जन्माष्टमी का इतिहास

भारत में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि भाई कंस के अत्याचार को कारागार में रह सह रही बहन देवकी ने भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अपनी आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण को जन्म दिया था। भगवान विष्णु ने पृथ्वी को कंस के अत्याचार और आतंक से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। इसी कथा के अनुसार हर साल भाद्रपद की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

11:47 PM, 17-Aug-2022

Janmashtami 2022 Live: जन्माष्टमी पर इस समय करेंगे पूजा तो मिलेगा दोगुना लाभ, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Krishna Janmashtami 2022: भगवान श्रीकृष्ण का धरती पर जन्म पूरी मानव जाति के लिए वरदान है। कहा जाता है कि द्वापर युग में कंस के अत्याचार बढ़ रहे थे, जिनका अंत करने और धर्म की स्थापना के लिए भगवाव विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने पृथ्वी लोक पर जन्म लिया। श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। हर साल इसी तिथि पर कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल 18 और 19 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार है। जन्माष्टमी में रात 12 बजे बाल गोपाल का जन्म होता है। देश में जन्माष्टमी के उत्सव पर उल्लास का माहौल है। 

विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें