राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रार्थना की कि त्योहार सभी को मन, वचन और कर्म में सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करे। राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन व शिक्षाएं भलाई व नैतिकता की सीख देते हैं।
गुणवान संतान की कामना रखने वाले दंपति जन्माष्टमी की रात इस मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपका होने वाला बच्चा गुणी और बुद्धिमान होगा।
देवकीसुतं गोविन्दम् वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।
धूप बत्ती, अगरबत्ती, कपूर, केसर, चंदन, यज्ञोपवीत , कुमकुम, अक्षत, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, आभूषण, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे, तुलसीमाला, खड़ा धनिया, सप्तमृत्तिका, सप्तधान, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, तुलसी दल, शुद्ध घी, दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न, छोटी इलायची, लौंग मौली, इत्र की शीशी, सिंहासन, बाजोट या झूला (चौकी, आसन), पंच पल्लव, पंचामृत, केले के पत्ते, औषधि, श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर, गणेशजी की तस्वीर, अम्बिका जी की तस्वीर, भगवान के वस्त्र, गणेशजी को अर्पित करने के लिए वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने के लिए वस्त्र, जल कलश, सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा, पंच रत्न, दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, बन्दनवार, ताम्बूल, नारियल, चावल, गेहूं, गुलाब और लाल कमल के फूल, दूर्वा, अर्घ्य पात्र आदि।
- जन्माष्टमी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि सभी तरह के कार्यों को निपटा लें।
- फिर घर के मंदिर का साफ-सफाई कर लें।
- इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आवहन करते हुए दीप प्रज्वलित करें।
- फिर बाद में लड्डू गोपाल के पूजन आरंभ कर दें।
- लड्डू गोपाल को जल से अभिषेक कर चंदन और भोग लगाएं।
- इसके बाद लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं।
- फिर रात्रि का इंतजार करते हुए दिन भर कृष्ण मंत्रों का जाप करें।
- रात्रि में 12 बजे भगवान का जन्म दिन मनाएं
- कान्हा को दूध,दही, घी, शहद, पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
-अंत में बाल गोपाल की आरती उतारे हुए मंगल गीत गाएं।
श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन ही एक प्रबंधन की किताब है,जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन जीने के लिए श्रेष्ठम सूत्र हैं। अगर आप दिमाग को शांत और मन को स्थिर रखने की कोशिश करें तो बुरी परिस्थितियों में भी आप अपने लिए कुछ बहुत बेहतरीन हल निकाल पाएंगे,
1.जीवन संघर्ष है,मुकावला करो
2. स्वस्थ्य शरीर से मिलती है विजय
3. पढ़ाई किताबी ना हो, रचनात्मक हो
4. रिश्तों को सहेजकर रखें
5. शांति से सब कुछ संभव है
परिवार में किसी वजह से सुख शांति नहीं है या फिर पति-पत्नी के बीच क्लेश रहता है तो आपको कृष्ण-राधाजी की आलिंगनवद्ध तस्वीर अपने बेडरूम की उत्तर दिशा में लगानी चाहिए।ध्यान रहे सोते समय पैर इधर न हो।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जाता है। लेकिन इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं हो पा रहा है। अष्टमी तिथि 18 अगस्त को शाम के 09 बजकर 21 मिनट से शुरू हो रही है जो 19 अगस्त की रात 10 बजकर 59 मिनट पर खत्म हो जाएगी।
अगर आप अंदर आत्मविश्वास की कमी है तो अपने घर की उत्तर दिशा में अर्जुन को गीता का ज्ञान देते हुए श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाएं और रोज पूजा करें, इससे आपमें आत्मविश्वास आएगा।साथ ही किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देते वक्त आप नहीं घबराएंगे।
- कृष्ण जन्माष्टमी पर घर पर बालगोपाल की मूर्ति के लिए नए वस्त्र जरूर खरीदें और उन्हे पहनाएं।
- मोरमुकुट, मोरपंख, आभूषण,बांसुरी और माला जरूर लाएं।
- जन्मदिन पर बालगोपाल की पूजा और आरती जरूर उतारें और माथे पर टीका लगाएं।
- जन्माष्टमी पर बाल गोपाल के लिए झूले लाएं और उन्हें झूला झूलाएं।
सिंह राशि- जिन जातकों की राशि सिंह है वे लोग जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को गुलाबी रंग का वस्त्र पहनाएं। मेवे का भोग लगाएं।
कन्या राशि- कन्या राशि वाले कान्हा को हरे रंग का वस्त्र पहनाएं और माखन मिश्री का भोग अर्पित करें।
तुला राशि - इस राशि के जातक भगवान कृष्ण को केसरिया रंग का कपड़ा अर्पित करें और धी और माखन का भोग लगाएं।
वृश्चिक राशि- इस राशि को लोग भगवान कृष्ण को लाल वस्त्र पहनाएं और तुलसी के पत्ते के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का यह 5249वां जन्म दिवस है। शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रात के आठवें मुहूर्त में हुआ था। अष्टमी तिथि की उदया तिथि 19 को है ऐसे में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव 19 अगस्त को मनाना ज्यादा अच्छा रहेगा। इस जन्माष्टमी पर 8 तरह का शुभ योग भी बन रहा है। ये 8 शुभ योग इस प्रकार है- महालक्ष्मी, बुधादित्य,ध्रुव, छत्र,कुलदीपक,भारती, हर्ष और सत्कीर्ति
अष्टमी तिथि 18 और 19 अगस्त दो दिन होने से इस बार कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में जन्माष्टमी कब मनाना उचित रहेगा इसका संक्षिप्त ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। दरअसल इस बार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अगस्त को सुबह के बजाय रात में करीब 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है। फिर 19 अगस्त को सूर्योदय से रात तक रहेगी। ऐसे में अष्टमी की उदया तिथि 19 अगस्त को मानी जाएगी। इस उदया तिथि के अनुसार जन्माष्टमी तिथि 19 अगस्त का मनाना ज्यादा अच्छा रहेगा।
इस बार जन्माष्टमी दो दिन यानी 18 और 19 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी, दरअसल अष्टमी तिथि 18 अगस्त को सूर्योदय के समय नहीं लगेगी बल्कि रात को शुरू होगी। 19 अगस्त को अष्टमी तिथि दिन और रात दोनों समय रहेगी। ऐसे में कृष्ण की नगरी मथुरा, वृंदावन और द्वारका में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव 19 अगस्त को मनाया जाएगा।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग बनने पर हुआ था। सभी 27 नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। इस नक्षत्र की गिनती बहुत ही शुभ नक्षत्रों में होती है।
जन्माष्टमी के वॉलपेपर और शुभकामना संदेश
जन्माष्टमी के वॉलपेपर और शुभकामना संदेश
जन्माष्टमी के वॉलपेपर और शुभकामना संदेश
जन्माष्टमी के दिन कान्हा की पूजा के लिए नीशीथ काल पूजा का मुहूर्त- रात 12:03 से 12:47 तक
अवधि- 0 घंटे 44 मिनट
जिनको श्रीकृष्ण की षोडशोपचार पूजा करना संभव ना हो उनको पंचोपचार पूजा करनी चाहिए। पूजन करते समय 'सपरिवाराय श्री कृष्णाय नमः' यह नाम मंत्र कहते हुए एक-एक सामग्री श्री कृष्ण को अर्पण करना चाहिए। श्री कृष्ण जी को दही ,पोहा और मक्खन का भोग लगाना चाहिए। उसके पश्चात श्री कृष्ण जी की आरती करनी चाहिए।
श्रीकृष्ण की पूजा में उनकी प्रतिमा को गोपी चंदन का गंध प्रयोग में लाया जाता है। श्रीकृष्ण की पूजा करते समय अनामिका से गंध लगाना चाहिए। श्री कृष्ण जी को हल्दी कुमकुम चढ़ाते समय पहले हल्दी और फिर कुमकुम दाहिने हाथ के अंगूठे और अनामिका मैं लेकर उनके चरणों में अर्पण करना चाहिए। अंगूठा और अनामिका जोड़कर जो मुद्रा तैयार होती है,उससे पूजक का अनाहत चक्र जागृत होता है। उस कारण भक्ति भाव निर्माण होने में सहायता होती है।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव का समय होता है। इसमें रात्रि के समय भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही जोश और भक्ति के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा के दौरान हमें क्या कुछ करना चाहिए और क्या नहीं।
- कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा में कान्हा को पंचीरी और पंचामृत का भोग जरूर लगाएं।
- कान्हा को भोग लगाते समय सभी चीजों में तुलसी के पत्ते अवश्य डालें।
- कृष्ण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को नए कपड़े अवश्य ही पहनाएं।
- पूजा में हमेशा साफ कपड़े और साफ बर्तनों का प्रयोग करें।
- कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात को ही करें और घी का दीपक जलाएं।
- कृष्ण जन्माष्टमी पूजा के दौरान कभी भी किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें।
भाद्रपद अष्टमी तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल भी जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त को है। जन्माष्टमी पर निशीथकाल में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस बार निशीथकाल का समय रात के 12 बजकर 03 मिनय से 12 बजकर 47 मिनट तक है। ऐसे में पूजा के लिए 44 मिनट का शुभ मुहूर्त है।
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इस कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आप अपनी राशि के अनुसार कान्हा को भोग लगाकर प्रभु को प्रसन्न करें और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना का आशीर्वाद प्राप्त करें।
मेष राशि- इस राशि के जातकों को जन्माष्टमी पर कान्हा को लाल वस्त्र पहनाएं और माखन-मिश्री का भोग चढ़ाएं।
वृषभ राशि- इस राशि के लोग चांदी के वर्क से कान्हा की साज-सजावट करें और माखन का भोग लगाएं।
मिथुन राशि- आप कान्हा को दही का भोग लगाएं।
कर्क राशि- कर्क राशि के लोग जन्माष्टमी के दिन दूध और केसर का भोग लगाएं।
1- ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
2- कृं कृष्णाय नमः
3- गोकुल नाथाय नमः
4- ऊं श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा
5- ओम क्लीम कृष्णाय नमः
6- पंचामृत स्नान
“पंचामृतं मयाआनीतं पयोदधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।
7-स्नान मंत्र
“गंगा, सरस्वती, रेवा, पयोष्णी, नर्मदाजलैः। स्नापितोअसि मया देव तथा शांति कुरुष्व मे।।
इस वर्ष जन्माष्टमी 18 और 19 अगस्त दो दिन मनाई जा रही है। 18 अगस्त,गुरुवार के दिन बहुत ही अच्छा शुभ योग का संयोग बन रहा है। इस दिन वृद्धि योग का संयोग है। इसके अलावा जन्माष्टमी पर अभिजीत मुहूर्त 18 अगस्त को 12 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। 18 अगस्त की रात 08 बजकर 41 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। वहीं ध्रुव योग का भी संयोग 18 अगस्त का रात 08 बजकर 41 मिनट से 19 अगस्त की रात 08 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और जन्मोत्सव का पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। रात्रि में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हुए उनके जन्म का उत्सव बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। अष्टमी तिथि आज यानी 18 अगस्त को शाम 09 बजकर 21 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 19 अगस्त को रात के 10 बजकर 59 मिनट पर खत्म होगी।
18 अगस्त, गुरुवार दोपहर 02: 06 मिनट से 03: 42 मिनट तक होगा
अभिजीत मुहूर्त 12: 05 मिनट से 12:56 मिनट तक
वृद्धि योग: 17 अगस्त, बुधवार, दोपहर 8: 56 मिनट से 18 अगस्त, गुरुवार, रात्रि 8: 41 मिनट पर
जन्माष्टमी तिथि: 18 अगस्त 2022, गुरुवार
अष्टमी तिथि का आरंभ: 18 अगस्त, गुरुवार रात्रि 09: 21 मिनट से
अष्टमी तिथि का समाप्त:19 अगस्त, शुक्रवार रात्रि 10:59 मिनट तक